Home छत्तीसगढ़ ढलानों पर बनेगी जल-संरक्षण की राह, संवरेंगे खेत और गांव

ढलानों पर बनेगी जल-संरक्षण की राह, संवरेंगे खेत और गांव

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रायपुऱ : ढलानों पर बनेगी जल-संरक्षण की राह, संवरेंगे खेत और गांव

 

 

 

 

 

रायगढ़ जिले में कुल 16 हजार 873 ट्रेंच निर्माण का लक्ष्य निर्धारित, 52.55 लाख रुपये स्वीकृत

रायपुऱ, 1 सितंबर 2026

वर्षा जल के बेहतर प्रबंधन, मिट्टी के कटाव को रोकने और ग्रामीण क्षेत्रों में प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को बढ़ावा देने की दिशा में रायगढ़ जिले में स्टैगर्ड कंटूर ट्रेंच एवं कंटूर ट्रेंच निर्माण के कार्य स्वीकृत किए गए हैं। ढलान वाले क्षेत्रों में किए जा रहे ये कार्य वर्षा जल के तेज बहाव को नियंत्रित कर उसे भूमि में समाहित करने में सहायक होंगे, जिससे खेतों की नमी और भूमि की उत्पादकता को बनाए रखने में मदद मिलेगी।

जिले में कुल 16 हजार 873 ट्रेंच निर्माण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जो लगभग 38.27 एकड़ क्षेत्र में निर्मित किए जाएंगे। इन कार्यों के लिए 52.55 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। इस योजना के अंतर्गत रायगढ़, खरसिया और तमनार विकासखंड की विभिन्न ग्राम पंचायतों में कुल 28 कार्य स्वीकृत किए गए हैं। इनमें रायगढ़ विकासखंड में 6, खरसिया में 16 तथा तमनार विकासखंड में 6 कार्य शामिल हैं।

’वर्षा जल का संरक्षण, मिट्टी के कटाव पर नियंत्रण’

स्टैगर्ड कंटूर ट्रेंच एवं कंटूर ट्रेंच का निर्माण विशेष रूप से ढलान वाले क्षेत्रों में वर्षा जल के बहाव को नियंत्रित करने के उद्देश्य से किया जाता है। इन संरचनाओं के माध्यम से पानी को रोककर धीरे-धीरे जमीन में समाहित होने का अवसर मिलता है। इससे भू-क्षरण कम होने, मिट्टी में नमी बनाए रखने और भूमि की उत्पादक क्षमता को संरक्षित करने में मदद मिलेगी।

’प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ रोजगार का अवसर’

इन कार्यों को ग्रामीण समुदाय की भागीदारी और श्रम आधारित गतिविधियों के माध्यम से क्रियान्वित किया जा रहा है। इससे एक ओर जल, जंगल और जमीन जैसे प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को बढ़ावा मिल रहा है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण परिवारों के लिए रोजगार के अवसर भी सृजित हो रहे हैं। ढलानों पर बनाई जा रही ये छोटी-छोटी जल संरचनाएं भविष्य में खेतों और गांवों के लिए बड़े बदलाव का आधार बन सकती हैं। “जल और मिट्टी का संरक्षण, समृद्ध गांव की मजबूत नींव” के उद्देश्य के साथ रायगढ़ जिले में किए जा रहे ये कार्य प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन और ग्रामीण आजीविका सशक्तीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होंगे।