ऑपरेशन से होना था प्रसव, डॉक्टर से फोन पर संपर्क के बाद निजी अस्पताल ले जाने की सलाह का आरोप; इमरजेंसी में इलाज नहीं मिलने की शिकायत
मुंगेली। जिला अस्पताल मुंगेली की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। एक प्रसूता को ऑपरेशन के माध्यम से प्रसव कराया जाना था, लेकिन परिजनों के अनुसार कथित रूप से ऑपरेटर द्वारा पैसे की मांग की गई। रकम देने में असमर्थता जताने के बाद महिला को रात करीब 2 बजे तक दर्द से तड़पते रहने का आरोप है। परिजनों का दावा है कि इमरजेंसी में तत्काल उपचार की उम्मीद के बावजूद उन्हें राहत नहीं मिली और अंततः निजी अस्पताल ले जाने के लिए मजबूर होना पड़ा।
पैसा देने में असमर्थता के बाद बढ़ी परेशानी
परिजनों के अनुसार, महिला को प्रसव के लिए जिला अस्पताल लाया गया था। चिकित्सकीय स्थिति के चलते उसका ऑपरेशन होना था। इसी दौरान उनसे कथित तौर पर पैसे की मांग की गई। परिजनों का कहना है कि आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण वे मांगी गई राशि देने में सक्षम नहीं थे।
आरोप है कि पैसा नहीं देने के बाद महिला को समय पर आवश्यक उपचार नहीं मिल सका और वह देर रात तक दर्द से परेशान होती रही। परिजनों के अनुसार, रात करीब 2 बजे तक स्थिति गंभीर बनी रही।
डॉक्टर से फोन पर संपर्क, निजी अस्पताल ले जाने की सलाह का आरोप
परिजनों का कहना है कि जब अस्पताल में तत्काल उपचार नहीं मिला तो डॉक्टर से फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया। आरोप है कि फोन पर उन्हें निजी अस्पताल ले जाने की सलाह दी गई। इसके बाद परिजन असमंजस में पड़ गए कि आखिर सरकारी अस्पताल में इलाज की व्यवस्था होने के बावजूद उन्हें निजी अस्पताल क्यों जाना पड़ रहा है।
परिजनों का यह भी आरोप है कि इमरजेंसी में तत्काल कोई डॉक्टर उपलब्ध नहीं होने के कारण मरीज को उचित उपचार नहीं मिल पाया
एंबुलेंस चालक के जवाब ने भी खड़े किए सवाल
परिजनों के मुताबिक, जब मरीज को निजी अस्पताल ले जाने की नौबत आई तो एंबुलेंस चालक से संपर्क किया गया। आरोप है कि चालक ने कहा कि वह मुंगेली के दो प्रमुख निजी अस्पतालों में ही मरीज को ले जा सकता है, अन्य स्थान पर नहीं।
इस बात ने परिजनों के मन में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। उनका कहना है कि यदि मरीज को अस्पताल से बाहर ले जाना ही है तो एंबुलेंस चालक द्वारा किसी विशेष अस्पताल तक सीमित रहने का कारण भी स्पष्ट होना चाहिए। परिजनों ने पूरे मामले में निजी अस्पतालों और मरीजों के रेफरल के बीच किसी संभावित आर्थिक हित या कमीशन व्यवस्था की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है।
क्या पैसे के आगे सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था बेबस?
पूरे घटनाक्रम ने सबसे बड़ा सवाल यही खड़ा किया है कि यदि किसी गरीब परिवार के पास कथित रूप से मांगे गए पैसे नहीं हैं, तो क्या उसे सरकारी अस्पताल में समय पर उपचार नहीं मिलेगा? सरकारी अस्पताल में आने वाले मरीजों को बेहतर और समय पर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराना व्यवस्था की जिम्मेदारी है।
ऑपरेटर की भूमिका पर भी सवाल
सूत्रों के मुताबिक, संबंधित ऑपरेटर ऑपरेशन, प्राइवेट रूम व अन्य सुविधाओं के लिए डॉक्टर और मरीज के परिजनों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाता है। आरोप है कि वह डॉक्टर के नाम पर मरीज के अटेंडर से पैसे लेता है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन आवेदक के वॉइस रिकॉर्डिंग के अनुसार ऑपरेटर के द्वारा स्पष्ट पैसे की मांग किया गया है यह एक जांच का विषय है
स्वास्थ्य मंत्री से शिकायत की तैयारी
पीड़ित परिवार अब पूरे मामले को स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के सामने रखने की तैयारी में है। परिजन चाहते हैं कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और यह पता लगाया जाए कि महिला को समय पर उपचार क्यों नहीं मिला, कथित रूप से पैसे की मांग किसने की, डॉक्टर से संपर्क के बाद निजी अस्पताल जाने की सलाह क्यों दी गई और एंबुलेंस चालक द्वारा कथित रूप से चुनिंदा अस्पतालों में ही मरीज ले जाने की बात क्यों कही गई।
परिजनों का कहना है कि वे अपनी शिकायत के साथ पूरे घटनाक्रम की जानकारी स्वास्थ्य मंत्री के सामने रखेंगे और जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की मांग करेंगे
अब बड़ा सवाल
क्या डॉक्टर के नाम पर ऑपरेटर के द्वारा अवैध वसूली करने वाले व्यक्ति पर कार्रवाई होगी
क्या सरकारी डॉक्टर होते हुए भी प्राइवेट हॉस्पिटल पर सेवा देने वाले पर भी होगी?
क्या पैसे की कथित मांग की जांच होगी? क्या रात 2 बजे तक प्रसूता के तड़पने की शिकायत पर जिम्मेदारी तय होगी? और क्या सरकारी अस्पताल से निजी अस्पतालों तक मरीजों के रिफर की पूरी व्यवस्था की जांच होगी?
इन सवालों के जवाब जांच के बाद ही सामने आ सकेंगे।
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