Home छत्तीसगढ़ सेवा की कहानी : मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना से प्रशिक्षण लेकर दिव्यांग...

सेवा की कहानी : मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना से प्रशिक्षण लेकर दिव्यांग रमेश बने आत्मनिर्भर  

0
All PDF Reader 20260626 00.30.11_page-0004
All PDF Reader 20260626 00.30.11_page-0001
All PDF Reader 20260626 00.30.11_page-0002
All PDF Reader 20260626 00.30.11_page-0003

रायपुर : सेवा की कहानी : मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना से प्रशिक्षण लेकर दिव्यांग रमेश बने आत्मनिर्भर

 

 

 

 

 

सिलाई कार्य में पारंगत हुए

रायपुर, 27 सितंबर 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की 25 वर्षों की सार्वजनिक सेवा यात्रा और सेवा, सुशासन एवं जनकल्याण के संकल्प से प्रेरित होकर देश में ऐसे प्रयासों को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिनसे समाज के प्रत्येक वर्ग को आगे बढ़ने के अवसर मिलें। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार भी कौशल विकास, रोजगार और दिव्यांगजन सशक्तिकरण के माध्यम से लोगों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। इन्हीं प्रयासों से महासमुंद जिले के ग्राम मामाभांचा निवासी श्री रमेश कुमार कन्नौजे ने अपनी शारीरिक चुनौतियों को पीछे छोड़कर हुनर को अपनी ताकत बनाया और आज सफल दर्जी के रूप में आत्मनिर्भर जीवन जी रहे हैं।

जन्म से दोनों पैरों से दिव्यांग रमेश के लिए जीवन की राह आसान नहीं रही। वे अपने पैरों पर खड़े नहीं हो सके, लेकिन उनके हौसलों ने उन्हें कभी हार मानने नहीं दी। आत्मनिर्भर बनने की दृढ़ इच्छा ने उन्हें सिलाई के हुनर से जोड़ा। आज वे अपने घर पर ही छोटा सा सिलाई केंद्र संचालित कर परिवार की जिम्मेदारियों में अपना योगदान दे रहे हैं।

रमेश बताते हैं कि वे मोटरयुक्त सिलाई मशीन से ब्लाउज, सूट, स्कूल ड्रेस, पेटीकोट सहित विभिन्न प्रकार के कपड़ों की सिलाई करते हैं। उनके काम की मांग इतनी बढ़ गई है कि कई बार उनके पास आने वाला पूरा काम अकेले कर पाना भी मुश्किल हो जाता है। सिलाई के कार्य से उन्हें प्रतिमाह लगभग 8 से 10 हजार रुपये की आमदनी हो रही है। रमेश के जीवन में बदलाव की शुरुआत तब हुई, जब एक दिन उन्होंने कुछ युवाओं को एक जैसी ड्रेस में जाते देखा। बातचीत करने पर उन्हें जानकारी मिली कि मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना के अंतर्गत निःशुल्क सिलाई प्रशिक्षण दिया जा रहा है। आत्मनिर्भर बनने की अपनी इच्छा को पूरा करने के लिए रमेश ने भी प्रशिक्षण प्राप्त करने का निर्णय लिया।

इसके बाद उन्होंने लगभग चार माह तक प्रतिदिन करीब 10 किलोमीटर का सफर तय कर सिलाई प्रशिक्षण प्राप्त किया। शारीरिक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने नियमित रूप से प्रशिक्षण लिया और सफलतापूर्वक प्रशिक्षण पूर्ण कर प्रमाण पत्र प्राप्त किया। प्रशिक्षण से मिले तकनीकी ज्ञान और आत्मविश्वास ने उनके हुनर को नई दिशा दी। इसके बाद उन्होंने सिलाई कार्य को अपनी आजीविका का मजबूत आधार बना लिया। आज रमेश अपने घर पर ही सिलाई का काम कर रहे हैं और अपनी मेहनत से प्रतिमाह आय अर्जित कर परिवार के पालन-पोषण में सहयोग कर रहे हैं। उनके लिए दिव्यांगता अब उनकी राह की बाधा नहीं, अपने हौसले और हुनर को साबित करने की प्रेरणा बन गई है। उन्हें बैटरी चलित वाहन की सुविधा भी मिली है, जिससे उनके आवागमन और दैनिक कार्यों में काफी सहूलियत हुई है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए रमेश कहते हैं कि मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना ने उन्हें हुनर सीखने और अपने पैरों पर आत्मनिर्भर बनने का अवसर दिया।