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Chhattisgarh : विचारधारा की जंग के शिकार बन सकते हैं कुछ और कुलपति

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद से उच्च शिक्षा में विचारधारा की लड़ाई छिड़ गई है।  पहले खबर दी थी कि 15 साल तक भाजपा की सरकार में विश्व विद्यालयों में संघ की विचारधारा को प्रश्रय देने का आरोप कांग्रेस लगाती रही। सरकार बनाने के बाद अब कुलपतियों पर इस्तीफा देने का दबाव है। खबर तो यह भी है कि इस मुद्दे पर सरकार और राजभवन के बीच बन नहीं रही है। विश्व विद्यालयों की राजनीति इस बीच गरम हो गई है।

दुर्ग विश्व विद्यालय के कुलपति डॉ शराफ ने इस्तीफा दिया तो इसे निजी मामला बताया गया। हालांकि अंदरखाने खबर यह है कि कुलपतियों से साफ कह दिया गया है कि वे खुद पद छोड़ दें। अगर नहीं छोड़ा तो सरकार हटाएगी। सरकार सीधे तो हटा नहीं सकती इसलिए कुलपतियों के खिलाफ पहले हुई शिकायतों को खंगाला जा रहा है। इसी दबाव में शनिवार को कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विवि के कुलपति प्रोफेसर मानसिंह परमान ने इस्तीफा दे दिया है। अब बचे हुए पांच विश्व विद्यालयों के कुलपति भी निशाने पर हैं।

खंगाले जा रहे आरोप

पंडित सुंदरलाल शर्मा ओपन यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रोफेसर बीजी सिंह की कुर्सी पर भी खतरा मंडरा रहा है। उन पर पूर्व शिक्षा मंत्री केदार कश्यप की पत्नी के नकल प्रकरण को दबाने का आरोप है। केदार की पत्नी का प्रकरण मुन्नी बाई के नाम से चर्चा में रहा। उनकी जगह परीक्षा में कोई और युवती बैठी थी।

तब विपक्ष में रही कांग्रेस ने खूब हल्ला मचाया लेकिन यह मामला दबा दिया गया। बस्तर और सरगुजा विवि के कुलपतियों पर नियुक्तियों में गड़बड़ी के आरोप लगे थे। इन आरोपों के आधार पर उन्हें हटाने की संभावना देखी जा रही है। इंदिरा गांधी कृषि विवि के कुलपति डॉ.एसके पाटिल की कुर्सी पर भी खतरा मंडरा रहा है।

कुलसचिवों की विदाई तय

सरकार ने कुछ दिन पहले तीन कुलसचिवों का तबादला किया था। पत्रकारिता विवि के कुलपति के इस्तीफे के साथ ही वहां के कुलसचिव की भी छुट्टी की गई। सरकार विश्वविद्यालयों में अपनी विचारधारा के लोगों को लाना चाहती है। इसके लिए एक विधेयक भी लाया गया है जिसमें उप कुलाधिपति की नियुक्ति का अधिकार सरकार ने अपने पास रखा है।

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