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जिला समाचार : रायपुर में बांटने थे मछली के एक लाख बीज, आधा भी नहीं बांट पाए

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राज्य मत्स्य विभाग द्वारा प्रदेश के सभी जिलों सहित रायपुर में मत्स्य बीज का वितरण किया जाता है। रायपुर जिले में एक लाख मछली बीज बांटने का लक्ष्य था, लेकिन विभाग आधा भी नहीं बांट पाया और नया सत्र शुरू हो गया है। विभाग के अधिकारी की मानें तो बरसात में विभाग में पानी भर गया था, जिसके कारण काफी संख्या में बीज बह गए। जो बचे थे, उसमें से लगभग बीस हजार बीज का वितरण हुआ है। इसी तरह की स्थिति लगभग अधिकांश जिले में है। ज्ञात हो कि मछली बीज का उत्पादन जून में शुरू होता है। उसके बाद विभाग के माध्यम से प्रशिक्षित मछुआरों को मुफ्त जीरा (स्पान) का वितरण जुलाई से अगस्त तक किया जाता है। इस सत्र का लक्ष्य क्या होगा, यह 28 अप्रैल की बैठक में तय हो सकता है।

मौसम की दुहाई

लक्ष्य पूरा ने करने के मामले में विभाग स्वयं की खामियों को नजरअंदाज कर रहा है। मौसम ठीक नहीं होने की दुहाई दे रहे हैं। ऐसे में विभाग की योजनाएं सिर्फ फाइलों तक सिमट कर रह गई हैं। दूसरी ओर किसान मछली के बीज के लिए विभाग के चक्कर लगाते रहते हैं। इन्हें हर बार यही कहा जाता है कि जल्द ही वितरण होगा। प्रदेश में मछली पालन करने वाले लगभग आठ लाख मछुआरा हैं, जिन्हें योजना के माध्यम से स्पान, हेचरी, तालाब आदि का वितरण होता है।

मृगल प्रजाति की संख्या अधिक

बीज वितरण में रोहू, कतला, मृगल प्रजाति की संख्या अधिक रहती है। ज्ञात हो कि मछलियों की पैदावार बढ़ाने में छत्तीसगढ़ को लगातार अच्छी सफलता मिली है। गत 12 वर्षों में 25 लाख मीट्रिक टन से अधिक मछलियों की पैदावार की जा चुकी है। इससे छत्तीसगढ़ अंतर्देशीय मछली उत्पादन के क्षेत्र में देश में पांचवें बड़े राज्य के रूप में उभरकर सामने आया है। छत्तीसगढ़ मछली बीज उत्पादन और आपूर्ति के क्षेत्र में भी आत्मनिर्भर राज्य माना जाने लगा है।