Home समाचार देशभर में पहचान बना रहा चांदपुर का मंगलौरी गुड़

देशभर में पहचान बना रहा चांदपुर का मंगलौरी गुड़

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चांदपुर। क्षेत्र में पावर कोल्हू पर छोटे लड्डूू के आकार में बन रहा गुड़ देश के कोने-कोने में मंगलौरी लड्डू के नाम से अपनी पहचान बना रहा है। मंगलौरी गुड़ सबसे अच्छा माना जाता है। चांदपुर गुड़ मंडी से सीजन में प्रतिदिन 20 से 25 ट्रक गुड़ देश के अन्य राज्यों में जाते हैं। गुड़ के इस व्यापार से मंडी शुल्क के रूप में सरकार को करीब एक लाख से अधिक प्रतिदिन का लाभ होता है।
कृषि उत्पादन मंडी समिति चांदपुर में गुड़ का बड़ा कारोबार है। क्षेत्र के गांव अकौंधा, रौनिया, बास्टा, सिंघा, अम्हेड़ा, पैजनियां, गोयली, हल्लानंगला, सिसौना, खल्लासपुर आदि गांव में बड़ी तादाद में पावर कोल्हू का संचालन हो रहा है। यहां का बना गुड़ चांदपुर गुड़ मंडी में आता है। गुड़ मंडी से ट्रकों में लोड होकर गुड़ पंजाब, राजस्थान, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, बंगाल, बिहार, झारखंड आदि राज्यों में जाते हैं। उत्तराखंड के रुड़की क्षेत्र के गांव खेड़ा मुगल, पुरकाजी, लिब्बाहेड़ी, झबरेड़ा, मंगलौर, चुड़ियाला आदि के लोग क्षेत्र में आकर पावर कोल्हू किराए पर लेकर गुड़ बनाते हैं। ये लोग कोल्हू पर काम करने वाले कारीगरों को भी अपने साथ ही लाते हैं। इनके कोल्हू पर आम गुड़ के साइज से छोटे साइज में गुड़ बनते हैं, जो मंगलौरी गुड़ व मंगलौरी लड्डू के नाम से जाने जाते हैं।
प्रतिदिन तैयार होता है करीब 15 क्विंटल गुड़
गांव खेड़ा मुगल निवासी कोल्हू संचालक सुलेमान ने बताया कि वह करीब 10-15 साल से इस काम को कर रहे हैं। प्रतिदिन करीब 15 क्विंटल गुड़ तैयार होता है। गांव खेड़ा मुगल निवासी कोल्हू संचालक मोहम्मद इकराम ने बताया कि उनका यह पुश्तैनी काम है। दादा परदादा के समय से ही पावर कोल्हू पर गुड़ बना रहे हैं। इस गुड़ की अपनी क्वालिटी है। अच्छी क्वालिटी, अच्छी कारीगरी पर निर्भर करती है। गुड़ आम गुड़ की तरह ही गन्ने के रस से ही बनाया जाता है, लेकिन अच्छी क्वालिटी के लिए गन्ने के रस को साफ करना व उसे पकाने पर निर्भर करता है। रस को साफ करने व पकाने की ही कारीगरी है। इस गुड़ का ज्यादा अच्छा स्वाद होता है। 
और बढ़ाया जा सकता है कारोबार’
गुड़ खांडसारी व्यापार मंडल चांदपुर के अध्यक्ष चौधरी अशोक कुमार ने बताया कि कुछ राज्यों में उत्तर प्रदेेश की अपेक्षा मंडी शुल्क बहुत ही कम है। जिसका प्रभाव गुड़ की मांग पर पड़ता है। प्रदेश में ढाई प्रतिशत मंडी शुल्क लगता है। यदि सरकार द्वारा गुड़ उद्योग को और सुविधा दे तो क्षेत्र में गुड़ का कारोबार और बढ़ाया जा सकता है। 
दाम है ज्यादा
सामान्य साइज के गुड़ में एक किलो में दस से 12 लड्डू आते हैं, जबकि मंगलौरी गुड़ में एक किलोग्राम में 14 से 16 लड्डू गुड़ चढ़ते हैं। इसका दाम भी सामान्य गुड़ से अधिक होता है। सामान्य आकार वाले गुड़ का दाम तीन हजार रुपये प्रति क्विंटल है, जबकि मंगलौरी गुड़ की कीमत तीन हजार सात सौ रुपये प्रति क्विंटल है।