Home स्वास्थ गर्मियों में किसी अमृत से कम नहीं है ‘काला नमक’, देखें पूरी...

गर्मियों में किसी अमृत से कम नहीं है ‘काला नमक’, देखें पूरी खबर…

IMG-20251011-WA0045
IMG-20250614-WA0035
IMG-20250614-WA0034
IMG-20250614-WA0033
IMG-20250614-WA0032
IMG-20250614-WA0030
IMG-20250614-WA0031
IMG-20250614-WA0029
IMG-20250614-WA0028

IMG-20240704-WA0019
IMG-20220701-WA0004
WhatsApp-Image-2022-08-01-at-12.15.40-PM
1658178730682
WhatsApp-Image-2024-08-18-at-1.51.50-PM

भारत में ज्यादातर गर्मियों में जो भी पेय तैयार किए जाते हैं, उनमें एक चीज हमेशा इस्तेमाल की जाती है, वो है काला नमक। गर्मियों में बनने वाले ज्यादातर पेय पदार्थों में काले नमक का इस्तेमाल होता है। रायता, आम पन्ना, जलजीरा या नींबूपानी इन सबमें काला नमक का विशेष तौर पर इस्तेमाल किया जाता है।
गुणकारी काले नमक के फायदे
काला नमक एक ठंडा नमक है, इसीलिए यह आयुर्वेदिक दवाओं और उपचार में एक महत्वपूर्ण सामग्री है। कहा जाता है कि यह नमक चिकित्सीय लाभ से भरा हुआ है।
काला नमक उन लोगों के लिए अच्छा है जो पाचन संबंधी समस्याओं से परेशान रहते हैं। काला नमक कब्ज और गर्मियों के दौरान पेट फूलना जैसी परेशानियों से राहत दिलाता है। काला नमक इन दोनों परेशानियों को कम करने में मदद करता है। बहुत ज्यादा गर्मी के चलते काफी लोगों को आंतों में गैस और जलन जैसी समस्या होने लगती है। वहीं पेय और खाद्य पदार्थों में काला नमक डालने से आंतों में होने वाली गैस की परेशानी से राहत मिलती है।
काला नमक सीने में होने वाली जलन को दूर करने में मदद करता है। गर्मी के दौरान होने वाली यह एक आम समस्या है। जो आमतौर पर तैलीय और भारी खाद्य पदार्थों द्वारा हो जाती है।
आजकल की लाइफस्टाइल के चलते लोग तरह-तरह की बीमारियों के शिकार हो रहे हैं। जिनमें प्रमुख है हाइपरटेंशन। गलत खानपान के चलते व गलत आदतों के कारण हाइपरटेंशन की समस्या लोगों को होने लगती है। लोगों में हाइपरटेंशन के प्रति जागरुकता फैलाने के लिए हर साल 17 मई को वर्ल्ड हाइपरटेंशन डे मनाया जाता है। साथ ही उन्हें बताया जाता है कि इस खतरनाक बीमारी से कैसे बचाव किया जा सकता है।
क्या है हाइपरटेंशन
हाइपरटेंशन एक ऐसी बीमारी है जिसमें धीरे-धीरे आपका हार्ट, किडनी व शरीर के दूसरे अंग काम करना बंद कर सकते हैं। हाइपरटेंशन एक साइलेंट किलर है। हाइपरटेंशन कई कारणों से होता है, जिनमें से कुछ कारण शारीरिक और कुछ मानसिक होते हैं। हाइपरटेंशन में रक्तचाप 140 के पार पहुंच जाता है।