Home समाचार स्वामीजी की भविष्यवाणी राजीव गांधी को लेकर सच हुई थी…

स्वामीजी की भविष्यवाणी राजीव गांधी को लेकर सच हुई थी…

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पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी (Rajiv Gandhi) राजनीति में आने को इच्छुक नहीं थे. उनके राजनीति में आने को लेकर एक दिलचस्प वाकया बताया जाता है…

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी (Rajiv Gandhi) की 75वीं जयंती पर पूरा देश उन्हें याद कर रहा है. राजीव गांधी के समाधिस्थल वीरभूमि पर पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, पूर्व पीएम मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने श्रद्धांजलि दी. प्रधानमंत्री मोदी (PM Modi) ने भी ट्विटर पर राजीव गांधी को श्रद्धांजलि दी.

20 अगस्त 1944 को जन्में राजीव गांधी देश के सबसे कम उम्र के प्रधानमंत्री बने थे. 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद, जब अचानक उन्हें प्रधानमंत्री की कुर्सी मिली तो उनकी उम्र महज 40 साल थी. पायलट की ट्रेनिंग ले चुके राजीव गांधी राजनीति में आने को इच्छुक नहीं थे, लेकिन परिस्थितियों ने उन्हें देश का सबसे कम उम्र का प्रधानमंत्री बना दिया.

इंजीनियरिंग की पढ़ाई की लेकिन डिग्री नहीं ले पाए
राजीव गांधी ने पायलट बनने से पहले इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी, लेकिन वो पढ़ाई पूरी नहीं कर पाए. क्रैंबिज के ट्रीनिटी कॉलेज के इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट में उन्होंने दाखिला लिया था. तीन साल की पढ़ाई के बाद भी उन्हें डिग्री नहीं मिल पाई. इसके बाद राजीव गांधी ने लंदन के इंपीरियल कॉलेज के मैकेनिकल इंजीनियरिंग में एडमिशन लिया. लेकिन वहां भी वो पढ़ाई पूरी नहीं कर पाए. राजीव गांधी कहा करते थे कि उन्हें रटने में दिलचस्पी नहीं थी. इसलिए वो इंजीनियरिंग की परीक्षाओं में फेल होते रहे. इसके बाद राजीव गांधी ने दिल्ली के फ्लाइंग क्लब में एडमिशन लिया और वहां पायलट की ट्रेनिंग ली. 1970 में उन्होंने एयर इंडिया में काम किया. विमान उड़ाने के अपने शौक के बारे में बात करते हुए राजीव गांधी ने एक बार सिम्मी ग्रेवाल के साथ इंटरव्यू में कहा था कि विमानों को लेकर उनकी उत्सुकता उस वक्त शुरू हुई थी, जब उनके नाना पंडित नेहरू उन्हें पहली बार ग्लाइडिंग क्लब लेकर गए थे. राजीव ने कहा था, ‘उस वक्त मैंने काफी एंज्वॉय किया था. अभी भी करता हूं. ये एक अलग तरह की आजादी देता है. ये आपको सारी चीजों से दूर ले जाता है.’

बहुत कम लोगों को पता है कि राजीव गांधी को फोटोग्राफी का भी शौक था. फोटोग्राफी के बारे में वो गहरी समझ रखते थे. कई मौकों पर उन्हें कुछ पब्लिशर्स ने फोटोग्राफी को लेकर किताब लिखने को कहा लेकिन अपने जीवनकाल में राजीव गांधी ऐसा कुछ नहीं कर पाए.

उनके निधन के बाद सोनिया गांधी ने उनके खीचें फोटोग्राफ्स को लेकर एक किताब रिलीज करवाई. किताब का नाम है- Rajiv’s World- Photographs by Rajiv Gandhi. 1995 में आई इस किताब में 4 दशकों में खींचे गए राजीव गांधी के फोटोग्राफ्स शामिल हैं. इसमें जंगल, पहाड़, झरने जैसे कुदरती खूबसूरती वाले फोटोग्राफ्स के साथ राजीव के पालतू जानवरों से लेकर उनके दोस्तों और रिश्तेदारों के फोटोग्राफ्स तक शामिल हैं.

राजीव गांधी ऐसे एकलौते प्रधानमंत्री रहे हैं, जो अपनी कार खुद चलाया करते थे. प्रधानमंत्री रहने के दौरान भी वो कई मौकों पर खुद ही कार ड्राइव किया करते थे. चुनाव यात्राओं के दौरान भी वो खुद ही ड्राइव करके सभा स्थल तक पहुंच जाया करते थे.

राजीव गांधी पर किताब लिखने वाले पत्रकार सुमन चट्टोपाध्याय ने अपनी किताब में लिखा है कि एक बार बंगाल के एक चुनाव में उन्हें राजीव गांधी के साथ कार में यात्रा का अवसर मिला. राजीव खुद ही ड्राइव कर रहे थे. वो ग्रां प्री ड्राइवर की तरह स्टेट हाइवे पर कार को भगाए जा रहे थे. कई बार उनकी सुरक्षा काफिले में चल रही गाड़ियां उनसे काफी पीछे छूट जातीं. राजीव गांधी की स्पीड को मैच करना आसान नहीं था.

जब स्वामीजी ने की राजीव गांधी के राजनीति में आने की भविष्यवाणी

ये सभी जानते हैं कि राजीव गांधी राजनीति में आने के इच्छुक नहीं थे. उनकी राजनीति में आने को लेकर एक दिलचस्प वाकया बताया जाता है. उस वक्त संजय गांधी की प्लेन क्रैश में मौत हुई थी. इंदिरा गांधी और राजीव गांधी से लोग मिलने आ रहे थे. इसी मौके पर शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंदजी भी शोक संतप्त परिवार से मिलने गए.

इंदिरा गांधी से मुलाकात के दौरान उन्होंने कहा कि अब राजीव को ज्यादा लंबे वक्त तक प्लेन नहीं उड़ाना चाहिए. इस पर इंदिरा गांधी ने कहा कि राजीव अगर प्लेन नहीं उड़ाएगा तो करेगा क्या? कहा जाता है कि स्वामी जी बोले- ‘अगर कोई इंसान खुद को भगवान को सौंप देता है तो ईश्वर ही उसकी आगे की देखभाल करते हैं. मेरा विश्वास है कि राजीव को खुद को देशसेवा में समर्पित कर देना चाहिए.’

इसके बाद कांग्रेस के नेता और सांसद राजीव गांधी से राजनीति में आने का आग्रह करने लगे. इंदिरा गांधी ने राजनीति में आने के फैसले को अपने बेटे पर छोड़ रखा था. राजीव गांधी कहा करते थे कि अगर मेरे राजनीति में आने से मेरी मां को मदद मिलती है तो मैं जरूर राजनीति में आ जाऊंगा.