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CG Health News जब पद रिश्तों से मिलने लगें: सीएमएचओ ने पति को सौंपे जिले के अहम प्रभार, अब संचालन को लेकर भी उठे सवाल

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CG Health News | Janjgir-Champa :कभी-कभी खबर शोर नहीं करती, लेकिन व्यवस्था को आईना दिखा जरूर देती है।

जांजगीर-चांपा जिले के स्वास्थ्य विभाग में लिया गया एक प्रशासनिक फैसला अब कई परतों में सवाल बनकर सामने आ रहा है।

बीते 05 जनवरी 2026 को बीडीएम अस्पताल चांपा से स्थानांतरित कर प्रभारी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी बनाया गया (सीएमएचओ) का पदभार संभालने वाली डॉ. अनीता श्रीवास्तव ने महज 15 दिनों के भीतर अपने पति डॉ. मनीष श्रीवास्तव को जिले के दो अहम और संवेदनशील दायित्व सौंप दिए। जारी आदेश के अनुसार उन्हें प्रभारी जिला मलेरिया अधिकारी के साथ-साथ स्टोर/भंडार प्रभारी बनाया गया है और जिला कार्यालय में अटैच किया गया है।

15 दिन, दो बड़े प्रभार और कई सवाल

स्वास्थ्य विभाग में यह फैसला केवल एक प्रशासनिक आदेश बनकर नहीं रहा। मलेरिया नियंत्रण और दवा भंडारण जैसे प्रभार सीधे जनस्वास्थ्य, बजट और संसाधनों से जुड़े होते हैं। ऐसे में पति को यह जिम्मेदारी सौंपे जाने के बाद विभागीय हलकों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।

पहले भी उठ चुके हैं सवाल

डॉ. मनीष श्रीवास्तव जब बीडीएम अस्पताल चांपा में पदस्थ थे, तब नागरिकों द्वारा कलेक्टर को लिखित शिकायत दी गई थी और शिकायत में आरोप लगाया गया था कि वे ओपीडी में नियमित रूप से उपस्थित नहीं रहते थे, जिसके कारण मरीजों को ईलाज के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता था और कई बार उन्हें भटकना भी पड़ता था।

स्थानीय नागरिकों का कहना था कि डॉक्टर की लगातार गैर मौजूदगी से सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की विश्वसनीयता प्रभावित हो रही थी।

शिकायत के बाद क्या हुआ?

शिकायतकर्ताओं ने मांग की थी कि डॉ. मनीष श्रीवास्तव को चांपा से हटाया जाए, ताकि अस्पताल का संचालन नियमों और प्रक्रियाओं के अनुरूप हो सके।
हालांकि, इन शिकायतों पर किसी जांच या कार्रवाई को लेकर कोई भी जानकारी सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई।

न कोई जांच रिपोर्ट,
न कोई निष्कर्ष,
न कोई जवाब।

सूत्रों का दावा: संचालन किसके हाथ?

सूत्रों की मानें तो जिले का स्वास्थ्य विभाग इन दिनों उसी ढर्रे पर संचालित होता दिख रहा है, जैसा कई ग्राम पंचायतों में देखने को मिलता है—जहां औपचारिक रूप से पद किसी के पास होता है, लेकिन वास्तविक संचालन किसी और के हाथ में रहता है।

विभागीय हलकों में यह चर्चा आम है कि भले ही सीएमएचओ का पदभार डॉ. अनीता श्रीवास्तव संभाल रही हों, लेकिन कई अहम निर्णयों और प्रशासनिक गतिविधियों में डॉ. मनीष श्रीवास्तव की भूमिका प्रभावी मानी जा रही है।
सूत्र यह भी बताते हैं कि जिस तरह पंचायतों में कई बार “सरपंच पति” अनौपचारिक रूप से व्यवस्था को संचालित करते हैं, उसी तरह जिले के स्वास्थ्य विभाग के संचालन को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।

महिला सशक्तिकरण के दावों पर सवाल

एक ओर सरकार महिला सशक्तिकरण, नेतृत्व और निर्णय क्षमता को बढ़ावा देने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर जब किसी महिला अधिकारी के कार्यकाल में यह धारणा बनने लगे कि विभागीय निर्णय किसी अन्य के प्रभाव में लिए जा रहे हैं, तो यह स्थिति प्रशासनिक निष्पक्षता के साथ-साथ महिला सशक्तिकरण की मूल भावना पर भी सवाल खड़े करती है।

पूर्व शिकायत के बावजूद डॉ. मनीष श्रीवास्तव को मिली नोडल नियुक्ति, पारदर्शिता पर उठे सवाल

डॉ. मनीष श्रीवास्तव को कलेक्टर के अनुमोदन से मलेरिया नियंत्रण कार्यक्रम एवं जिला भंडार शाखा का नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। लेकिन उनके खिलाफ पहले दर्ज शिकायत ने इस नियुक्ति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या कलेक्टर को सभी तथ्य समय रहते बताए गए, या कुछ जानबूझकर छिपाए गए?
क्या यह नियुक्ति उनकी संपूर्ण सहमति से हुई, या प्रशासनिक प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव रहा? विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में जवाबदेही पर बड़ा सवाल उठता है,
क्योंकि जब व्यवस्था जवाब नहीं देती,
तो सवाल और ज़रूरी हो जाते हैं।

इस पूरे मामले को लेकर अब तक किसी भी स्तर पर कोई प्रशासनिक प्रक्रिया सामने नहीं आई है।