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छत्तीसगढ़ : छत्तीसगढ़ में एडमिशन का हाल, BE की 70 फीसदी सीटें खाली, इन कॉलेजों में नहीं खुला खाता

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छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के इंजीनियरिंग कॉलेजों (Engineering Colleges) में एडमिशन का बुरा दौर जारी है. सत्र 2019-20 में प्रदेश के इंजीनियरिंग कॉलेजों में बैचलर ऑफ इंजीनियरिंग (BE) कोर्स में दाखिला पिछले पांच वर्षों में सबसे निचले स्तर पर है. इस बार प्रदेश के तीन निजी इंजीनियरिंग कॉलेजों में दाखिले का खाता तक नहीं खुला है. यानी कि इन कॉलेजों में एक भी एडमिशन (Admission) नहीं हुआ है. इसके अलावा 3 कॉलेजों में एडमिशन इकाई की संख्या में ही हुआ है. इसके अलावा 7 निजी कॉलेजों में 10 से 20 की संख्या में ही दाखिला हुआ है. बीई कोर्स में कुल करीब 70 फीसदी सीटें खाली हैं. इन आंकड़ों में प्रदेश में इंजीनियरिंग कॉलेज के संचालकों की चिंता बढ़ा दी है.

छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) तकनीकी शिक्षा इंजीनियरिंग की कुल 15 हजार 605 सीटों के लिए काउंसलिंग के माध्यम से एडमिशन की प्रक्रिया की गई. करीब डेढ़ महीने तक चली एडमिशन प्रक्रिया के बाद बीई कोर्स में सिर्फ 4 हजार 944 सीटों पर ही एडमिशन हुआ है. यानी कि इस बार प्रदेश के शासकीय और निजी इंजीनियरिंग शिक्षण संस्थानों में 10 हजार 661 सीटें खाली रह गई हैं.

इस सत्र में सबसे बुरा हाल सूबे के इंजीनियरिंग कॉलेजों में पिछले पांच सालों से एडमिशन का एक तरह से आकाल है. सत्र 2016-17 से सत्र 2018-19 तक प्रदेश में बीई कोर्स की 35 से 40 फीसदी सीटों पर ही एडमिशन हुए. लेकिन, इस सत्र में दाखिले के हालात सबसे खराब हैं. सत्र 2019-20 में प्रदेश में सिर्फ 31.67 फीसदी सीटों पर ही एडमिशन हुए हैं. पिछले पांच साल में सबसे ज्यादा सत्र 2015-16 में 9 हजार 695 सीटों पर एडमिशन हुए थे.

इन कॉलेजों में नहीं खुले खाते तकनीकी शिक्षा संचालनालय, रायपुर से मिले आंकड़ों के अनुसार छत्तीसगढ़ में संचालित सीआईटी राजनांदगांव, जीआईएमटी दुर्ग, डीमेट रायपुर में बीई कोर्स में इस साल एक भी एडमिशन नहीं हुआ है. यानी कि इस साल यहां बीई कोर्स में खाता भी नहीं खुला है. इसके अलावा बीसीईटी दुर्ग में सिर्फ 5 और आरआईटी रायपुर सेकेंड शिफ्ट में 2, पाइटेक रायपुर में बीई की सिर्फ 8 सीटों पर ही एडमिशन हुए हैं. छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकांनद टेक्नीकल यूनिवर्सिटी (CSVTU) भिलाई से संबंधित 39 इंजीनियरिंग कॉलेज प्रदेश में संचालित हैं.

शासकीय कॉलेजों को प्राथमिकता
प्रदेश में बीई कोर्स का संचालन करने वाले तीन शासकीय इंजीनियरिंग कॉलेजों में दाखिले की स्थिति निजी कॉलेजों में से कहीं ज्यादा बेहतर है. न्यू जीईसी रायपुर और जीईसी बिलासपुर में 100 प्रतिशत सीटों पर एडमिशन हुए हैं, जबकि एक अन्य जीईसी जगदलपुर में बीई कोर्स में 97.91 फीसदी सीटों पर एडमिशन हुआ है. निजी शिक्षण संस्थानों में बीआईटी दुर्ग में सबसे अधिक बीई की 99.87 फीसदी सीटों पर एडमिशन हुए हैं.

नियम बदलवाना चाहते थे कॉलेज 
प्रदेश के निजी कॉलेज संचालक इंजीनियरिंग के बीई कोर्स में दाखिले के लिए प्री इंजीनियरिंग टेस्ट (PET) की बाध्यता तीन चरणों की काउंसलिंग प्रक्रिया के बाद समाप्त करने की मांग कर रहे थे. कॉलेज संचालकों की मांग थी कि दाखिले के लिए डायरेक्टोरेट ऑफ टेक्निकल एजुकेशन (डीटीई) द्वारा काउंसलिंग की प्रक्रिया पूरी कर लेने के बाद जो सीटें बचती हैं, उन सीटों पर कक्षा 12वीं पास विद्यार्थियों को सीधे दाखिले की अनुमति दे दी जाए. हालांकि, इसके लिए 12वीं पास विद्यार्थियों की जो न्यूनतम योग्यता है, उसमें कोई बदलाव नहीं करने का प्रस्ताव भी दिया गया था. लेकिन, इस सत्र में सरकार ने उनकी मांग नहीं मानी.

क्यों खराब हो रहे हालात?
दुर्ग यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति और शिक्षाविद डॉ. नरेन्द्र प्रताप दीक्षित ने न्यूज 18 से चर्चा में कहा प्रदेश में इंजीनियरिंग में दाखिले के हालात में सुधार के लिए क्वालिटी एजुकेशन पर फोकस करने की जरूरत है. यदि योग्य विद्यार्थी पढ़ाई करेंगे तो वे उस क्षेत्र में सफल भी होंगे. साथ ही हालात सुधारने के लिए नौकरियों के मौके बढ़ाने की भी जरूरत है. वर्तमान स्थिति में देखा जा रहा है कि स्टूडेंट की क्वालिटी की जगह क्वांटिटी पर अधिक फोकस किया जा रहा है, जिसका परिणाम हम सभी के सामने हैं.

छत्तीसगढ़ में टॉप इंजीनियरिंग कॉलेजों में शुमार भिलाई इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (बीआईटी), दुर्ग के प्राचार्य डॉ. अरुण अरोरा का मानना है कि जब तक कॉलेजों में पढ़ाई के उपर्युक्त संसाधन और अच्छी फैकल्टी नहीं होगी, तब तक बेहतर की उम्मीद नहीं की जा सकती है.