Home देश आखिर भारत में आर्थिक मंदी आई क्यों? जानिए अंदरूनी और बाहरी वजहें

आखिर भारत में आर्थिक मंदी आई क्यों? जानिए अंदरूनी और बाहरी वजहें

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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बाजार में आई सुस्ती को दूर करने और अर्थव्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए अलग-अलग सेक्टर्स, उद्योग और आम आदमी को मंदी से राहत देने के लिए कई ऐलान किए. निर्मला सीतारमण भले ही दूसरे देशों से तुलना करके भारत की आर्थिक मंदी से ज्यादा न घबराने की बात कर रही हों लेकिन ग्राउंड पर आर्थिक मंदी के हालात दूसरी तस्वीर पेश कर रहे हैं. मंदी के बादल तेजी से काले और घने होते जा रहे हैं और इसका असर ऑटो, रियल एस्टेट, टेलिकॉम और बैंकिंग से लेकर स्टील और टेक्सटाइल जैसे सेक्टरों पर दिखना शुरू हो गया है.

आर्थिक मंदी की मुख्य तौर पर ये चार वजह हैं…

– पहली वजह तो अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें हैं, जिसका असर महंगाई दर पर पड़ा है.

– दूसरी वजह डॉलर के मुकाबले रुपये की घटती हुई कीमत है, एक अमेरिकी डॉलर की कीमत 72 रुपये के आंकड़े को छू रही है.

– आयात के मुकाबले निर्यात में गिरावट से देश का राजकोषीय घाटा बढ़ा और विदेशी मुद्रा भंडार में कमी आई है.

– इसके अलावा अमेरिका और चीन के बीच जारी ट्रेड वॉर की वजह से भी दुनिया में आर्थिक मंदी का खतरा तेजी से बढ़ रहा है, जिसका असर भारत पर भी पड़ा है.

वैसे ये तो बाहरी वजह हैं, जो देश में आर्थिक मंदी को बढ़ावा दे रही हैं. लेकिन इसकी अंदरूनी वजह ज्यादा बड़ी हैं. जैसे कि अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण औद्योगिक क्षेत्रों में गिरावट, डिमांड और सप्लाई के बीच लगातार कम होता अंतर और निवेश में मामूली कमी जैसी चीजें मंदी की तरफ इशारा कर रही हैं. जिसका असर अब दिखाई देने लगा है.

जानिए ऐसी बातें जो आर्थिक मंदी का अलार्म बजा रही हैं…..– देश का ऑटो सेक्टर रिवर्स गियर में चला गया है. ऑटो इंडस्ट्री में लगातार नौ महीने से बिक्री में गिरावट दर्ज हो रही है. जुलाई में कार और मोटरसाइकिलों की बिक्री में 31 फीसदी की गिरावट आई है. जिसकी वजह से ऑटो सेक्टर से जुड़े साढ़े तीन लाख से ज्यादा कर्मचारियों की नौकरी चली गई और करीब 10 लाख नौकरियां खतरे में हैं.

– कृषि क्षेत्र के बाद सबसे ज्यादा 10 करोड़ लोगों को रोजगार देने वाले टेक्सटाइल सेक्टर की भी हालत खराब है. नॉर्दर्न इंडिया टेक्सटाइल मिल्स एसोसिएशन ने तो बाकायदा अखबारों में विज्ञापन देकर खुलासा किया है कि देश के कपड़ा उद्योग में 34.6 फीसदी की गिरावट आई है. जिसकी वजह से 25 से 30 लाख नौकरियां जाने की आशंका है.

– इसी तरह के हालात रियल एस्टेट सेक्टर में हैं, जहां मार्च 2019 तक भारत के 30 बड़े शहरों में 12 लाख 80 हज़ार मकान बनकर तैयार हैं लेकिन उनके खरीदार नहीं मिल रहे. यानी बिल्डर जिस गति से मकान बना रहे हैं लोग उस गति से खरीद नहीं रहे.

-RBI द्वारा हाल में ही जारी आंकड़ों के मुताबिक बैंकों द्वारा उद्योगों को दिए जाने वाले कर्ज में गिरावट आई है. पेट्रोलियम, खनन, टेक्सटाइल, फर्टीलाइजर और टेलिकॉम जैसे सेक्टर्स ने कर्ज लेना कम कर दिया है.

यह मंदी की आहट का ही असर है कि अप्रैल से जून 2019 की तिमाही में सोना-चांदी के आयात में 5.3 फीसदी की कमी आई है. जबकि इसी दौरान पिछले साल इसमें 6.3 फीसदी की बढ़त देखी गई थी. निवेश और औद्योगिक उत्पादन के घटने से भारतीय शेयर बाजार में भी मंदी का असर दिख रहा है. सेंसेक्स 40 हजार का आंकड़ा छूकर अब फिर 37 हजार पर आकर अटक गया है.

केंद्रीय सांख्यिकी संगठन द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार 2018-19 में देश की जीडीपी विकास दर 6.8 प्रतिशत रही जो बीते 5 सालों में सबसे कम है. जिसके बाद आरबीआई ने मंदी की आहट को भांपते हुए साल 2019-20 के लिए विकास दर का अनुमान घटाकर 6.9 फीसदी कर दिया है.

यह वो आंकड़े हैं जो आर्थिक मंदी से देश को खबरदार करते हैं. जिसके बारे में नीति आयोग के वाइस चेयरमैन राजीव कुमार ने भी देश को आगाह किया और आर्थिक मंदी को लेकर सरकारी नीतियों और फैसलों को भी कटघरे में खड़ा किया है.