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नर्सों की पदोन्नति मामले में बिलासपुर हाई कोर्ट में हुई सुनवाई, दिए ये आदेश

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पैंतीस से चालीस वर्षों से निरंतर कार्यरत होने के बावजूद वरीयता व पदोन्नति न दिए जाने को लेकर छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के बिलासपुर सिम्स (Sims) की स्टाफ नर्सों की याचिका की सुनवाई हाई कोर्ट में हुई. सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट (High Court) जस्टिस पी सैम कोशी के सिंगल बेंच ने गुरुशरण दिल्लीवार विरुद्ध छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में जारी आदेश के प्रकाश में निर्णय लेने के लिए शासन को आदेशित किया है. दरअसल सैकड़ों की संख्या में नर्सें जो कि सरदार वल्लभ भाई पटेल शासकीय अस्पताल में कार्यरत थीं उन्हें सिम्स बनने के बाद मेडिकल कॉलेज के अंतर्गत डेपुटेशन पर कार्य करने वर्ष 2001 में कहा गया था.

वर्ष 2008 में उनके सिम्स में संविलियन की प्रक्रिया प्रारंभ की गई जो कि वर्ष 2013 में जारी आदेश द्वारा पूरी हुई. इस दौरान सिम्स द्वारा नर्सो की नई भर्तियां भी की गई. उसके बाद शासन द्वारा जो वरीयता सूची जारी कर नई भर्ती की गई. जिसमें नए नर्सो को ऊपर स्थान दिया गया जबकि पूर्व से कार्यरत नर्सो को वरिष्ठता क्रम में नीचे कर दिया गया. शासन के इस आदेश को चुनौती देते हुए पूर्व से कार्यरत 8-10 नर्सों द्वारा हाई कोर्ट में चुनौती दी गयी थी.

याचिका में कहा गया कि इसी प्रकार के प्रकरण गुरुशरण दिल्लीवार विरुद्ध छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में पूर्व से कार्यरत कर्मचारियों को न केवल उनकी पूर्व सेवा के आधार पर वरीयता व अन्य सम्बंधित लाभ दिया गया था एवम छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (सेवा की सामान्य शर्तें) नियम के नियम 12 में संशोधन भी किया गया था. याचिकाकर्ता के तर्कों को सुनने के बाद हाई कोर्ट ने शासन को आदेशित किया है कि याचिकाकर्ता नर्सों के द्वारा प्रस्तुत अभ्यावेदन का निराकरण गुरुशरण दिल्लीवार प्रकरण में जारी आदेश के प्रकाश में किया जाये.