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प्लास्टिक मुक्त हुए मप्र के रेलवे स्टेशन, पत्तों के दोने में परोसा जा रहा खाना

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मादी के प्लास्टिक के खिलाफ अभियान का असर राज्य के रेलवे स्टेशनों पर नजर आने लगा है। पश्चिम रेलवे के रतलाम मंडल में प्लास्टिक को ना कहते हुए पेड़ के पत्तों से बने दोने में खाना परोसा जाने लगा है। मंडल के रेलवे स्टेशनों पर यह पहल रविवार से शुरू हो चुकी है। यहां समोसा, बड़ा, भजिया, पोहा सहित तमाम तरह के खाद्य व्यंजन पत्तों से बने दोने में मिलने लगे हैं। लोगों का कहना है कि अभी तक खाने के ये व्यंजन प्लास्टिक से लेकर कागज और सिंथेटिक बाउल आदि में मिला करते थे।

कहा जा रहा है कि पश्चिम रेलवे जोन के साथ ही भारतीय रेलवे में यह पहला ऐसा प्रयोग है, जब खाद्य सामग्री पत्ते से बने दोने में देना अनिवार्य कर दिया गया है। इस नियम को मंडल के रतलाम, इंदौर, उज्जैन, देवास, चित्तौड़गढ़, दाहोद सहित अन्य कई स्टेशनों पर लागू किया गया है।

मंडल के डीआरएम आर. एन. सुनकर ने ट्वीट कर बताया, “मंडल के स्टेशनों पर खाद्य सामग्री देने में अब केवल पत्तों के दोने का ही उपयोग किया जाएगा। इस व्यवसाय से जुड़े लोगों को रोजगार भी मिलेगा। साथ ही कागज व पॉलीथिन का उपयोग नहीं होने से पर्यावरण सुरक्षा के साथ यात्रियों के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर नहीं पड़ेगा।”

रेलवे सूत्रों का कहना है कि पिछले दिनों स्टेशनों की सफाई के बाद एकत्रित हुए तीन हजार किलो से ज्यादा के कचरे में 50 किलो प्लास्टिक निकला था। इसके बाद ही खाद्य सामग्री परोसने में प्लास्टिक पर रोक लगाए जाने पर विचार किया गया।

डीआरएम द्वारा मंडल के सभी रेलवे स्टेशनों पर कागज और प्लास्टिक के बर्तनों में खाद्य सामग्री नहीं परोसने के निर्देश दिए गए हैं। नियम को सुनिश्चित तौर पर लागू कराने के लिए खाद्य सामग्री बेचने वाले सभी स्टॉलों पर नजर रखी जा रही है। इसके साथ ही इन स्टालों की तस्वीरें भी ली जा रही हैं, ताकि यह पता चल सके कि खाद्य सामग्री देने के लिए किस चीज का इस्तेमाल हो रहा है।