Home छत्तीसगढ़ छत्तीसगढ़ – मुख्यमंत्री ने बंदियों को करूणा और सदाचार की दी सीख...

छत्तीसगढ़ – मुख्यमंत्री ने बंदियों को करूणा और सदाचार की दी सीख : प्रावधानित सजा से अधिक समय काट चुके बंदियों की रिहाई की प्रक्रिया शुरू करने के दिए निर्देश…

????????????????????????????????????
All PDF Reader 20260626 00.30.11_page-0004
All PDF Reader 20260626 00.30.11_page-0001
All PDF Reader 20260626 00.30.11_page-0002
All PDF Reader 20260626 00.30.11_page-0003
IMG-20240704-WA0019
IMG-20220701-WA0004
WhatsApp-Image-2022-08-01-at-12.15.40-PM
1658178730682
WhatsApp-Image-2024-08-18-at-1.51.50-PM

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के अवसर पर केन्द्रीय जेल रायपुर में आयोजित ‘बापू की करूणा का संचार-जेलों में सदाचार‘ कार्यक्रम का शुभारंभ आज मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने किया। श्री बघेल ने कहा कि गांधी जी ने सत्य और अहिंसा के रास्ते पर चलकर देश को आजादी दिलाई। गांधी जी ने अछूत उद्धार, नारी शिक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों में अनेक उल्लेखनीय कार्य किए हैं। गांधी जी के मन में विरोधियों के प्रति भी आदर, सम्मान और प्रेम की भावना थी। गांधी जी कहते थे अपराध से घृणा करो-अपराधी से नहीं। श्री बघेल ने बंदियों को गांधी जी के व्यक्तित्व व कृतित्व के संबंध में विस्तार से जानकारी देते हुए कहा कि बापू अपने समय का सदुपयोग करते थे व साफ-सफाई के साथ अपना काम खुद करते थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि आत्मनिर्भर रहने वाले को कोई झुका नहीं सकता। गांधी जी ने पूरे देश का दौराकर लोगों को देशभक्ति व सेवा का संदेश दिया।
मुख्यमंत्री ने बंदियों को करूणा, सदाचार, प्रेम, सद्भावना एवं भाईचारे की सीख दी और कहा कि जेल से रिहा होने के बाद वे गांधी जी के आदर्शाें के अनुरूप समाज की मुख्यधारा से जुड़कर आदर्श समाज के निर्माण में सहभागी बनें। मुख्यमंत्री ने ऐसे बंदियों जो विभिन्न धाराओं मंे प्रावधानित सजा से अधिक समय काट चुके है, उनकी रिहाई की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश अपर मुख्य सचिव जेल श्री सी. के. खेतान को दिए। इस अवसर पर गांधी जी के जीवन पर आधारित चार पुस्तकों का विमोचन भी किया गया। बंदियों ने इस अवसर पर बापू का प्रिय भजन वैष्णव जन तो तेनेे कहिए की आकर्षक प्रस्तुति दी। जिसे सुनकर उपस्थित अतिथि मंत्रमुग्ध हो गए।   


मुख्यमंत्री ने बंदियों से चर्चा करते हुए कहा कि यदि मन में सभी के लिए करूणा, आदर का भाव, सम्मान और समानता का भाव, सेवा और त्याग का भाव होगा तो हिंसा कम होगी। उन्होंने कहा कि आज राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के त्याग और सेवा के मार्ग को लोगों ने छोड़ दिया है। सम्पन्नता के साथ अध्यात्मिक चिंतन और मनन भी होना चाहिए। श्री बघेल ने कहा कि सद्भावना से अपने विरोधियों का भी दिल जीता जा सकता है। उन्होंने दक्षिण अफ्रीका जेल के जनरल स्मटस के साथ गांधी जी सद्भावपूर्ण व्यवहार का उल्लेख करते हुए कहा कि जब गांधी जी दक्षिण अफ्रीका से भारत आ रहे थे तो उन्होंने अपने विरोधी जनरल स्मटस को अपने हाथों से जेल में बनाई चप्पल भेंट की थी। गांधी जी के इस सद्भावना से जनरल स्मटस का हृदय परिवर्तन हुआ। उन्होंने लिखा यह चप्पल इतने महान व्यक्ति ने अपने हाथों से बनाई है कि मैं अपने पैर चप्पल में  ड़ालने के योग्य नहीं हूं। उन्होंने कैदियों को एक था मोहन कहानी पढ़कर सुनाई।   


केन्द्रीय जेल मंे आयोजित कार्यक्रम में गृह एवं जेल मं़त्री श्री ताम्रध्वज साहू ने बंदियों को गांधी जी द्वारा दक्षिण अफ्रीका के जेल में बिताए गए दिनों की कहानी सुनाई और गांधी जी के प्रेरक प्रसंग को बंदियों द्वारा अपने आचरण में धारण करने की सीख दी। उन्होंने कहा कि जेल भी एक स्कूल है। यहां की शिक्षा को जीवन में अपनाए और जेल से निकलने के बाद समाज में रचनात्मक भूमिका निभाएं। कार्यक्रम को गांधी सेवा संस्थान नई दिल्ली से आए श्री सोपान जोशी ने भी संबोधित किया। श्री जोशी ने कहा कि महात्मा गांधी जी को आलोचनाओं से फर्क नहीं पड़ता था। जिन लोगों ने गांधी जी का विरोध किया आगे चलकर वही लोग उनके अनुयायी बनें।
इस अवसर पर कृषि मंत्री श्री रवीन्द्र चौबे, वन मंत्री श्री मोहम्मद अकबर, रायपुर सांसद श्री सुनील सोनी, राज्यसभा सांसद श्रीमती छाया वर्मा, विधायक सर्वश्री सत्यनारायण शर्मा, श्री कुलदीप सिंह जुनेजा, श्री विकास उपाध्याय और रायपुर नगर निगम के महापौर श्री प्रमोद दुबे, अपर मुख्य सचिव श्री सी. के. खेतान, सचिव गृह एवं जेल श्री अरूण देव गौतम, जेल महानिदेशक श्री विनय सिंह सहित वरिष्ठ नागरिक, जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।