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चीन: कम्युनिस्ट शासन की 70वीं सालगिरह पर हुई परेड, दिखाए अत्याधुनिक हथियार, देखें तस्वीरें

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चीन ने मंगलवार को साम्यवादी शासन की 70वीं वर्षगांठ मनाई। इस मौके पर बढ़ती राजनीतिक और आर्थिक चुनौतियों के बीच भव्य परेड निकाली गई जिसमें उसने परमाणु और हाइपरसोनिक मिसाइलों समेत अपने सबसे आधुनिक हथियारों का प्रदर्शन किया।

वर्षगांठ के आधिकारिक समारोह की शुरुआत सोमवार को हो गई थी जब चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना (सीपीसी) के संस्थापक माओ जेडोंग की संरक्षित रखी गई पार्थिव देह को श्रद्धांजलि दी। जिनपिंग और अन्य शीर्ष चीनी अधिकारी तियाननमेन चौक में स्थित माओ की समाधि पर गए और दिवंगत नेता की प्रतिमा के आगे तीन बार सिर झुकाया।

इस मौके पर चीनी सेना ने भव्य परेड निकाली, चीन में चारों ओर देशभक्ति के गीत गाए जा रहे हैं, देशभक्ति और सैन्यशक्ति का प्रदर्शन चीन के हर हिस्से में देखा जा सकता है। आमतौर पर देखा जाता है कि चीन अपने हथियारों को दुनिया की नजरों से छिपा कर रखता है। लेकिन आज कम्युनिस्ट शासन के वर्षगांठ पर चीन ने लगभग अपने सभी हथियारों की प्रदर्शित किया।

गौर करने वाली बात यह है कि जहां एक तरफ चीन में देशभक्ति का माहौल है, वहीं दूसरी तरफ हांगकांग में लोकतंत्र समर्थकों द्वारा विरोध प्रदर्शन जारी है।

चीन ने परेड में अपने हथियारों की प्रदर्शनी की, उसने दुनिया और अमेरिका को दिखाया कि उसके पास हथियारों का कितना बड़ा जखीरा है। मानों वह दुनिया को यह कहना चाह रहा हो कि कोई भी उससे उलझने की हिमाकत ना करे।

हम यह जरूर मान सकते हैं कि बीते 70 वर्षों में चीन एक गरीब देश से दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनकर उभरा है। उसने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी अहमियत और प्रभुत्व साबित करके दुनिया को चौंकाया भी है। लेकिन दुनिया के सभी मुल्कों का यही मानना है कि चीन के भीतर मानवाधिकार का उल्लंघन सबसे ज्यादा है।

तरक्की के साथ मानवाधिकार का उल्लंघन करने में चीन सबसे आगे है। मानवाधिकार उल्लंघन के मामलों के लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चीन की लगातार आलोचना भी होती रहती है। यहां लाखों लोग ऐसे भी हैं जो 70वीं सालगिरह की जश्न का हिस्सा नहीं हैं।

जश्न से दूरी बनाने वालों में वो लोग हैं जिन्हें अनुचित तरीके से जेल भेजा गया, इनमें वो उइगर मुस्लिम हैं जिन्हें कथित रूप से ‘ट्रेनिंग कैंपों’ में रखा गया है। साथ ही समाज का वह तबका भी है, जो चीन द्वारा प्रताड़ित है।

साथ ही वह लोग भी हैं जिनके परिजनों और दोस्तों ने चीन के कम्युनिस्ट शासन का विरोध करते हुए अपनी जान गंवाई थी।

कम्युनिस्ट शासन की 70वीं सालगिरह का जश्न उसी तियाननमेन चौक पर मनाया जा रहा है जहां साल 1989 में कम्युनिस्ट शासन का विरोध करते हुए बड़ी संख्या में लोकतंत्र समर्थक प्रदर्शनकारी मारे गए थे। चीन हमेशा से ही अपने देश में सरकार के खिलाफ उठने वाली आवाजों को दबाने के लिए जाना जाता है। चीन ने विकास की आंधी में अंधा होकर मानवाधिकार का जमकर हनन किया है।

फिलहाल अभी चीन में उत्सव जैसा वातावरण है। सेना की परेड के अलावा आम चीनियों की परेड भी जारी है।

चीनी अधिकारियों के बीच चिंता है कि हांगकांग में लोकतंत्र समर्थकों का विरोध प्रदर्शन बीजिंग में सैन्य परेड को फीका ना कर दे, साथ ही उन्हें इस बात की भी चिंता है कि यह प्रदर्शन अंतरराष्ट्रीय सुर्खियां हासिल कर सकता है।

चीनी सरकार द्वारा आयोजित परेड में राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा कि दुनिया की कोई भी ताकत चीन की छवि को नहीं हिला सकती, और ना ही कोई ताकत चीनी लोगों और चीन को आगे बढ़ने से रोक सकती है।

उन्होंने कहा कि हजारों वर्षों तक चीन को अपनी गिरफ्त में रखने वाली समस्या गरीबी, अब खत्म होने की कगार पर है। उन्होंने कहा, ‘चीन ने जबरदस्त बदलाव किया। वह डटा हुआ है, समृद्ध हो रहा है और मजबूत बन रहा है। वह कायाकल्प के उत्कृष्ट आयामों के साथ कदम से कदम मिला रहा है।’

जिनपिंग ने कहा कि सभी जोखिमों तथा चुनौतियों से निपटते हुए आगे बढ़ने तथा नई सफलताएं हासिल करने के लिए एकता सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि हमें शांति, विकास और सहयोग को ध्यान में रखते हुए शांतिपूर्ण विकास की राह पर बढ़ना होगा।

माओ के शासन के दौरान चीन में मानवजनित अकाल आया था जो खेती के स्थापित सिस्टम में अचानक लाए बदलाव की देन था। इसने लाखों जिंदगियां छीन लीं। माओ की सांस्कृतिक क्रांति के कारण हुई हिंसा और यातनाओं की वजह से हजारों लोगों की जान गई। ये वो तथ्य हैं जो चीन में स्कूलों की किताबों में किसी को नहीं मिलेंगे।

देश को बहुत नुकसान पहुंचाने वाली ‘एक बच्चे की नीति’ के कारण माओ के निधन के 40 साल बाद भी लाखों लोगों को क्रूरता का सामना करना पड़ा। आज भी, नई दो बच्चों वाली नीति के माध्यम से कम्युनिस्ट पार्टी सबसे बुनियादी बच्चे पैदा करने के अधिकार का उल्लंघन करती है।

यह सूची बेहद लंबी है और हर श्रेणी में कम से कम हजारों लोग ऐसे हैं जिन्हें एक पार्टी शासन के कारण या तो नुकसान पहुंचा या फिर वे तबाह हो गए।

गौर करने वाली बात यह है कि इस परेड में वही शामिल हो सकता है जिसे न्योता मिला हो। यह बात मानो साबित कर रही हो कि इस अधिकारवादी देश का अंकुशों भरा इतिहास अब भी वर्तमान को प्रभावित कर रहा है।

तियाननमेन चौक एक और बड़ी घटना की सालगिरह का गवाह है। कम्युनिस्ट पार्टी की नींव हिला देने वाले लोकतंत्र समर्थक प्रदर्शनों को बेरहमी से कुचले जाने के भी 30 साल हो गए हैं। परेड के दौरान सैनिक उसी जगह पर कदमताल कर रहे हैं जहां पर कभी टैंकों के सामने छात्रों ने प्रदर्शन किया था और छात्रों पर गोलियां चलाई गई थीं।

वहीं, इस कार्यक्रम को लेकर चीन में कम्युनिस्ट सरकार ने 6.20 लाख टीवी मुफ्त में बांटे, ताकि लोग इस कार्यक्रम देख सकें। चीन में कोई इसे देखने से अछूता न रह जाए, इसलिए सरकार ने 32 इंच के 6 लाख 20 हजार टीवी सेट मुफ्त में बांटे।

ये सेट गरीब तबके के लोगों को दिए गए। इसका जिम्मा चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) की केंद्रीय समिति के प्रचार विभाग ने संभाला। इसके अलावा केंद्रीय आयोग, राष्ट्रीय रेडियो और टेलीविजन प्रशासन और चीनी मीडिया ने भी सहयोग किया।