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छत्तीसगढ़ : 50 साल पुराने धान की किस्म का संरक्षण, महिला समूह को मिला 10 लाख का पुरस्कार

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पाटन विकासखंड की महिलाओं को लगभग 50 वर्ष पुराने दुर्लभ धान की किस्मों का संरक्षण करने पर दिल्ली में जीनोम सेवियर पुरस्कार से सम्मानित किया गया। पूसा परिसर में आयोजित समारोह में आदर्श महिला आत्म समूह की महिलाओं को केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर एवं कृषि राज्य मंत्री कैलाश चौधरी ने दस लाख रुपये का पुरस्कार दिया। चार पीढ़ियों से धान की फसल ले रही इन महिलाओं को यह पता नहीं था कि वे जो धान वे उगा रही हैं वह दुर्लभ है।

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर ने गांवों में कृषि विज्ञान केंद्र खोला तब कृषि विज्ञान केंद्र दुर्ग को धान की इन किस्मों के बारे में पता चला। फिर इसी कृषि विज्ञान केंद्र के मार्गदर्शन में परंपरागत ग्रीन राइस, ब्लैक राइस और करहनी धान के संरक्षण और संवर्धन के लिये महिलाओं का समूह बनाया गया।

अब यह समूह धान की कई किस्में संरक्षित करने के साथ फसल ले रहा है। समूह द्वारा उगाई जा रही तीनों किस्मों में पोषक तत्व और औषधीय गुण हैं। करहनी धान मधुमेह रोगियों के लिए बहुत उपयोगी है। इमें आयरन, जिंक एवं विशेष पोषक गुण पाये जाते हैं।

सीएम के क्षेत्र की महिलाएं

समूह के पास बड़ी मात्रा में दुर्लभ धान का स्टाक तैयार हो गया है। सभी महिलाएं प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के क्षेत्र पाटन विकासखंड के ग्राम तर्रा (अचानकपुर) की हैं। इन्हें भारत सरकार के कृषि मंत्रालय के पौधा किस्म और कृषक अधिकार संरक्षण प्राधिकरण द्वारा प्रदत्त राष्ट्रीय पुरस्कार से जब नवाजा गया तब इंदिरा गांधी कृषि विवि के कुलपति डॉ. एसके पाटील भी उपस्थित थे।

दस राज्यों में भेज चुकी बीज

आदर्श महिला आत्म समूह की महिलाओं ने ग्रीन राइस, ब्लैक राइस और करहनी धान को न केवल संरक्षित किया, बल्कि इसके बीज को देश के दस राज्यों में पहुंचाकर इनके विस्तार में अहम भूमिका निभाई है। वर्ष 2014 में गठित इस समूह ने अब धान की विशिष्ट और दुर्लभ किस्मों की खेती कर उनके संरक्षण का बीड़ा उठाया। समूह की अध्यक्ष बेला साहू, सचिव दुलारी साहू हैं।

– प्रदेश के लिए यह बेहतर उपलब्धि है, खासकर समूह की महिलाएं इसके लिए बधाई की पात्र हैं।- कुलपति डॉ. एसके पाटील, इंदिरा गांधी कृषि विवि