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छत्तीसगढ़ : परेशानी में फंसे किसान, धान बेचने के बाद मेहनत की कमाई के लिए लगा रहे चक्कर…

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किसान ने साल भर अपने खेत पर मेहनत की और फसल उपजाई। इसके बाद अपनी फसल सरकार को बेचने के लिए उसे इंतजार करना पड़ा। इस बीच किसान नगदी की समस्या से जूझते रहे और अब फसल बिक जाने के बाद भी उनके हाथ खाली ही हैं। प्रदेश में ऐसे कई किसान हैं जो इस तरह की समस्या से रू-ब-रू हो रहे हैं। ऐसा लगता है किसानों की परेशानी कम होने का नाम ही नहीं ले रही है। धान बेचने के लिए खरीदी केंद्रों का चक्कर काटना पड़ रहा है। जैसे-तैसे भारी मशक्कत के बाद धान बेच रहे हैं तो भुगतान के लिए अब बैंक के चक्कर काटना पड़ रहा है।

आलम यह है कि 15 दिन पहले जिन किसानों ने समर्थन मूल्य पर धान बेच दिया है, अब तक उनके खातों में जिला सहकारी केंद्रीय बैंक द्वारा राशि जमा नहीं कराई गई है। बैंक जाकर पूछने पर अधिकारी केंद्र सरकार को कटघरे में खड़ा कर रहे हैं।

बैंक के अधिकारी किसानों से केंद्र सरकार द्वारा धान खरीदी के लिए राशि का आवंटन न किए जाने के कारण नहीं मिलने की बात कह रहे हैं। जिला सहकारी केंद्रीय बैंेक और मार्कफेड के अधिकारी के बीच भी तालमेल का अभाव नजर आ रहा है।

बैंक द्वारा प्रतिदिन खरीदी का जो आंकड़ा पेश किया जा रहा है उसमें मार्कफेड द्वारा भुगतान की गई राशि की भी जानकारी दी जा रही है। सवाल यह उठ रहा है कि जब किसानों के बैंक खाते में राशि जमा नहीं हुई । बैंक के अफसर कह रहे केंद्र से राशि नहीं मिली तब मार्कफेड ने कहां से इतनी बड़ी रकम जमा कर दी है।