Home समाचार ‘जिन्ना ने लिखा था अगर पाकिस्तानी अपना देश नहीं चला पाए तो...

‘जिन्ना ने लिखा था अगर पाकिस्तानी अपना देश नहीं चला पाए तो भारत उस पर अधिकार कर ले’, इमरान खान का ट्वीट और जवाब…

IMG-20251011-WA0045
IMG-20250614-WA0035
IMG-20250614-WA0034
IMG-20250614-WA0033
IMG-20250614-WA0032
IMG-20250614-WA0030
IMG-20250614-WA0031
IMG-20250614-WA0029
IMG-20250614-WA0028

IMG-20240704-WA0019
IMG-20220701-WA0004
WhatsApp-Image-2022-08-01-at-12.15.40-PM
1658178730682
WhatsApp-Image-2024-08-18-at-1.51.50-PM

भारत में केंद्र सरकार द्वारा नागरिकता संशोधन कानून लागू किए जाने के बाद देशभर में इसके विरोध को लेकर हंगामा मचा हुआ है। इतना ही नहीं बल्कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने भी अपनी राजनीति चमकाने की कोई कसर नहीं छोड़ी और भारत सरकार के खिलाफ ट्वीट कर दिया। लेकिन यूजर्स ने उनको ऐसा जवाब दिया कि देखने वाले भी सन्न रह गए।

इमरान खान अपने ट्वीट में लेखक खुशवंत सिंह की एक किताब के एक अंश की तस्वीर साझा की है जिसमें राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) को निशाना बनाया गया था। इमरान खान ने ट्वीट में लिखा, ”खुशवंत सिंह की भविष्यवाणी: उन्होंने देखा कि नस्लीय भेदभाव की विचारधारा के साथ भारत किस रास्ते से गया है।”

इमरान खान द्वारा साझा किए गए किताब के अंश अंग्रेजी में हैं जिनका हिंदी अनुवाद इस प्रकार है- ”हर फांसीवादी शासन को फलने-फूलने के लिए ऐसे समुदायों और समूहों की जरूरत होती है जिन्हें वह बुरा बता सके। यह एक या दो समूह के साथ शुरू होता है लेकिन यह कभी खत्म नहीं होता है। नफरत के लिए खड़ा किया गया आंदोलन केवल लगातर डर और कलह का माहौल बनाकर जिंदा रखा जा सकता है। हम से जो लोग आज सुरक्षित महसूस करते हैं क्योंकि हम मुस्लिम और ईसाई नहीं हैं जो बेवकूफ के स्वर्ग में रहते हैं।

संघ पहले से वामपंथी इतिहासकारों और पाश्चात्य शैली वाले युवाओं को निशाना बना रहा है। कल यह अपनी नफरत स्कर्ट पहनने वाली महिलाओं, मीट खाने वाले लोगों, शराब पीने वालों, विदेश फिल्में देखने वालों, मंदिरों में सालाना तीर्थ यात्राओं पर नहीं जाने वालों, दंत मंजन की जगह टूथपेस्ट इस्तेमाल करने वालों, वैद्य की जगह एलोपैथिक डॉक्टरों को तरजीह देने वालों, ‘जय श्रीराम…’ चिल्लाने की जगह चुंबन और हाथ मिलाकर स्वागत करने वालों पर दिखाएगा। कोई सुरक्षित नहीं है। हमें यह जरूर समझना चाहिए अगर हम भारत को जिंदा रखने की उम्मीद करते हैं।” खुशवंत सिंह की किताब ‘द एंड ऑफ इंडिया (2003 में प्रकाशित) का एक अंश फिर से साझा कर रहा हूं।