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पशुपतिनाथ व्रत कैसे किया जाता है और व्रत से क्या लाभ होते है ?

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 यदि आप भी भगवान् पशुपतिनाथ का व्रत करने जा रहे है, तो आपको यह जानना जरुरी है कि आपके द्वारा किया जाने वाला व्रत आप सही तरीके से कर भी रहे है या नहीं। यदि आप भगवान पशुपतिनाथ के व्रत की सही प्रक्रिया जानना चाहते है, तो आपको इस लेख को जरूर पढ़ना चाहिए।

इस लेख में आप जानेंगे कि पशुपतिनाथ व्रत कैसे किया जाता है? पशुपतिनाथ व्रत की विधि, पशुपतिनाथ व्रत से होने वाले लाभ आदि व्रत रखते वक़्त आपको थोड़ा सावधान रहने की जरुरत है क्योकि गलत तरीके से किया गया व्रत ना करने कि बराबर होता है। इसलिए व्रत की सही जानकारी होना बहुत जरुरी है।

पशुपतिनाथ व्रत की प्रतिष्ठा

यदि आप पशुपतिनाथ व्रत को पूरी श्रध्द्दा और इच्छा से करेंगे तो आपको कई प्रकार कि लाभ प्राप्त होंगे, साथ ही आपकी हर प्रकार की मनोकामना पूर्ण होगी। यदि आप भगवान पशुपतिनाथ के चरणों में पूरी श्रद्धा से जाएंगे तो आपके रुके हुए काम आसानी से पूर्ण हो सकेंगे। सच्चे मन से किये गए व्रत का फल देवो के देव महादेव अवश्य प्रदान करते है। यह वाक्य शिव महापुराण में की कथा में भी वर्णित है।

पशुपतिनाथ व्रत किनको करने चाहिए?

संसार में रहने वाला कोई भी पुरुष-महिला के द्वारा इस व्रत को किया जा सकता है। लेकिन महिला अपने मासिक धर्म के दौरान इस व्रत को रख तो सकती है, लेकिन पूजा नहीं कर सकती है। यदि संभव हो तो वह परिवारजन में से किसी से पूजा करा सकती है।

पशुपतिनाथ व्रत कब करे?

यदि आप पशुपतिनाथ व्रत करने पर विचार कर रहे है, तो आप इसकी शुरआत किसी भी सोमवार से कर सकते है। इस व्रत को रखने के लिए किसी शुभ तिथि की जरुरत नहीं है। आप इस व्रत की शुरआत किसी भी तिथि से कर सकते है। बस याद रहे के दिन सोमवार का ही हो।

पशुपतिनाथ कब ना करे?

पशुपतिनाथ व्रत को बीमार, गर्भवती महिलाएं व बीमार बुजुर्गो को नहीं करना चाहिए। क्योकि भगवान् पशुपतिनाथ कभी नहीं चाहेंगे के उनके भक्तो को किसी भी प्रकार का कष्ट सहना पड़े।

पशुपतिनाथ व्रत करने की प्रक्रिया/ पशुपतिनाथ व्रत करने की विधि

पशुपतिनाथ व्रत करने के लिए आपको सोमवार की सुबह ब्रम्ह महूर्त में उठ कर स्नान करके पूजा की थाली तैयार करना होगी। जिसमे आपको कुछ वस्तुए रखनी होगी जिनमे अबीर,कुमकुम, अष्टगंधा, गुलाल, अक्षत (बिना खंडित चावल), लाल चन्दन, पीला चन्दन रखनी होंगी। इन सभी वस्तुओ के अलावा आपको किसी प्रकार की कोई वास्तु रखने की आवश्यकता नहीं है, याद रखे इन सभी वस्तुओ की आपको शाम में पूजा करते समय भी आवश्यकता होगी इसलिए सभी वस्तुओ को अधिक मात्रा में रखे।

लेकिन यदि आपके पास यह सभी वस्तुए नहीं है तो कोई बात नहीं आप पूजा की थाली के साथ एक ताम्बे के लौटे में शुद्ध जल ले और बिल्व पत्र रख ले, यदि आपके पास बिल्व पत्र नहीं है तो आप मंदिर में रखे बिल्व पत्र को धोकर पूजा में इस्तेमाल कर सकते है।

यह याद रखे के आप उस मंदिर में ही जाये जो आपके घर के आस-पास हो क्योकि आप अपना पहला व्रत जिस मंदिर में रखेंगे आपको आगे के सभी व्रत उसी मंदिर में करने होंगे। इसलिए हर सम्भव कोशिश कीजिए कि अपने आस-पास के ही महादेव के मंदिर में जाए व आसानी से व्रत के दौरान पूजा कर सक।

अब आपको मंदिर में जाकर सबसे पहले भगवान् को प्रणाम करना होगा व अपने मन में व्रत का संकल्प करना होगा। शिवलिंग के पास पहुंच कर आपको उसकी थोड़ी सफाई करना होगी, उसके पश्चात आपको शिवलिंग का अभिषेक करना होगा, अभिषेक करते समय बिलकुल आराम से अभिषेक करे हड़बड़ी में अभिषेक ना करे, अभिषेक करते समय आपको अपने मन में “ॐ नमः शिवाय” या “श्री शिवाय नमस्तुभ्यं ” मन्त्र का जाप करते रहना होगा, अब आपको पूजन करते हुए बिल्व पत्र को सही तरीके से चढ़ाना होगा।

पूजा पूर्ण करने के पश्चात आपको पूजा की थाली अपने घर में बने पूजा घर में रख देनी होगी। प्रदोष काल में आपको वही पूजा की थाली के साथ बिल्व पत्र व मिठाई रख ले साथ में आपको 6 दिये भी अपनी थाली में रखना होंगे। अब उसी मंदिर में जाकर भगवान का अभिषेक करे व बिल्व पत्र को चढ़ाये। अब मिठाई के 3 हिस्से महादेव के सामने की कर से व 5 दियो को जला दे और मन ही मन प्रभु से प्राथना करे।

प्रसाद का तीसरा भाग व एक दिया अपने साथ घर ले आए, घर में प्रवेश करने से पहले अपने बाए हाथ पर दिये को जला ले व वही रख दे। अब आपको फलहार से पूर्व उस प्रसाद को ग्रहण करना होगा जो आप साथ लाए थे, याद रखे आपको प्रसाद किसी और के साथ नहीं बांटना है,उस प्रसाद को आपको अकेले ही खाना होगा। लीजिये आपका पहला पशुपतिनाथ व्रत पूर्ण हो गया है इस प्रकार आप प्रति सोमवार को व्रत कर सकते है।