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भारत के 4 कफ सीरप को WHO ने बताया जानलेवा, सोनीपत में बनती है दवा, स्‍वास्थ्‍य मंत्रालय करेगा जांच

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Gambia Children Deaths Cases: WHO ने मेडिकल प्रोडक्ट को लेकर अलर्ट भी जारी किया है. यह अलर्ट गाम्बिया में पाई गईं 4 दूषित दवाओं को लेकर जारी किया गया है. संभव है कि इसका संबंध किडनी की गंभीर बीमारी और 66 बच्चों की मौत से हो. युवा जिंदगियों का जाना उनके परिवारों के लिए सदमा है.

हाइलाइट्स

23 नमूनों में से 4 नमूनों में डायथाइलीन ग्लाइकॉल/एथिलीन ग्लाइकॉल पाया: WHO 
हर‍ियाणा के सोनीपत स्‍थ‍ित मेडन फार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड में तैयार होते हैं ये कफ सीरप
66 मौतों के के बाद से गाम्बिया देश में हाहाकार मचा हुआ है.

नई द‍िल्‍ली. हर‍ियाणा स्‍थ‍ित मेडन फार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड की ओर से कफ एंड कोल्ड सीरप (Cough and Cold Syrup) बनाया जाता है. इसकी सप्‍लाई (न‍िर्यात) अफ्रीकी देश गाम्बिया में भी की जाती है. इस कफ सीरप के पीने से गाम्बिया में 66 बच्चों की मौत होने का मामला सामने आया है. बताया जा रहा है कि भारत की मेडन फार्मास्युटिकल कंपनी ने चार कफ एंड कोल्ड सीरप बनाए थे. ये मौतें इसी से हुईं. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की ओर से इन सभी मौतों के ल‍िए मेड-इन-इंडिया कफ सीरप की जांच की जा रही है.

WHO ने गाम्बिया में पाई गईं 4 दूषित दवाओं को लेकर अलर्ट भी जारी किया है. संभव है कि इसका संबंध किडनी की गंभीर बीमारी और 66 बच्चों की मौत से हो. युवा जिंदगियों का जाना उनके परिवारों के लिए सदमा है. WHO के अलर्ट में कहा गया है कि मेडन फार्मासियूटकल्स लिमिटेड के चार कफ सीरप की वजह से गाम्‍बिया देश में 66 बच्चों की मौत का आरोप है, ज‍िसकी जांच जारी है.

WHO ने स्वास्थ्य मंत्रालय को दी जानकारी
बताया गया है क‍ि भारत के हरियाणा में बनी ये कफ सीरप घातक केमिकल से दूषित हैं और बेहद घटिया क्वालिटी की हैं. पता चला है कि इन दवाओं में सीमा से ज्यादा डायथिलीन ग्लाइकोल और एथिलीन ग्लाइकोल हैं. ये दोनों ही रसायन इंसान के शरीर के लिए घातक हैं और जानलेवा साबित हो सकते हैं. WHO की इस जांच पर स्वास्थ्य मंत्रालय के सूत्रों का कहना है क‍ि 29 सितंबर को WHO ने DCGI (नेशनल ड्रग रेगुलेटर ऑफ इंडिया) को डायथिलीन ग्लाइकॉल या एथिलीन ग्लाइकॉल से दूषित दवाओं के बारे में बताया गया.

सीडीएससीओ (सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन) ने तुरंत मामले को संबंधित राज्य नियामक प्राधिकरण के साथ उठाया और WHO द्वारा साझा की गई उपलब्ध जानकारी के आधार पर विस्तार से जांच शुरू की. प्रारंभिक जांच से पता चलता है कि मेसर्स मेडन फार्मास्युटिकल लिमिटेड, सोनीपत, हरियाणा का एक निर्माता है और अब तक इन प्रोडक्ट को सिर्फ अफ्रीकी देश गाम्बिया को निर्यात किया है.

WHO द्वारा प्राप्त किए गए 23 नमूनों में से अस्थायी परिणामों के अनुसार, 4 नमूनों में डायथाइलीन ग्लाइकॉल/एथिलीन ग्लाइकॉल पाया गया है, जैसा कि संकेत दिया गया है. WHO की ओर से यह भी बताया गया है कि विश्लेषण का प्रमाण पत्र निकट भविष्य में WHO को उपलब्ध कराया जाएगा और WHO इसे भारत के साथ साझा करेगा.

सूत्र बताते हैं कि डब्ल्यूएचओ से आग्रह क‍िया गया है कि वो संबंधित मेडिकल प्रोडक्ट, लेबल/उत्पादों आदि की तस्वीरों के साथ डेथ की सटीक वजह पर रिपोर्ट सीडीएससीओ के साथ जल्द से जल्द साझा करे. बताते चलें क‍ि 66 मौतों के बाद से गाम्बिया में हाहाकार मचा हुआ है. लोगों को कुछ समझ नहीं आ रहा. अस्पतालों में भीड़ बढ़ने से अव्यवस्था का माहौल बना हुआ है. स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि अब किसी भी तरह के सीरप को लेने से पहले जांच करा लें. मेडन फार्मास्युटिकल लिमिटेड के उत्पाद से दूर रहें. गाम्बिया में बच्चों को अचानक सर्दी-खांसी हुई तो सभी ने मेडन फार्मास्युटिकल का कफ एंड कोल्ड सीरप पिया. फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि यह भारतीय कंपनी वहां किस स्तर पर अपने उत्पादों की बिक्री करती है.

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