मुंगेली नगर में इन दिनों कड़ाके की ठंड पड़ रही है। सुबह-शाम सर्द हवाओं के साथ तापमान में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है, जिससे आमजन का जनजीवन प्रभावित हो रहा है। ऐसे में नगर पालिका मुंगेली द्वारा अब तक अलाव की कोई व्यवस्था नहीं किए जाने से नागरिकों में भारी नाराजगी और आक्रोश देखने को मिल रहा है। ठंड से बचाव के लिए हर वर्ष प्रमुख चौक-चौराहों, बस स्टैंड, अस्पताल परिसर, बाजार क्षेत्र एवं भीड़भाड़ वाले स्थानों पर अलाव जलाए जाते थे, लेकिन इस वर्ष नगर पालिका का सुस्त और लापरवाह रवैया जनता पर भारी पड़ रहा है। नगर के विभिन्न वार्डों में रहने वाले लोगों का कहना है कि ठंड का सबसे ज्यादा असर गरीब, असहाय, वृद्ध, महिलाएं, बच्चे और सड़क किनारे जीवन यापन करने वाले लोगों पर पड़ रहा है। सुबह मजदूरी के लिए निकलने वाले श्रमिकों, ठेला-खोमचा लगाने वालों, रिक्शा चालकों और राहगीरों को भीषण ठंड में बिना किसी राहत के समय गुजारना पड़ रहा है। रात के समय ठंड और भी बढ़ जाती है, ऐसे में अलाव की व्यवस्था न होना गंभीर चिंता का विषय बन गया है। स्थानीय नागरिकों ने बताया कि हर वर्ष दिसंबर के शुरुआत से ही नगर पालिका द्वारा अलाव जलाने की व्यवस्था शुरू कर दी जाती थी। इसके लिए बजट भी निर्धारित होता था और कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जाती थी, लेकिन इस बार अब तक न तो अलाव के लिए लकड़ी दिखाई दी और न ही किसी चौक-चौराहे पर आग जलती नजर आई। लोगों का आरोप है कि नगर पालिका ठंड से राहत देने जैसे बुनियादी कार्यों को भी नजरअंदाज कर रही है। नगरवासियों का कहना है कि प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को आम जनता की समस्याओं से कोई सरोकार नहीं रह गया है। कागजों में योजनाएं जरूर बनती हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर उनका क्रियान्वयन नहीं हो पा रहा है। कई वार्डवासियों ने नगर पालिका में मौखिक शिकायत भी की, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। वहीं, सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने भी नगर पालिका के इस रवैये पर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि ठंड के मौसम में अलाव की व्यवस्था करना कोई नई बात नहीं है, बल्कि यह नगर पालिका की नियमित जिम्मेदारी में शामिल है। यदि समय रहते अलाव की व्यवस्था नहीं की गई, तो ठंड से बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है।
नागरिकों ने नगर पालिका प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द शहर के प्रमुख स्थानों पर अलाव की व्यवस्था कराई जाए, ताकि लोगों को कड़ाके की ठंड से कुछ राहत मिल सके। साथ ही यह भी मांग की जा रही है कि भविष्य में ऐसी लापरवाही दोबारा न हो और नगर पालिका जनहित के कार्यों को प्राथमिकता दे। अब देखना यह है कि नगर पालिका प्रशासन जनता की पीड़ा को समझते हुए कब तक इस दिशा में ठोस कदम उठाता है।



