Home छत्तीसगढ़ छत्तीसगढ़ : जीपीएस लगी बसों को ही जारी होगा फिटनेस सर्टिफिकेट

छत्तीसगढ़ : जीपीएस लगी बसों को ही जारी होगा फिटनेस सर्टिफिकेट

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बिलासपुर

छत्तीसगढ़ में चलने वाले सभी सार्वजनिक वाहनों में ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (जीपीएस) व पैनिक बटन लगाना अनिवार्य होगा। एक अप्रैल से व्यवस्था लागू हो जाएगी। फिटनेस जांच के दौरान इसे प्रमुखता से देखा जाएगा। यदि बसों में यह नहीं लगा है तो उसका फिटनेस सर्टिफिकेट जारी नहीं होगा। यह सिस्टम वाहन मालिक खुद लगाएंगे। इस व्यवस्था के तहत विभाग वाहनों की निगरानी करेगा।

परिवहन विभाग से परमिट मिलने के बाद बस व अन्य छोटी- बड़ी यात्री गाड़ियां सड़क पर दौड़ती हैं। लेकिन इनका परिचालन नियमानुसार हो रहा है या नहीं, उसमें सफर करने वाले यात्री विशेषकर महिला यात्री सुरक्षित हैं या नहीं इसे लेकर विभाग में मॉनिटरिंग की अब तक कोई पुख्ता इंतजाम नहीं था। नियमानुसार बसों को परमिट समय के मुताबिक चलना है। इसे लेकर भी विभाग जैसी मॉनिटरिंग करना चाहता है उस तरह नहीं कर पाता। इस तकनीकी परेशानी को लेकर परिवहन मंत्रालय में समय- समय पर चर्चाएं भी हो रही थी। इसमें आखिरकार यह निर्णय लिया गया कि ऐसे वाहन, जिनमें यात्री सफर करते हैं उनमें जीपीएस लगाया जाए। इस सिस्टम के जरिए विभाग उनकी बेहतर मॉनिटरिंग कर सकता है। इस निर्णय को अमल में लाने के लिए जिला व क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय को निर्देश दिए गए हैं। इसका पालन 31 दिसंबर 2018 तक हो जाना चाहिए था। पर बस संचालकों द्वारा इसे लेकर कुछ समस्या का हवाला देते हुए कुछ दिनों की छूट देने की मांग की गई। इसके तहत जनवरी तक छूट दी गई। जैसे- तैसे दो महीने और गुजर गए। लेकिन अब परिवहन विभाग इसमें सख्ती बरत रहा है और स्पष्ट तौर निर्देश दिया गया है कि एक अप्रैल से सार्वजनिक वाहन इस सिस्टम से लैस होकर चलेंगे। बिना इसके कोई कार्यालय फिटनेस सर्टिफिकेट जारी नहीं करेगा। बिलासपुर क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय को भी आदेश पहुंच गया है।

सुरक्षा व मानिटरिंग उद्देश्यः माथुर

इस संबंध में क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी असीम माथुर का कहना है कि परिवहन मुख्यालय से आदेश है। इसमें सभी यात्री वाहनों में जीपीएस लगाने की अनिवार्यता कर दी गई है। एक अप्रैल से जिनमें यह सिस्टम नहीं लगा होगा, उन्हें फिटनेस सर्टिफिकेट जारी नहीं किया जाएगा। उनका कहना है कि जीपीएस लगने के बाद विभाग वाहनों की मॉनिटरिंग की जा सकती है। किसी तरह शिकायत की सूचना के बाद उस वाहन को ट्रेस कर विभागीय अमला अविलंब वहां पहुंच जाएगा। सुरक्षा के लिहाज से यह कारगर व्यवस्था है। इस संबंध में बस संचालकों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

ऐसे काम करेगा पैनिक बटन

जीपीएस डिवाइस के साथ जो सबसे महत्वपूर्ण तकनीक बसों और टैक्सियों में लगाई जाएंगी वह पैनिक बटन है। पैनिक बटन एक तरह का अलर्ट बटन है जो परिवहन विभाग और पुलिस कंट्रोल रूम से जुड़ा रहेगा। कोई यात्री जैसे ही इस बटन को दबाएगा तो इसकी सूचना परिवहन विभाग और पुलिस को हो जाएगी। और वे यात्री की सुरक्षा के लिए जीपीएस से टैक्सी को ट्रैक करके वहां पहुंच जाएगी।