Home धर्म - ज्योतिष करेगी हर विपदा दूर, सच्चे मन से करें मां कात्यायनी की पूजा

करेगी हर विपदा दूर, सच्चे मन से करें मां कात्यायनी की पूजा

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रायपुर। चैत्र नवरात्र के छठवे दिन मां दुर्गा के छठे स्वरुप मां कात्यायनी की पूजा की जाती है। 6 अप्रैल से चैत्र नवरात्र प्रारंभ हो चुका है जो 14 अप्रैल तक चलेगा। मां कात्यायनी अपने भक्तगणों पर हमेशा अपनी कृपा दृष्टि रखती हैं। वैसे यह अमरकोष में पार्वती के लिए दूसरा नाम है, संस्कृत शब्दकोश में उमा, कात्यायनी, गौरी, काली, हेमावती, इस्वरी इन्हीं के अन्य नाम हैं। शक्तिवाद में उन्हें शक्ति या दुर्गा, जिसमें भद्रकाली और चंडिका भी शामिल है, कहा जाता है। मां कात्यायनी को प्रसन्न करना कठिन नहीं है अगर आप उनकी सच्चे मन से पूजा-आर्चना करते है तो वे आप के हर कष्ट को दूर करेगी। माना जाता है कि देवी कात्यायनी की पूजा से घर में सुख शान्ति का आह्वान होता है। विवाह के बाद की समस्याएं और पति-पत्नी के रिश्ते में आ रही परेशानियां इनकी उपासना व व्रत से दूर होती हैं। वहीं शादी में हो रही देरी या बार-बार रिश्ते होकर टूटना जैसे दिक्कतों में भी कात्यायनी पूजा फलदायी होती है।
मां कात्यायनी से जुड़ी कथा
यजुर्वेद के तैत्तिरीय आरण्यक में उनका उल्लेख किया है। स्कंद पुराण में उल्लेख है कि वे परमेश्वर के नैसर्गिक क्रोध से उत्पन्न हुई थीं जिन्होंने देवी पार्वती द्वारा दिए गए सिंह पर आरूढ़ होकर महिषासुर का वध किया। परंपरागत रूप से देवी दुर्गा की तरह वे लाल रंग से जुड़ी हुई है। नवरात्रि उत्सव के षष्ठी में उनकी पूजा की जाती है। दरअसल, उस दिन साधक का मन ‘आज्ञा’ चक्र में स्थित होता है। योगसाधना में इस आज्ञा चक्र का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। इस चक्र में स्थित मन वाला साधक मां कात्यायनी के चरणों में अपना सर्वस्व निवेदित कर देता है। परिपूर्ण आत्मदान करने वाले ऐसे भक्तों को सहज भाव से मां के दर्शन प्राप्त हो जाते हैं। मां कात्यायनी का जन्म मह्रिषी कात्यायन के घर हुआ था। मह्रिषी कात्यायन के घोर तपस्या करके मां दुर्गा को प्रसन्न किया था। उसके बाद मां दुर्गा ने प्रसन्न होकर मह्रिषी को वरदान दिया कि वे उनके यहां पुत्री रूप में जन्म लेंगे। इस कारण उनका नाम कात्यायनी रखा गया।

। चंद्र हासोज्ज वलकरा शार्दू लवर वाहना ।
।। कात्यायनी शुभं दघा देवी दानव घातिनि ।।