Home समाचार Madhya Pradesh में कांग्रेस और समर्थित विधायक बोले- 5 साल साथ रहेंगे

Madhya Pradesh में कांग्रेस और समर्थित विधायक बोले- 5 साल साथ रहेंगे

All PDF Reader 20260626 00.30.11_page-0004
All PDF Reader 20260626 00.30.11_page-0001
All PDF Reader 20260626 00.30.11_page-0002
All PDF Reader 20260626 00.30.11_page-0003


मप्र की कमलनाथ सरकार के स्थायित्व पर भाजपा द्वारा आए दिन खड़े किए जा रहे सवाल का जवाब देने के लिए रविवार को कांग्रेस समेत सरकार को समर्थन दे रहे निर्दलीय और सपा बसपा विधायकों ने अपनी एकजुटता का प्रदर्शन किया। मुख्यमंत्री निवास पर हुई विधायकों की बैठक में 121 में से 119 विधायकों ने एकजुटता दिखाकर कमलनाथ के नेतृत्व में पांच साल सरकार को समर्थन देने का प्रस्ताव पारित किया। मुख्यमंत्री ने विधायकों को झूठ फैलाने वाले तंत्र से सतर्क रहने की हिदायत भी दी।

मुख्यमंत्री निवास में शाम करीब साढ़े चार बजे विधायक दल की बैठक शुरू हुई, जो रात सवा सात बजे तक चली। इसके बाद कई विधायकों से मुख्यमंत्री ने वन-टू-वन चर्चा भी की। बैठक में करीब 30 विधायकों ने अपने विचार रखे।

सूत्रों के मुताबिक डॉ. अशोक मर्सकोले और कुछ अन्य आदिवासी विधायकों ने बताया कि लोकसभा चुनाव में कांग्रेस जिन डेढ़ दर्जन विधानसभा सीटों पर जीती है, उनमें 13 आदिवासियों के क्षेत्र की हैं। कांग्रेस सरकार बनाने में भी 114 में से 31 विधायक आदिवासी क्षेत्र के हैं। इन आंकड़ों को बताते हुए उन्‍होंने सरकार में इस अनुपात में जगह नहीं मिलने की शिकायत रखी। दूसरी तरफ कुछ विधायकों ने लोस चुनाव में संगठन की कमजोर स्थिति के बारे में भी बात रखी। कुछ विधायकों ने अपने क्षेत्र की पानी की समस्याओं को लेकर चिंता जाहिर की तो मुख्यमंत्री ने तुरंत कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

संगठन के कामकाज में तेजी लाने का सुझाव

सूत्रों ने बताया कि कुछ विधायकों ने संगठन के काम के तरीके में सुधार की जरूरत बताई। संगठन को और तेजी से काम करने के बारे सुझाव दिए। इस तरह के सुझाव सुनील सर्राफ सहित कुछ अन्य ने भी दिए। इसी तरह विधायकों ने सरकार द्वारा लागू की गई कर्ज माफी को तुरंत और तेजी के साथ लागू करने को प्राथमिकता पर रखने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि जल्द कर्ज माफी के प्रमाण पत्र जारी किए जाएं।

अंडर करंट का पता लगाएं

सूत्रों के मुताबिक बैठक में लोस चुनाव परिणामों पर चर्चा के दौरान वरिष्ठ नेताओं ने विधायकों से कहा कि वे यह पता लगाएं कि क्या वाकई में भाजपा के पक्ष में कोई अंडर करंट था? इधर, भाजपा नेताओं के सरकार गिराने के बयानों पर वरिष्ठ नेताओं और विधायकों ने कहा कि वे लगातार प्रयास कर रहे हैं। उनके प्रयासों को हम कामयाब नहीं होने देंगे। ‘हमें संदेश देना है कि हम सब एक हैं और पांच साल साथ रहेंगे।”

हार-जीत तो लगी रहती है

मुख्यमंत्री ने विधायकों से कहा कि अपने क्षेत्र के विकास की ओर ध्यान दें और योजनाएं बनाकर सरकार को सौंपें। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनादेश का सम्मान करें। हार-जीत तो लगी रहती है। राजनीति में कोई स्थाई विजेता नहीं होता है और न ही असफलता स्थाई होती है।

दो विधायकों को छोड़कर पूरा सत्ता पक्ष पहुंचा

बैठक में विधायकों के अलावा कांग्रेस महासचिव और प्रदेश प्रभारी दीपक बाबरिया, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश पचौरी, राज्यसभा सदस्य राजमणि पटेल, नवनिर्वाचित लोकसभा सदस्य नकुलनाथ शामिल हुए। मंत्री पीसी शर्मा पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के पिता के निधन के बाद उनके अंतिम संस्कार में शामिल होने जैत जाने तथा विधायक विशाल पटेल विदेश प्रवास पर होने की वजह से बैठक में नहीं पहुंचे। कांग्रेस विधायकों के अलावा बैठक में सरकार को समर्थन दे रहे तीनों निर्दलीय विधायक सुरेंद्र सिंह शेरा, केदार चिड़ाभाई डाबर, विक्रम सिंह राणा, बसपा विधायक संजीव सिंह कुशवाह व रामबाई और सपा विधायक राजेश शुक्ला भी पहुंचे।

राजा-महाराजा जाएं दिल्ली, आराम करें, कमलनाथ को फ्री हैंड छोड़ें : केपी सिंह

कांग्रेस विधायक दल की बैठक में वरिष्ठ विधायक केपी सिंह ने कहा कि अब राजा-महाराजा दिल्ली जाएं, आराम करें और दिल्ली की राजनीति करें। कमलनाथ को फ्री हैंड छोड़ें। यह बात केपी सिंह ने बसपा विधायक संजीव सिंह कुशवाह के कमलनाथ सरकार को समर्थन देने के प्रस्ताव के बीच में कही।

सूत्रों के मुताबिक केपी सिंह ने कहा कि भाजपा के संपर्क में 20 विधायक हैं। उन्होंने उन पर नजर रखने को सलाह दी और कहा कि संगठन व सरकार को सक्रियता बढ़ाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि मेरे पर आरोप लगाए जाते हैं कि मैं भाजपा नेता राजनाथ सिंह के संपर्क में हूं। मैं संपर्क में नहीं हूं और जब मिलूंगा तो कहकर जाऊंगा। इसका समर्थन एदल सिंह कंसाना और बिसाहूलाल सिंह ने भी किया और कहा कि जब हम जाएंगे तो हम भी कहकर जाएंगे।