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संप्रदा सिंह: बना डाली 26 हजार करोड़ की दवा कंपनी, सेल्समैन से करियर की शुरुआत

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बिहार के सबसे अमीर उद्योगपति रहे और मशहूर दवा कंपनी एल्केम ग्रुप ऑफ कंपनी के मालिक संप्रदा सिंह का शनिवार को निधन हो गया. 94 साल के सिंह ने मुंबई के लीलावती अस्पताल में सुबह 9 बजकर 20 मिनट आखिरी सांस ली. संप्रदा सिंह की पहचान न केवल एक सफल उद्योगपति के तौर पर होती थी बल्कि उनको फार्मा लाइन का एक दिग्गज भी माना जाता था. एक साधारण किसान के पुत्र से बिहार के सबसे बड़े उद्योगपति बनने तक की संप्रदा बाबू की कहानी किसी फिल्मी कहानी से कम न थी. कौन थे संप्रदा सिंह

संप्रदा सिंह का जन्म 1925 में मूल रूप से बिहार के जहानाबाद जिले के मोदनगंज प्रखंड के ओकरी गांव में हुआ था. संप्रदा सिंह ने अपनी पढाई गया विश्वविद्यालय से की. गांव के लोग बताते हैं कि वो शुरू से ही कुछ अलग करना चाहते थे और यही कारण है कि संप्रदा की जिद ने उन्हें लगातार आगे बढ़ाया और उनकी गिनती बिहार ही नहीं देश के बड़े उद्योगपति के तौर पर हुई. संप्रदा सिंह ने 45 साल पहले फार्मा कंपनी अल्‍केम की स्थापना की थी. अपनी मेहनत और काबिलियत के बल पर उन्होंने 26 हजार करोड़ रुपए से ज्‍यादा की वैल्‍यूएशन वाली कंपनी खड़ी कर दी.

8 अगस्‍त 1973 को अल्‍केम लैबोरेटरीज लिमिटेड की स्थापना करने वाले संप्रदा की कहानी पूरी तरह से फिल्मी थी. पिता जंमीदार थे इस कारण खेती विरासत में मिली थी लेकिन संप्रदा ओकरी में रहकर भी धान-गेहूं की बजाय सब्जी समेत अन्य नगदी फसल उपजाना चाहते थे. गांव के ही शैलेंद्र सिंह और शंभू शर्मा ने बताया कि उनके पिता के पास करीब 25 बीघा जमीन थी लेकिन उस जमाने में ग्रेजुएशन करने वाले संप्रदा धान और गेहूं की बजाय सब्जी समेत अन्य चीजों की खेती करना चाहते थे लेकिन वो सफल नहीं हुए. गांव में आये अकाल के बाद संप्रदा ने मुड़कर पीछे नहीं देखा और फिर बिहार के सबसे बड़े उद्योगपति बन गए.

संप्रदा सिंह की पहचान भले ही देश के बड़े और मशहूर उद्योगपतियों के तौर पर होती है लेकिन बहुत कम लोगों को ये पता है कि उन्होंने भी अपने करियर की शरूआत एक केमिस्ट शॉप पर नौकरी से की थी. पटना में एक केमिस्ट शॉप में नौकरी करने वाले संप्रदा सिंह उन दिनों छाता भी बेचा करते थे. संप्रदा सिंह ने 1953 में रिटेल केमिस्‍ट के तौर पर एक छोटी शुरुआत की फिर पटना में दवा की दुकान शुरू की. इसके बाद 1960 में उन्होंने पटना में मगध फार्मा के बैनर तले उन्होंने फार्मा डिस्‍ट्रीब्‍यूशन का बिजनेस शुरू किया.

पटना के बाद मुंबई का किया रूख

पटना समेत बिहार में दवा का व्यापार करने वाले संप्रदा ने अपने व्यवसाय को बढ़ाने के साथ कुछ ही दिनों में इसे भारत के पूर्वी क्षेत्र का दूसरा बड़ा डिस्‍ट्रीब्‍यूशन नेटवर्क खड़ा कर दिया. व्यवसाय को बढ़ाने के उद्देश्य से कुछ ही दिनों में उन्‍होंने मुंबई का रूख कर लिया. चले गए।

इलाके में संप्रदा बाबू के नाम से जाने जाने वाले इस उद्योगपति के बारे में लोग बताते हैं कि संप्रदा बाबू जब मुंबंई गए थे तो वो अपने साथ एक लाख रुपये लेकर गए थे और इसी पैसे से उन्होंने अपनी दवा कंपनी शुरू की. उन्होंने अपनी कंपनी की नाम अल्‍केम लैबोरोटरीज दिया और इस कंपनी ने देखेते ही देखते नाम और पैसे दोनों कमाए. दवा की मांग बढ़ने पर संप्रदा सिंह ने अपनी दवा फैक्ट्री शुरू कर दी और उसके बाद उनकी कंपनी चल पड़ी. संप्रदा ने अपने इस व्यवसाय के माध्यम से लोगों को उस वक्त में रोजगार के अवसर दिए जब इलाका बेरोजगारी की मार झेल रहा था.

2017 में मिली अंतरराष्ट्रीय पहचान

2017 में प्रतिष्ठित पत्रिका फोर्ब्स में उनका नाम आया था और उन्हें 43वां स्थान प्राप्त हुआ था. देश के सबसे बुजुर्ग अरबपति सम्प्रदा सिंह वर्ष 2018 में फोर्ब्स की ‘द वर्ल्ड बिलियनेयर्स लिस्ट ‘में शामिल हुए थे. उस वक्त उनकी संपत्ति 1.2 अरब डॉलर थी. अपनी संपत्ति की वजह से वो फोर्ब्स की लिस्ट में 1,867वें पायदान पर रहे थे.