Home छत्तीसगढ़ छत्तीसगढ़ : ‘एकलव्य’ के वंशजों का नहीं बन रहा जाति प्रमाण पत्र

छत्तीसगढ़ : ‘एकलव्य’ के वंशजों का नहीं बन रहा जाति प्रमाण पत्र

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मरवाही ब्लाक में बड़ी संख्या में पंडो जनजाति के लोग शासन की योजनाओं से वंचित हो रहे हैं। मिसल नहीं होने से उन्हें इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। लापरवाही का आलम यह है कि जानकारी के बाद भी अधिकारी सुध नहीं ले रहे है। मरवाही के वनांचल व दूरस्थ ग्राम पंचायत सेमरदरी में एक टोला है, बगैह टोला जहां पंडो समुदाय रहता है। इनका कहना है, यह कई पीढ़ियों से यहां रह रहे हैं। सरकार द्वारा इनके लिए स्कूल, पानी व आंगनबाडी जैसी मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराई गई हैं।

प्रधानमंत्री आवास योजना व शौचालय भी देखने को मिल जाता है। घरों में आज भी धनुष बाण रखे जाते हैं,यहां भी कहते हैं,हम धनुष बाण में कभी अपने अंगूठे का प्रयोग नहीं करते हम एकलव्य के वंशज हैं, और एकलव्य ने गुरु द्रोण को अपना अंगूठा गुरु दक्षिणा में दिया था। यह लोग शिक्षित हो रहे हैं,पुरातन से आधुनिकता की ओर बढ़ने की हर एक कोशिश कर रहे हैं।

यहां रहने वाले पंडो समुदाय की एक विकट समस्या यह है, कि उनके पास मिसल नहीं होने के कारण जाति प्रमाण पत्र नहीं बन पा रहा, जो कुछ दूर बाद इनके बढ़ते कदम रोक देता है। इन्हें अब उम्मीद है, कि जाति प्रमाण पत्र सरलीकरण होने के बाद इनके प्रमाण पत्र बनाने का मामला प्रशासन गंभीरता से लेगा। क्योंकि धनुष से शुरू हुई सफर कलम तक पहुंचने को तैयार है।

सरकारी योजनाओं से वंचित

बगैहा के धनी पंडो का कहना जाति प्रमाण पत्र के लिए पहले हम प्रयास कर चुके हैं, पर जमा होने के बाद नहीं बना। हमारे पास मिशल भी नहीं है। तीन बार प्रयास किए। मंगलसिंह एवं घासीराम ने कहा कि हमारे पास मिसल नहीं इसलिए जाति प्रमाण पत्र नहीं बन पा रहा है।

कौन है पंडो जनजाति

छत्तीसगढ़ अनुसूचित जनजातियों का एक विशेष जाति समुदाय पंडो जिसे राज्य शासन द्वारा वर्ष 2000-03 में विशेष पिछड़ी जनजातियों के तुल्य मानते हुए,सूरजपुर जिले में पृथक अभिकरण गठित किया गया। इनका विस्तार सूरजपुर सरगुजा बलरामपुर में है, जो इनका मूल निवास है।

इनके अनुसार वर्षों पहले घुमंतू व खानाबदोश होना, इन्हें जगह जगह स्थापित करने की एक बड़ी वजह है। अपने मूल स्थान को छोड़ अन्य जगहों पर रुकने से तब कोई समस्या तो नहीं आई। पर अब कुछ समस्याओं से इन्हें रूबरू होना पड़ रहा। पूर्व में शिकार व जंगलों पर निर्भर यह जाति समुदाय, शिक्षा व आधुनिकता की ओर अग्रसर है। जहां कुछ समस्याएं इन्हें आगे बढ़ने से रोक रही।

पंडो जनजाति के लोग पहले इतना पढ़े-लिखे नहीं थे, अब पढ़ लिख रहे हैं, अब जाति प्रमाण पत्र न होने की वजह से सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं से वंचित हो जाते हैं। – प्रताप सिंह भानू ,सेमरी सरपंच

इस विशेष पिछड़ी जनजाति का जाति प्रमाण पत्र ग्राम सभा के माध्यम से बन जाता है। तहसीलदार को कहकर मामले में संज्ञान लेंगे। – डिकेश पटेल, एसडीएम