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रेलवे भी हुआ ईको-फ्रेंडली, यहां पत्तों के दोने में मिल रहा खाने-पीने का सामान

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मध्य प्रदेश के रतलाम मंडल में रेलवे ने पर्यावरण को बढ़ावा देने, प्लास्टिक के उपयोग को रोकने और यात्रियों के स्वास्थ्य को लेकर स्टेशन की खानपान यूनिटों पर कागज या सिंथेटिक बाउल के बजाय पत्तों से बने दोने का उपयोग शुरू किया है। स्टेशनों के स्टॉल, ट्रॉली या अन्य यूनिट पर अब खाद्य सामग्रियां पत्तों से बने दोने में दी जाएगी। रविवार से मंडल स्तर पर शुरुआत कर इसका उपयोग अनिवार्य भी कर दिया गया है।

अधिकारियों का दावा है कि भारतीय रेलवे और पश्चिम रेलवे जोन स्तर पर इस तरह का यह पहला प्रयोग है। इसका डीआरएम ने ट्वीट भी किया तो दर्जनों कमेंट भी आए।

मंडल के रेलवे स्टेशनों पर स्टॉलों से खानपान सामग्री का उपयोग होने के बाद कचरे में बड़ी मात्रा में पॉलीथिन भी दिखाई देने लगी है। पिछले दिनों ए-1 व ए श्रेणी के स्टेशनों को छोड़कर प्रमुख स्टेशनों पर सफाई कराई गई, तब 3 हजार किलो कचरा और 50 किलो प्लास्टिक निकाला गया। इसके चलते अब पत्तों से बने दोने का उपयोग शुरू कर दिया गया है।

रतलाम, इंदौर, उज्जैन, देवास, चित्तौड़गढ़, दाहोद सहित अन्य कई स्टेशनों पर स्टॉलों पर इसके बारे में पूर्व सूचना देकर रविवार को इस आदेश को लागू कर दिया गया है। स्टेशनों पर कार्यरत सीएमआई को निर्देश देकर स्टॉलों की जांच कर फोटो भी लिए गए हैं।

एक घंटे में दर्जनों ट्वीट

रेलवे द्वारा नए प्रयोग का डीआरएम की आईडी से ट्वीट भी किया गया, तब फॉलोअर के दर्जनों ट्वीट आ गए। इसमें कमेंट कर यात्रियों ने पत्तों के दोने के उपयोग को पर्यावरण हितैषी तथा बेहतर माना। दूसरी ओर माना जा रहा है कि इस प्रयोग से दोनों का उपयोग शुरू होने से इससे जुड़े लोगों को रोजगार भी मिलेगा।

रेल मंडल में नवाचार के तहत खानपान यूनिट पर खाद्य सामग्री देने में अब केवल पत्तों से बने दोनों का ही उपयोग किया जाएगा। इससे लोगों को रोजगार भी मिलेगा। कागज व पॉलीथिन का उपयोग नहीं होने से पर्यावरण सुरक्षा के साथ यात्रियों के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर नहीं पड़ेगा।

– आरएन सुनकर, डीआरएम रेल मंडल रतलाम