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चिटफंड कंपनियों ने मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ से हड़पे करीब ढाई हजार करोड़ रुपए

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पश्चिम बंगाल और ओडिशा की तरह मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ के नागरिकों का करीब दो से ढाई हजार करोड़ रुपए चिटफंड कंपनियों ने धोखाधड़ी से हड़प लिया। पीएसीएल (पर्ल एग्रोटेक कॉर्पोरेशन लिमिटेड) सहित करीब तीन दर्जन चिटफंड कंपनियों ने रकम दोगुनी करने का लालच देकर 70-80 लाख नागरिकों की यह राशि दबा ली। धोखाधड़ी के शिकार होने वालों में ज्यादातर निम्न मध्यमवर्गीय एवं कर्मचारी हैं। मप्र सरकार ने पुलिस मुख्यालय की को-ऑपरेटिव फ्राड शाखा को मामले की जांच सौंपी है।

चिटफंड कंपनियों ने ढाई-तीन दशक तक प्रदेश में यह गोरखधंधा चलाया। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह द्वारा इस मामले की जांच के लिए पत्र लिखे जाने के बाद मुख्यमंत्री कमलनाथ ने हाल ही में पुलिस मुख्यालय को जांच के निर्देश दिए हैं। दोनों राज्यों में सबसे बड़ी कंपनी पीएसीएल थी, जिसने बड़े शहरों में अपने दफ्तर खोलकर पहले लोगों का विश्वास जीता और उसके बाद अरबों रुपए दबाकर बैठ गई।

करीब तीन दर्जन छोटी-बड़ी कंपनियां तीन से पांच साल में पैसा दोगुना करने का लालच देकर गरीब जनता की गाढ़ी कमाई लेकर वापस करने से मुकर गईं। पीएसीएल और अन्य चिटफंड कंपनियों के खिलाफ जिला कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी मामलों की सुनवाई हुई, लेकिन लोगों का पैसा अब तक वापस नहीं हो पाया।

निवेशकों ने खोला मोर्चा

ऑल इंवेस्टर्स सेफ्टी ऑर्गेनाइजेशन (एआईएसओ) नई दिल्ली एवं सर्व हित महाकल्याण वेलफेयर फाउंडेशन जैसी संस्थाओं ने धोखाधड़ी के शिकार हुए लाखों गरीब निवेशकों की ओर से इन कंपनियों के खिलाफ मोर्चा खोला है। इनकी पहल पर देश की सर्वोच्च अदालत ने पीएसीएल मामले में 2016 में फैसला दिया था कि छह माह में प्रॉपर्टी बेचकर पैसा लौटाएं। जस्टिस आरएम लोढ़ा की अध्यक्षता में समिति भी गठित की गई थी, लेकिन निवेशक अब भी अपने पैसों के लिए परेशान हैं।

पैसा डबल करने का लालच

एआईएसओ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एलएम पांडे बताते हैं कि पीएसीएल मप्र-छग के 47 लाख निवेशकों का करीब 1300 करोड़ रुपए हड़पकर बैठी है। बाकी तीन दर्जन अन्य कंपनियों ने दोनों राज्यों के 35 लाख लोगों के 12 सौ से 13 सौ करोड़ रुपए प्रलोभन देकर झटक लिए हैं। भोपाल संभाग के जिलों से ही करीब ढाई लाख निवेशकों का पैसा ये चिटफंड कंपनियां लेकर बैठ गईं, जबकि कुछ फरार हैं। उन्होंने बताया कि पूरे देश से 5 करोड़ 86 लाख निवेशकों को ठगा गया। चिटफंड कंपनियों ने अपने एजेंट तैनात कर छोटे-छोटे निवेशकों से सप्ताह, मासिक, त्रैमासिक, छमाही अथवा एक साल की किस्तों में पैसा वसूल किया और लौटाने के नाम पर ठेंगा दिखा दिया।

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने भी निवेशकों के हक में कंपनी बंद कर पैसा दिलाने का निर्णय भी दिया, लेकिन अमल नहीं हो पाया। ‘सेबी’ ने पीएसीएल द्वारा खरीदी गईं जमीनों की रजिस्ट्री भी जब्त की हैं।

हरकत में आया पुलिस मुख्यालय

मप्र में चिटफंड के गोरखधंधे की जांच के लिए दिग्विजय सिंह द्वारा मुख्यमंत्री को लिखे पत्र से पुलिस मुख्यालय एकाएक हरकत में आ गया है। को-ऑपरेटिव फ्रॉड शाखा के मुखिया अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक राजेंद्र मिश्रा ने मामले में जांच शुरू करने की पुष्टि की है। दिग्विजय ने लाखों निवेशकों के पैसे हड़पने वाली कंपनियों के खिलाफ जांच और उनकी संपत्ति बेचकर निवेशकों के पैसे चुकाने का सुझाव दिया है। छग की तर्ज पर ऑनलाइन शिकायत निवारण पोर्टल बनाने को भी कहा है।