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उप चुनाव से पहले महागठबंधन में मचा घमासान, RJD के खिलाफ मांझी ने उतारा प्रत्याशी

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बिहार में 2019 के लोकसभा चुनावों के दौरान बना महागठबंधन (जीए) पूरी तरह से समाप्त हो गया है। ऐसा लगता है कि चुनावों में मिली हार के बाद भी ‘महागठबंधन’ के घटकों ने सबक नहीं लिया है। लोकसभा की एक और विधानसभा की पांच सीटों पर होने वाले उप चुनाव में महागठबंधन में नए समीकरण बनने शुरू हो गए हैं। महागठबंधन के कई पार्टियां एक दूसरे के खिलाफ अपने-अपने प्रत्याशी उतार रही हैं। बिहार विधानसभा की 5 सीटों पर 21 सितंबर को उपचुनाव होना है।

जीतनराम मांझी ने बगावत कर दी है

दरअसल हाल ही में नाथनगर से राजद की प्रत्याशी राबिया खातून को उम्मीदवार बनाए जाने के घोषणा हुई। जिसके बाद हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा सेक्युलर के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी ने बगावत कर दी है। जीतनराम ने नाथनगर से अजय कुमार राय की उम्मीदवारी देने का ऐलान कर दिया है। बेलहर सीट पर भी आरजेडी ने रामदेव यादव के नाम की घोषणा कर दी है। आरजेडी ने सिमरी बख्तियारपुर से जफर आलम को भी उम्मीदवार बनाने का फैसला कर लिया है। घरौंदा सीट पर भी आरजेडी अपना उम्मीदवार उतारेगी। महागठबंधन के घटक दलों में सीटों को लेकर सामूहिक रूप से अभी बात नहीं हो पाई।

2020 के बिहार विधानसभा चुनाव का सेमीफाइनल है ये उपचुनाव

इस उपचुनाव को 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव से पहले का सेमीफाइनल माना जा रहा है। उपचुनाव के नतीजे बताएंगे कि क्या मोदी का करिश्मा बरकरार है या जमीन पर स्थिति बदल गई है क्योंकि इस साल मई में बिहार में 40 लोकसभा सीटों में से 39 पर एनडीए की जीत हुई थी। किशनगंज सीट पर कांग्रेस के प्रत्याशी के लड़ने की संभावना है। क्योंकि,इस सीट मौजूदा एमएलए एमडी जावेद किशनगंज से लोकसभा सदस्य बन गए हैं।

सीटों के लेकर फंसा पेंच

वही समस्तीपुर लोकसभा सीट पर भी उपचुनाव होने हैं और वहां भी कांग्रेस अपना उम्मीदवार उतारेगी। क्योंकि उसके उम्मीदवार अशोक राम 2019 के संसदीय चुनावों में उपविजेता थे। वर्तमान में घटक दलों से उठ रहे स्वर से लग रहा है कि पेच फंसेगा। कम से कम नाथनगर और सिमरी बख्तियरपुर दो सीट पर तीनों दलों की दावेदारी से पेच सुलझाना आसान नहीं होगा। राजद इन दो सीटों को छोड़ विधान सभी की शेष बची सभी चार सीटों पर अपना उम्मीदवार देना चाहता है।