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पांच देशों के रेगिस्तान में वैज्ञानिक सौर ऊर्जा और खारे पानी से उगा रहे फल-सब्जियां…

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 ब्रिटेन की कंपनी ग्रीनहाउस सीवाटर ग्रीनहाउस के वैज्ञानिकों ने रेगिस्तान में समुद्र के खारे पानी और सौर ऊर्जा से फल, खीरा व टमाटर जैसी सब्जियां उगाने की तकनीक विकसित की है। इस कंपनी ने ऑस्ट्रेलिया, आबूधाबी, सोमालीलैंड,  ओमान और टेनेराइफ जैसे सूखे और रेगिस्तानी इलाकों में यह परियोजना शुरू की है।

इन इलाकों में अत्यंत गर्म वातावरण के बावजूद इस तकनीक से यहां हजारों किलो फल व सब्जियां उगाई जा सकी हैं। इसके लिए मोटे गत्ते से खास तरह के कूलिंग हाउस बनाकर खेती की गई।

गत्ते गार्डन को कूल और नमीयुक्त रखता है
सामान्यत: शीशे से बने ग्रीन हाउस को इस तरह से डिजायन किया जाता है कि वह गार्डन को नम और गर्म रखता है, लेकिन गत्ते से बने इन कूलिंग हाउस का इस्तेमाल गार्डन को नम और ठंडा रखने के लिए किया गया। इन्हें इस तरह से बनाया गया कि जब गीले गत्ते के पैनलों पर बाहर से गर्म हवा पड़े तो वाष्पीकरण की वजह से भीतर का तापमान कम हो जाए।

इन पैनलों को गीला करने के लिए सोलर पंप लगाए गए जो इन पर ऊपर से खारा पानी छिड़कते रहते हैं। यह पानी गत्ते की दीवारों से होता हुआ वाष्पित हो जाता है। इस वाष्पीकरण से ठंडक पैदा करने की तकनीक ने रेगिस्तान में खेती के लिए आदर्श वातावरण निर्मित कर दिया।

गत्ते पर जमा नमक बेचने के काम आता
समुद्र का खारा पानी बार-बार इन गत्ते की दीवारों से गुजरने की वजह से इनकी बाहरी दीवारों पर नमक जमा हो जाता है। यह नमक गत्ते को तो मजबूत बनाता ही है, साथ ही इस नमक का इस्तेमाल व्यावसायिक तौर पर भी किया जा सकता है।

2000 हेक्टेयर में खेती कर 40 लाख का पेट भर सकते हैं
वाटर ग्रीनहाउस के संस्थापक चार्ली पैटन बताते हैं कि सोमालीलैंड की करीब 40 लाख जनसंख्या का पेट भरने के लिए सिर्फ 2000 हेक्टेयर में ऐसी खेती करने की जरूरत है। सोमालीलैंड में प्रोजेक्ट पूरा करने के बाद अब वहां पर इस खेती से हर साल करीब 750 टन टमाटर पैदा हो रहे हैं। पैटन कहते हैं कि दुनिया के और सूखे इलाकों में वह इस तरह के प्रोजेक्ट शुरू करने को लेकर उत्साहित हैं।