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छत्तीसगढ़ : चोरी करने वाले तभी पकड़े जाएंगे, जब आप होंगे कलेक्टर

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बेमेतरा कलेक्टर शिखा राजपूत तिवारी के शांतिनगर स्थित सरकारी बंगले में चोरी करने वाले दो शातिर चोरों को पुलिस चार दिन के भीतर पकड़कर चोरी गए सात लाख से अधिक के जेवर बरामद करने में जरूर सफल रही है, लेकिन राजधानी में पिछले एक महीने के भीतर हुई 20 से अधिक चोरियों का खुलासा अभी तक नहीं होने से पुलिस की तत्परता पर सवाल खड़े हो गए हैं। यही नहीं, शहर की लचर पुलिसिंग को लेकर चर्चा होने लगी है। लोग यह कहने से नहीं चूक रहे कि चोरी करने वाले तभी पकड़े जाएंगे, जब आप कलेक्टर होंगे। दरअसल सालों से राजधानी पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल यह उठते रहे हैं कि जब-जब आइएएस, आइपीएस, कारोबारी, बिल्डर, नेता या रसूखदार के घर किसी तरह की वारदात होती है, तब-तब पुलिस की कार्यप्रणाली बदल जाती है।

पुलिस के बड़े से छोटे अफसर जी-जान से पूरे अमले को लगाकर वारदात को अंजाम देने वालों को पकड़ने के लिए दिन-रात एक कर देते हैं, लेकिन जब आम शहरी के घर कोई वारदात होती है तो वहां तत्काल पहुंचना तो दूर की बात, ध्यान तक नहीं देते हैं। ऐसे कई मामलों में पुलिस का रवैया जगजाहिर हो चुका है।

दिवाली की रात कलेक्टर बंगले से लाखों के जेवर उड़ाने वाले वन विभाग के दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी अखिलेश बंगोलिया को पकड़ने के लिए पुलिस अमला रात-दिन लगा रहा। अखिलेश को जब इस बात की भनक लग गई कि उसका साथी ओमप्रकाश यादव पुलिस की गिरफ्त में आ चुका है, तब वह पुलिस से बचने गुरुवार रात को अपनी गर्लफ्रेंड के साथ कोलकाता की नियमित फ्लाइट में सवार हो गया। यहां से प्लेन के उड़ते ही पुलिस अफसरों को जानकारी हुई, तब आनन-फानन में कोलकाता में पदस्थ बैचमेट पुलिस कमिश्नर से फोन पर बात कर अखिलेश की तस्वीर वॉट्सएप पर भेजकर एयरपोर्ट पर ही दबोचने कहा। जिस तत्परता से कोलकाता पुलिस की टीम ने एयरपोर्ट पर घेराबंदी कर अखिलेश को उसके गर्लफ्रेंड के साथ दबोचा। सवाल यह उठने लगा है कि ऐसी तत्परता पुलिस अफसर अन्य चोरी की वारदात को अंजाम देने वालों को पकड़ने में क्यों नहीं दिखाते?

हर साल दर्जनों मामलों का खात्मा

पुलिस हर साल ऐसे दर्जनों चोरी के मामलों का खात्मा कर देती है, जिनका खुलासा तीन महीने के भीतर नहीं हो पाता। इसी साल दस से अधिक चोरी के केस के आरोपितों का पता नहीं चलने पर पुलिस ने खात्मा का प्रकरण कोर्ट में पेश किया है।

इन मामलों का खुलासा करने में फेल

चार अक्टूबर की रात पुरानी बस्ती थाना क्षेत्र के डबरीपारा निवासी चाय नाश्ता का ठेला लगाकर परिवार का पेट पालने वाली उषा यादव के घर में चोरों ने धावा बोलकर नकदी 50 हजार रुपये पार कर दिया जबकि जेवरों को हाथ तक नहीं लगाया। घटना के दौरान उषा यादव परिवार समेत दुर्गा पंडाल देखने गई थी। रात दो बजे सभी वापस लौटकर सो गए। दूसरे दिन सुबह आलमारी का लॉकर टूटा पाया और उसमें रखा 50 हजार रुपये गायब थे।

– ब्राह्मणपारा निवासी मनीष सोनी (38) की सत्तीबाजार में सोनी मेटल नाम से दुकान और घर है। घर में पिछले दो महीने से झाड़ू-पोछा लगाने का काम जोया साहू कर रही थी। 13 अक्टूबर की दोपहर दो बजे वह आलमारी से करीब 80 हजार रुपये चुराकर फरार हो गई। अब तक नौकरानी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है।

– 13 अक्टूबर को दिनदहाड़े माना कैंप क्षेत्र के धरमपुरा निवासी इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में अटेंडेटर अशोक साहू के सूने घर में चोरों ने धावा बोलकर नकदी 13 हजार रुपये समेत एक लाख के जेवर पार कर दिया। रविवार को अवकाश होने पर अशोक गांव में ही था। पत्नी फुंडहर गार्डन में काम करके शाम पांच बजे वापस लौट गई थी। दरवाजा खोलकर घर के भीतर गई तो देखा कि आलमारी का लॉकर टूटा और भीतर रखा जेवर समेत नकदी गायब थी। चोरों ने एटीएम कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, पैनकार्ड, ऋण पुस्तिका, पासबुक आदि गायब था।

-18-19 अक्टूबर की रात पंडरी के कांपा इलाके में पान मसाला दुकान से नकदी 22 हजार रुपये समेत 50 हजार का सामान और खरोरा में एक सूने मकान से नकदी साढ़े छह लाख रुपये और जेवर चोरी करने वाले अब तक पकड़े नहीं जा सके। चोरों ने पंडरी थाने के सामने रूपेश असाटी की फर्नीचर और उससे लगे संजयचंद्र सेन की जूते की दुकान का ताला तोड़कर चोर नकदी, जूता उड़ा ले गए थे। आसपास के लोगों ने दो दुकानों के ताले टूटे देखकर दुकान संचालक को जानकारी दी। पुलिस मौके पर जरूर पहुंची, लेकिन चोरों का कोई सुराग नहीं मिल पाया।

चोरी के सभी मामलों की जांच चल रही है। चोर पकड़े भी जा रहे हैं। कुछ मामलों में जरूर असफलता मिली है। ऐसा नहीं है कि केवल अफसरों और रसूखदारों के यहां घटी वारदात की जांच पर विशेष ध्यान दिया जाता है।-प्रफुल्ल ठाकुर, एएसपी सिटी