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छत्तीसगढ़ : WHO ने नमूना जुटाने के तरीके पर उठाए सवाल, कहा- तरीका बदलो

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विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी डब्ल्यूएचओ की 15 सदस्यीय टीम मंगलवार को सुबह से शाम तक विभिन्न सेंटरों में पहुंच कर जांच करती रही। उसे कालीबाड़ी क्षय रोग सेंटर, आंबेडकर अस्पताल के डॉट्स सेंटर, सीबीएनएएटी लैब में काफी खामियां मिलीं। टीम के सदस्य खामियों पर जमकर भड़के और तल्ख लहजे में कामकाज सुधारने की बात कही। उन्होंने कहा कि टीबी आदि के नमूने जुटाने के तरीके बदलो। हम आपको बारी-बारी से उन सेंटरों पर ले चलते हैं, जहां जांच टीम आज पहुंची।

जब सकपका गए क्षय अधिकारी

मंगलवार का दिन और सुबह 9.42बजे का समय। विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी डब्ल्यूएचओ की 15 सदस्यीय टीम जांच के लिए राजधानी के कालीबाड़ी क्षय रोग सेंटर में पहुंच गई। टीम को जिला क्षय अधिकारी प्रोजेक्टर के माध्यम से टीबी के मरीजों और लक्ष्य के अनुरूप किस तरह इनका इलाज किया गया, प्रभावित इलाकों के मैप और डाटा दिखाने लगे। इसके बाद फिर क्या! उनके एक-एक आंकड़ों के लिहाज से टीम के सदस्यों ने सवालों की झड़ी लगा दी।

टीम मरीजों को खोजने के साथ ही जांच की प्रक्रिया समझने के लिए दनादन सवाल दागने लगी तो जिला क्षय अधिकारी ने चुप्पी साध ली, सकपकाने लगे। इसके बाद अन्य कर्मचारी और संचालनालय के अधिकारी टीम को समझाने की कोशिश में जुट गए। लेकिन टीम नाखुश दिखी। सदस्यों ने कहा- आप लोगों को अभी नमूनों की जांच और मरीजों के रिकार्ड तक रखने का सिस्टम ही नहीं मालूम। ले-देकर किसी तरह स्थिति संभली। इस सेंटर की जांच करने के बाद टीम दो हिस्सों में बंट गई। यहीं से बंट गई। टीम शहर में अलग-अलग निरीक्षण करने के लिए निकल पड़ी।

आंबेडकर अस्पताल के डॉट्स सेंटर में रिकार्ड नहीं मिले अपडेट

दोपहर के साढ़े 12 बज गए हैं। अब हम आपको ले चलते हैं आंबेडकर अस्पताल के डॉट्स सेंटर में। यहां के कामकाज और लैब में मरीजों के रिकार्ड की टीम जानकारी लेने लगी। जिम्मेदार लोग गोलमाल जवाब देने लगे तो टीम के सदस्य खफा हो गए। तल्ख अंदाज में एक-एक रजिस्टर को खंगलाने लगे। पूछा- जिन मरीजों की आपने जांच की है, उनके पॉजीटिव पाए जाने पर आपने कितनी रिपोर्ट जिला क्षय कार्यालय भेजी? सेंटर का जवाब था- कर्मचारी आता है, ले जाता है। लेकिन रिकार्ड नहीं बना पाए हैं। इस पर टीम ने सेंटर प्रभारी को समझाया- टीवी और एड्स के मरीजों के इलाज और उनके ठीक होने तक की रिपोर्ट आप को रखनी है। इन गाइड लाइन पर काम करने की ट्रेनिंग क्यों नहीं दी गई? एड्स की जांच में जो पॉजीटिव मिले, उन्हें रेफर कहां किया गया, यह भी नहीं है।

सीबीएनएएटी लैब में मानक की उड़ीं धज्जियां

टीम दोपहर 1. 45 बजे आंबेडकर अस्पताल स्थित सीबीएनएएटी लैब यानी काटेज बेस्ट न्यूक्लीनियन एसिड एम्प्लीफिकेशन टेस्टिंग सेंटर में पहुंची। यहां उसने मुफ्त इलाज और जांच का निरीक्षण किया। यहां भी टीम के सदस्य भड़के, क्योंकि रिकार्ड का सही लेखा-जोखा नहीं पाया गया। वहीं नमूनों को फ्रीजर में रखने के तरीके पर भी आपत्ति जताई। टीम के सदस्य बोले- नमूनों में एरर आने पर दोबारा भी जांच करने के लिए उसे फ्रीजर में रखें। यहां तो किट और जांच के कुछ स्टूमेंट खराब थे। जिस पर पूछा, क्या इसकी सूचना दी थी। वे बोले- जी हां, दी थी। अफसोस जताकर ही टीम के सदस्य रह गए।

जेल सेंटर की खामी पर बिफरे, यहां भी नहीं मिला सही जवाब

साढ़े तीन बजे जांच टीम सेंट्रल जेल पहुंची। वहां उसने आने वाले कैदियों की नियमित टीबी और एड्स की जांच के तरीके पर नाराजगी जताई। कहा कि पीड़ित कैदियों के छूटने के बाद भी उनके ठीक होने तक मॉनिटरिंग होनी चाहिए, लेकिन आप लोग सिर्फ यहीं नमूने की जांच की, लेकिन उसे डाट्स में ही अपडेट नहीं किए। यहां स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी उनके सवालों के जवाब नहीं दे पा रहे थे। काम करने के तरीकों को अपडेट करिए, तब सब कुछ ठीक होगा।

गुढ़ियारी सेंटर में मितानिनों से बांटा अनुभव

शाम चार बजे जांच टीम गुढ़ियारी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंची। वहां उसने टीबी, एड्स और कुष्ठ रोगों की जांच, इलाज के तरीके जाने। यहां भी प्रभारी को काम को बेहतर बनाने के टिप्स दिए। इसके बाद वहां शहर की मितानिनों से सवाल पूछे, जहां वे बड़ी बेकाकी से बोलीं। जांच के बाद अगर मरीज नहीं आता है तो उनके घर जाकर दवाएं देती हैं। टीबी के मरीजों का बराबर फॉलो करती हैं। उनके काम के तरीके पर टीम के सदस्यों ने हौसला अफजाई की। अंत में सभी ने ताली बजाकर टीम को विदाई दी।

आज यहां जाएगी डब्ल्यूएचओ की टीम

साढ़े दस बजे क्षय रोग सेंटर, डिस्ट्रिक अस्पताल,आयुर्वेदिक कॉलेज,तेलीबांधा मरीजों से मिलेंगे। टीम दो हिस्सों में होकर निरीक्षण करेगी। टीम एचआईवी, टीबी के संचालित आईसीटीसी, पीपीटीसीटी व एआरटी, एसटीआई केंद्रों की जांच करेगी।

–19 हजार 800 जांच में एक माह में चार हजार 648 मरीज मिले

–12 हजार से अधिक मरीज एड्स के अभी तक दज है

–प्रदेशभर में 124 आईसीटीसी एड्स जांच के सेंटर