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अब नेपाल बना भारत का दुश्मन, इस इलाके को अपना बताकर कर दिया ऐसा काम…

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पाकिस्तान के बाद अब नेपाल भी भारत से दुश्मनी मोल लेने की ओर अग्रसर हो रहा है। नेपाल ने जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन के बाद जारी किए गए भारत के नए राजनीतिक नक्शे में सीमाओं को लेकर विरोध किया है। इसी के तहत नेपाल ने कालापानी इलाके को अपना बताते हुए सुप्रीम कोर्ट में दावा ठोंका है और कहा है कि भारत ने हमारे इलाके को अपना बताकर नए नक्शे में बदलाव किया है।

आपको बता दें कि भारत में नेपाल के राजदूत नीलांबर आचार्य ने कहा था कि नेपाल कालापानी समेत सीमा से जुड़े तमाम मुद्दे सुलझाने के लिए विदेश सचिव स्तरीय व्यवस्था बनाना चाहता है। उन्होंने यह भी कहा था कि रिश्तों में दरार पड़ने से रोकने के लिए कालापानी मुद्दे को सुलझाना जरूरी है।

इसके साथ नेपाल के सुप्रीम कोर्ट ने 15 दिनों के अंदर देश के दो वास्तविक नक्शे उपलब्ध कराने को कहा है। एक नक्शा 1816 में सुगौली समझौते के वक्त और दूसरा नक्शा 1960 में सीमा संधि पर दस्तखत के वक्त भारत के साथ आदान-प्रदान हुआ था। एक वरिष्ठ वकील की ओर से दायर एक याचिका में सुप्रीम कोर्ट से मांग की गई थी कि वह नेपाल सरकार को नेपाली भूभाग के संरक्षण के लिए राजनीतिक और कूटनीतिक प्रयास शुरू करने का आदेश दे। इसी याचिका की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने नेपाल सरकार से 1816 का नक्शा मांग लिया। दरअसल, ईस्ट-इंडिया कंपनी ने 1 फरवरी, 1827 को एक नक्शा प्रकाशित किया था। बाद में ब्रिटिश सरकार ने भी 1847 में एक अलग नक्शा प्रकाशित किया था।

आपको बता दें कि कालापानी वहां पर स्थित है जहां चीन, नेपाल और भारत की सीमा मिलती है। वह 372 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र है। भारत इसे उत्तराखंड का हिस्सा मानता है जबकि नेपाल इसे अपना मानता है। कालापानी इलाके का लिपुलेख दर्रा चीनी गतिविधियों पर नजर रखने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। 1962 से ही कालापानी पर भारत की इंडो-तिब्बतन बॉर्डर पुलिस की पहरेदारी है।