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अफसरों को सबक सिखाने की बनी रणनीति, परमबीर सिंह और रश्मि शुक्ला के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की तैयारी

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मुंबई
महाराष्‍ट्र की महाविकास आघाड़ी सरकार को मुश्किल में डालने वाले दो वरिष्ठ आईपीएस अफसरों परमबीर सिंह और रश्मि शुक्ला के खिलाफ अनुशासनात्मक कानूनी कार्रवाई की तैयारी शुरू हो गई है। बुधवार को राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में इस पर औपचारिक चर्चा हुई। इसके बाद मुख्यमंत्री के सरकारी निवास वर्षा पर भी एक महत्वपूर्ण बैठक महा विकास आघाड़ी के नेताओं की हुई। जिसमें तीनों दलों के नेताओं ने अवैध ढंग से की गई फोन टैपिंग को गैरकानूनी बताते हुए आईपीएस अधिकारी रश्मि शुक्ला के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की।

मुख्यमंत्री के सरकारी आवास पर हुई बैठक में एनसीपी की तरफ से उप मुख्यमंत्री अजित पवार, जयंत पाटील, अनिल देशमुख, दिलीप वलसे-पाटील, छगन भुजबल, जितेंद्र आव्हाड, कांग्रेस की तरफ से बालासाहेब थोराट, अशोक चव्हाण, नाना पटोले, शिवसेना की तरफ से दादा भुसे, एकनाथ शिंदे, सुभाष देसाई, अनिल परब शामिल हुए। मंत्रियों की चर्चा के बाद राज्य के महाधिवक्ता आशुतोष कुंभकोणी को भी वर्षा पर बुलाया गया। महाधिवक्ता का इस बैठक में जाना ही इस बात का संकेत है कि सरकार इन अफसरों के खिलाफ अनुशासनात्मक कानूनी कार्रवाई की तैयारी कर रही है।

बता दें कि बुधवार को ही सुप्रीम कोर्ट ने आईपीएस अधिकारी परमवीर सिंह की याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया है और उन्हें हाई कोर्ट जाने की सलाह दी है। चर्चा है कि गृह मंत्री के खिलाफ दायर परमवीर सिंह की याचिका के संदर्भ में भी कानूनी राय ली जा रही है।

अनिल देशमुख पर भी चर्चा
तीनों दलों के महत्वपूर्ण नेताओं की बैठक में गृह मंत्री अनिल देशमुख को लेकर भी चर्चा हुई है। खबर है कि एनसीपी ने इस बैठक में जोरदार ढंग से अपनी बात रखी है और देशमुख पर आरोप साबित होने तक उन्हें मंत्रिमंडल से न हटाए जाने की वकालत की है।

मंत्रियों ने कहा- मुश्किल होगा काम करना
इधर, खबर है कि बुधवार को हुई मंत्रिमंडल की बैठक के समाप्त होने के बाद जब सारे अधिकारी कमरे से बाहर चले गए उसके बाद आघाड़ी सरकार के मंत्रियों ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के समक्ष फोन टैपिंग के मसले को लेकर अपनी भावनाएं व्यक्त की। कांग्रेस एनसीपी और शिवसेना तीनों ही पार्टियों के मंत्रियों का यह कहना था कि अगर अधिकारियों पर लगाम नहीं लगाई गई, तो सरकार के लिए काम करना मुश्किल हो जाएगा।

एनसीपी के मंत्री नवाब मलिक ने तो साफ-साफ कहा कि अधिकारियों की पहचान करने में कहीं न कहीं सरकार कम पड़ गई है। गृह मंत्री अनिल देशमुख ने मंत्रिमंडल को आश्वस्त किया कि उनके खिलाफ लगाए गए सभी आरोप झूठे हैं और पैसे का कोई लेन-देन नहीं हुआ है। मंत्रिमंडल की बैठक में सबसे ज्यादा आक्रामक एनसीपी नेता और गृह निर्माण मंत्री जितेंद्र आव्हाड थे।

रश्मि शुक्ला पर आव्हाड के गंभीर आरोप
गृह निर्माण मंत्री जितेंद्र आव्हाड ने आईपीएस अधिकारी रश्मि शुक्ला पर आरोप लगाया है कि उन्हें लोगों के फोन टेप करने की ‘बुरी आदत’ है। आव्हाड ने कहा कि किसी का भी फोन टेप करने के लिए कानून में निश्चित प्रावधान है, लेकिन रश्मि शुक्ला फोन टेप करने की परमिशन किसी और के नाम की लेती हैं और फोन किसी दूसरे का टेप करती हैं।
उन्होंने मंत्रिमंडल में मांग की कि इस मामले की गहराई तक जांच की जानी चाहिए और रश्मि शुक्ला के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। आव्हाड ने कहा कि किसी भी व्यक्ति का फोन टेप करने के लिए गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव स्तर के अधिकारी की अनुमति चाहिए होती है। क्या रश्मि शुक्ला ने यह अनुमति ली थी? इस सवाल का जवाब नहीं है क्योंकि राज्य के तत्कालीन अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) सीताराम कुंटे ने इससे इनकार किया है।

आव्हाड ने कहा कि हाल ही में एक ऐसा पत्र प्रकाश में आया है जिसमें रश्मि शुक्ला ने पिछली सरकार के कार्यकाल में भी कुछ फोन टैपिंग की थी। यह पत्र सामने आने के बाद रश्मि शुक्ला ने अपनी गलती मानी थी और माफी भी मांगी थी।