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आयुष मंत्री श्री कावरे ने सिक्ख गुरु अंगद देव जी के प्रकाशोत्सव की दी शुभकामनाएं

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हमारे प्रतिनिधि दीपेश मोहारे की रिपोर्ट


बालाघाट- आयुष मंत्री माननीय श्री रामकिशोर नानो कावरे ने सिक्खों के दूसरे धर्मगुरु, समाज सुधारक एवं देशभक्त गुरु अंगद देव जी के प्रकाशोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कहा है कि गुरू अंगद देव महाराज जी का सृजनात्मक व्यक्तित्व था। उनमें ऐसी अध्यात्मिक क्रियाशीलता थी जिससे पहले वे एक सच्चे सिख बनें और फिर एक महान गुरु। गुरू अंगद साहिब जी ने गुरु नानकदेव प्रदत्त पंजाबी लिपि के वर्णों में फेरबदल कर गुरूमुखी लिपि की एक वर्णमाला को प्रस्तुत किया। वह लिपि बहुत जल्द लोगों में लोकप्रिय हो गयी। उन्होने बच्चों की शिक्षा में विशेष रूचि ली। उन्होंने विद्यालय व साहित्य केन्द्रों की स्थापना की। नवयुवकों के लिए उन्होंने मल्ल-अखाड़ा की प्रथा शुरू की। जहां पर शारीरिक ही नहीं, अपितु आध्यात्मिक नैपुण्यता प्राप्त होती थी। उन्होने भाई बाला जी से गुरू नानक साहिब जी के जीवन के तथ्यों के बारे में जाना एवं गुरू नानक साहिब जी की जीवनी लिखी। उन्होने 63 श्लोकों की रचना की, जो कि गुरू ग्रन्थ साहिब जी में अंकित हैं। उन्होने गुरू नानक साहिब जी द्वारा चलायी गयी ‘गुरू का लंगर’ की प्रथा को सशक्त तथा प्रभावी बनाया। गुरू अंगद साहिब जी ने गुरू नानक साहिब जी द्वारा स्थापित सभी महत्वपूर्ण स्थानों एवं केन्द्रों का दौरा किया एवं सिख धर्म के प्रवचन सुनाये। उन्होने सैकड़ों नयी संगतों को स्थापित किया और इस प्रकार सिख धर्म के आधार को बल दिया। मंत्री श्री कावरे ने कहा कि आपका आदर्श जीवन और ओजस्वी वाणी से उपजा प्रकाश सर्वदा मानवता के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करता रहेगा।