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हमने अपना वादा निभाया, अब सरकार की बारी – अशोक कुर्रेढाई महीने के हड़ताल के बाद भी राज्य में मनरेगा के लक्ष्य पूर्ण परंतु वेतन एवं मांग लंबितमनरेगा कर्मचारियों पर लगे थे ग्रामीण मजदूरों को काम नहीं देने का आरोप

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रायपुर छत्तीसगढ़ मनरेगा कर्मचारी महासंघ के प्रांताध्यक्ष अशोक कुर्रे ने कहा कि हड़ताल के दौरान मनरेगा कर्मचारियों पर मनरेगा के काम बंद कर ग्रामीण मजदूरों को रोजगार उपलब्ध नहीं कराने के आरोप पर हमने कहा था कि हम छत्तीसगढ़ के मजदूरों को उनके है का रोजगार हर हाल में उपलब्ध कराएंगे और राज्य को प्राप्त बजट के लक्ष्य को शत प्रतिशत पूरा करेंगे। 22 मार्च वह दिन है जिस दिन मनरेगा कर्मचारियों की कड़ी मेहनत, दृढ़ इच्छा शक्ति और आपसी तालमेल और एकता के दम पर हमने ढाई माह के हड़ताल के बाद भी 6 महीने के अल्प अंतराल में वर्ष भर का लक्ष्य पूर्ण कर लिया है। अब सरकार की बारी है कि वह अपना वादा पूरा करें। राज्य को केंद्र से वर्ष 2022-23 के लिए श्रमिक बजट में 12 करोड़ मानव दिवस सृजित करने के लक्ष्य मिले थे। छत्तीसगढ़ मनरेगा कर्मचारी महासंघ के प्रांतीय सचिव श्री अजय सिंह क्षत्री ने कहा कि शासन द्वारा वर्ष 2022-23 हेतु छत्तीसगढ़ के लिये निर्धारित श्रमिक बजट को अल्प समय में दिन-रात 24 घंटो की कड़ी मेहनत उपरांत हासिल करते हुए गरीब एवं असहाय मजदूर वर्ग को आजीविका निर्वहन एवं जीवन यापन हेतु मनरेगा योजनांतर्गत कार्य प्रदाय करते हुए हमने सभी वर्गों को संतुष्ट किया है। परंतु फिर भी शासन द्वारा हमारी हड़ताल अवधि का वेतन भुगतान एवं मांगों को समय पर न पूरा किया जाना बहुत ही दुःखद एवं कर्मचारी वर्ग के साथ-साथ गा्रमीण वर्ग के गरीब तबके के किसान व श्रमिकों के लिये भी एक असहनीय पीड़ा साबित न हो जाये। इसके बाद कहीं छत्तीसगढ़ मनरेगा कर्मचारी महासंघ पुनः अपने हड़ताल अवधि के लंबित वेतन एवं मांगों को लेकर पुनः हड़ताल की ओर अग्रसर होती है तो ग्रामीण मजदूर एवं किसानों को होने वाले आगामी क्षति के लिए स्वयं शासन/प्रशासन उत्तरदायी होगा। और उसका असर इस वर्ष 2023 में होने वाले विधानसभा एवं वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव पर भी स्पष्ट पड़ता नजर आ रहा है।वैसे भी 31 मार्च 2023 तक यदि मनरेगा कर्मियों का वेतन भुगतान नहीं किया जाता है तो उक्त वेतन की राशि स्वतः लेप्स हो जावेगी जिसका नुकसान शासन एवं कर्मचारी वर्ग दोनो को होगा।छत्तीसगढ़ मनरेगा कर्मचारी महासंघ के कार्यकारी प्रांताध्यक्ष श्री राधेश्याम कुर्रे ने कहा कि विगत एक साल से हम निरंतर संघर्ष करते आ रहे है, माननीय मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की सरकार के वादे अनुसार नियमितिकरण हमारी प्रमुख मांग है। इसके अलावा रोजगार सहायक एवं कर्मचारियों का अल्प वेतनमान और अनियमित रूप से वेतन भुगतान साथ ही 4 साल से वेतन नहीं बढ़ना ये आम समस्या बनी हुई है। जिसके कारण हमें मजबूरन हड़ताल में जाना पड़ा उसके बाद भी हमारी मांगों को संवेदनशीलता पूर्वक विचार नहीं किया गया है। वर्तमान में हमारी मांगे तो दूर हमारे हड़ताल अवधि का भुगतान भी नहीं किया गया है। हम छत्तीसगढ़ के संवेदनशील मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल से निवेदन करते है कि हमारी अपने नियमितिकरण के वादे को पूरा कर समस्त मनरेगा कर्मचारियों को नवरात्रि का उपहार दे।