Home समाचार अधिकारी मेहरबान, फार्म जमा किए बिना 3 छात्रों को दिलाई परीक्षा

अधिकारी मेहरबान, फार्म जमा किए बिना 3 छात्रों को दिलाई परीक्षा

IMG-20251011-WA0045
IMG-20250614-WA0035
IMG-20250614-WA0034
IMG-20250614-WA0033
IMG-20250614-WA0032
IMG-20250614-WA0030
IMG-20250614-WA0031
IMG-20250614-WA0029
IMG-20250614-WA0028

IMG-20240704-WA0019
IMG-20220701-WA0004
WhatsApp-Image-2022-08-01-at-12.15.40-PM
1658178730682
WhatsApp-Image-2024-08-18-at-1.51.50-PM

बिलासपुर। प्रायोगिक परीक्षा की तिथि समाप्त होने पर कई छात्रों को परीक्षा से वंचित करने वाले अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय परीक्षा विभाग अचानक बीकॉम प्रथम वर्ष के तीन छात्रों पर मेहरबान हो गया। सत्र 2018-19 मुख्य परीक्षा का फार्म जमा नहीं करने के बावजूद सीधे उनके हाथों में प्रश्नपत्र थमा दिया। वीआईपी ट्रीटमेंट को लेकर अब अन्य छात्रों में जबरदस्त आक्रोश है।

अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय की परीक्षा में गड़बड़ी का सिलसिला तमाम दावों के बाद भी जारी है। ताजा मामला सीएमडी कॉलेज परीक्षा केंद्र का है। यहां के बीकॉम के तीन नियमित छात्रों ने परीक्षा फार्म ही जमा नहीं किया। परीक्षा शुरू होने पर छात्र नेताओं का सहारा लेकर दौड़ते-भागते दिखे। 5 मार्च को हिंदी विषय के पेपर देने सीधे केंद्र पहुंच गए। केंद्राध्यक्ष एचएल अग्रवाल को शामिल करने दबाव बनाया। उन्होंने साफ कह दिया कि बिना परीक्षा विभाग की अनुमति के उन्हें शामिल नहीं करेंगे।

छात्रों ने परीक्षा नियंत्रक डॉ. प्रवीण पांडेय से संपर्क किया। इसके बाद तीनों को हिंदी विषय के पेपर तुरंत बैठने की मौखिक अनुमति दे दी गई। न कोई प्रश्नपत्र न कोई डाटा सीधे उत्तरपुस्तिका में लिखना शुरू कर दिया। बुधवार को छात्रों ने परीक्षा विभाग में फार्म भरने आवेदन किया। परीक्षा विभाग के इस वीआइवी ट्रीटमेंट को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। रायगढ़, जशपुर, कोरबा, जांजगीर-चांपा, पेंड्रारोड, मुंगेली सहित शहर व आसपास के सैकड़ों उन छात्रों का कहना है कि सालभर छोटी-छोटी समस्या को लेकर अधिकारी घंटों बिठाकर रखते हैं। प्रायोगिक परीक्षा के लिए भी पिछले साल मौका नहीं दिया गया। डीएलएस कॉलेज के स्टूडेंट को न्यायालय की शरण में तक जाना पड़ा। इसके बाद प्रायोगिक परीक्षा कराई गई। अब अचानक तीन छात्रों के लिए इतनी मेहरबानी वह भी बिना परीक्षा फार्म, फीस कुछ भी जमा नहीं है।

इन छात्रों को स्पेशल सुविधा

परीक्षा में शामिल करने वाले छात्रों में ए. लवन्या, धनंजय कुमार और ए. दास का नाम सामने आ रहा है। यह भी पता चला है कि इन छात्रों ने 75 फीसदी उपस्थिति का लक्ष्य भी पूरा नहीं किया है। छात्रों ने स्टूडेंट लीडर्स के साथ मिलकर कॉलेज व विश्वविद्यालय के अधिकारियों से साठगांठ किया है। इसके बाद उनके पास बड़े नेताओं के फोन भी आए।

छात्रहित में दोहरा मापदंड

परीक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारी यह साफ कह रहे हैं कि नियमित छात्र होने के कारण उन्हें विशेष अनुमति प्रदान की गई है, ताकि सालभर की पढ़ाई बर्बाद न हो। जबकि नौकरीपेशा, गृहणी या अन्य स्वाध्यायी छात्रों द्वारा मेडिकल देने के बाद भी उन्हें परीक्षा फार्म भरने नहीं दिया गया। जबकि प्रायोगिक परीक्षा में भी अगर किसी कॉलेज में चूक गए तो दोबारा मौका नामुकिन है।

इनका कहना है

सीएमडी के तीनों छात्र नियमित स्टूडेंट हैं। उन्होंने तबीयत खराब होने का कारण बताया है। इसके बाद उन्हें कुलपति की अनुशंसा पर मौका दिया गया है। छात्रहित का काम है। इसमें दिक्कत की कोई बात नहीं है- डॉ.प्रवीण पांडेय, परीक्षा नियंत्रक, अटल बिहारी वाजपेयी विवि

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here