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जम्मू कश्मीर में विधानसभा चुनाव टालने पर फारूक अब्दुल्ला ने खड़े किए सवाल

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ई दिल्ली। जैसे ही चुनाव आयोग ने रविवार को लोकसभा चुनाव 2019 के लिए तारीखों का ऐलान किया जम्मू और कश्मीर में राजनीति गर्म हो गई है क्योंकि इलेक्शन कमिशन ने यहां पर केवल आम चुनाव कराने का ऐलान किया है। जबकि यहां पर पहले से ही राष्ट्रपति शासन लगा हुआ है। चुनाव आयोग के राज्य में विधानसभा चुनाव फिलहाल न कराने के फैसले पर जम्मू-कश्मीर के नेताओं ने मोदी सरकार पर निशाना साधा है।

विपक्षी नेताओं का आरोप जम्मू-कश्मीर में चुनाव न कराने सरकार की विफलता

कई पार्टियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर यह कहते हुए निशाना साधा है कि चुनाव आयोग का फैसला मोदी सरकार की कश्मीर नीति की विफलता का प्रतिबिंब है। कांग्रेस, नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी ने लोकसभा या संसदीय चुनावों के साथ-साथ विधानसभा चुनाव नहीं कराने के फैसले पर कड़ी आपत्ति जाहिर की है। जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने राज्य में आम चुनाव के साथ विधानसभा चुनाव नहीं कराने के चुनाव आयोग के फैसले पर कहा कि सभी दल एक साथ चुनाव कराने के पक्ष में हैं।

जम्मू-कश्मीर का माहौल चुनाव के लिए अनुकूल है

फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि वर्तमाना में जम्मू-कश्मीर का माहौल भी चुनावों के लिए अनुकूल है, इसके बाद भी विधानसभा चुनाव नहीं होगा। उन्होंने कहा कि स्थानीय निकाय के चुनाव शांति तरीके से हुए थे, पर्याप्त संख्या में सुरक्षा बल भी मौजूद थे, फिर लोकसभा चुनाव के साथ विधानसभा चुनाव क्यों नहीं हो सकते हैं? उन्होंने जोर देते हुए कहा कि राज्य में विधानसभा चुनाव होने चाहिए। उन्होंने कहा कि हमे एहसास था कि पाकिस्तान लड़ाई या तनाव होगा। यह सर्जिकल स्ट्राइक (हवाई हमला) इसलिए किया या क्योंकि चुनाव नजदीक आ रहे हैं। हमने करोड़ों रुपए का एक विमान खोया, शुक्र है कि पायलट बच गया और पाकिस्तान ने सम्मान के साथ लौटा दिया।

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