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छत्तीसगढ़ : बेटी टिकेश्वरी की बहादुरी का कारनामा देख मौत भी उल्टे पांव लौट गई

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 डौंडीलोहारा। कहते हैं हौसला हो तो मौत को भी उल्टे पांव लौटना ही पड़ता है। डौंडीलोहारा ब्लॉक के ग्राम बंजारी निवासी 18 वर्षीय बालिका टिकेश्वरी ने इसे प्रमाणित कर दिया। खरखरा बांध में नाव पलट जाने से पांच लोग डूब रहे थे। उसमें उसके पिता भी थे। चीख-पुकार सुनते ही टिकेश्वरी बिना एक पल गंवाए पीपे के नाव लेकर पानी में कूद गई। उसने पिता समेत दो और जिंदगियां तो बचा ली, लेकिन तब तक दो अन्य पानी में लापता हो गए थे। इस घटना के बाद एक ओर जहां अंचल में टिकेश्वरी की बहादुरी की जमकर प्रशंसा हो रही है, वहीं टिकेश्वरी बार-बार यही कहती है, काश उन दोनों की भी मदद कर पाती। बंजारी के बिसौहा राम निषाद मल्लाह हैं।

मछली पकड़ना और नौका विहार कराना उनकी रोजी-रोटी का जरिया है। रविवार शाम पिकनिक मनाने के लिए आए चार युवकों देवनाथ सोनकर, रिंकू साहू, परमिंदर सिंह व टिकेश्वर को नाव पर बैठाकर वे घाट से करीब 500 मीटर दूर गए थे कि एकाएक नाव पलट गई।

वहां करीब 25 फीट गहरा पानी था। सभी डूबने लगे। सभी मदद के लिए आवाज दे रहे थे। यह आवाज बांध के किनारे मछली पकड़ रही टिकेश्वरी के कानों में भी पहुंची। इस बहादुर बिटिया ने घाट पर रखे पीपे वाली नाव ली और पानी में उतर गई।

उनके पास पहुंचते ही नाव से पानी में कूद गई और एक-एक कर बिसौहा, टिकेश्वर और परमिंदर को किसी तरह नाव पर डाली, लेकिन दो अन्य युवक तब तक लापता हो गए थे। दोनों हाथों से नाव खेते हुए किनारे तक लाई। तब तक घाट पर कई अन्य लोग जुट गए थे। इस तरह तीनों की जान बच गई।

मौत से क्या डरना नवमीं तक शिक्षित टिकेश्वरी यह पूछने पर कि मौत से डर नहीं लगा, कहती है, ‘मौत से क्या डरना। वह तो सभी को आनी है। जिंदगी बचाने से जो खुशी मिली है, उससे बड़ी कोई चीज नहीं हो सकती।” बेटी ने चुकता कर दिया हिसाब बिसौहा कहते हैं कि मेरी बेटी का अस्तित्व मुझसे ही है। हर औलाद के जन्मदाता उसके माता-पिता होते हैं। लेकिन आज मेरी बेटी ने मुझे नई जिदंगी देकर हिसाब चुकता कर दिया है।

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