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बच्चे की जान बचाने को लोकोपायलट ने फुल-स्पीड से भगाई ट्रेन, पूरी कहानी जान आप भी करेंगे सलाम

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भारतीय रेल कई बार अपने टैगलाइन ‘लाइफलाइन ऑफ द नेशन’ से भी बेहतर काम कर जाती है. अमूमन लेटलतीफी और लचर व्यवस्‍थाओं को लेकर शिकायतों की मार झेलने वाली इंडियन रेलवे कभी-कभी ऐसा काम कर जाती है कि पूरा मामला जानने के बाद खुद ब खुद इंडियन रेलवे के प्रति आपके मन में सम्मान जग जाएगा. यह मामला एक साढ़े तीन साल के बच्चे की जान से जुड़ा हुआ है. इसमें ना केवल मुंबई-शिरडी पैसेंजर ट्रेन ने अपनी सीमाओं से आगे जाकर ट्रेन का परिचालन किया, बल्कि पूरे रेलवे स्टाफ ने जो फुर्ती दिखाई वह काबिले तारीफ है.

यह मामला मई 2016 का है, लेकिन अचानक से यह मामला इस वक्त सोशल मीडिया में वायरल होने लगा है. असल में बच्चे के पिता ने अपने बेटे और रेलवे को लेकर जिस कहानी को अपनी फेसबुक वॉल पर लिखा था उसे हाल ही में इंडियन रेलवे ने शयर कर दिया. इसके बाद से सोशल मीडिया यूजर्स ने इसे हाथों-हाथ‌ लिया और इस मानवीय संवदेना से जुड़ी कहानी को जमकर शेयर किया.

ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर के रहने वाले मीनाकेतन पति ने अपने बच्चे की जान बचाने के लिए इंडियन रेलवे का आभार जाताते हुए अपने जज्बातों को फेसबुक पर लिखा था. यह मामला 27 मई, 2016 का है. तब मीनाकेतन अपने परिवार के साथ मुंबई से शिरडी जा रहे थे. इसके लिए उन्होंने मुंबई सीएसटी- साईंनगर शिरडी फास्ट पैसेंजर (51033) पकड़ी थी.

मीनाकेतन पति अपने फेसबुक पोस्ट में लिखते हैं, “मेरे साढ़े तीन साल के बेटे की तबीयत अचानक बीच रास्ते में बिगड़ गई. वह अचानक उल्टियां करने लगा. देखते ही देखते उसकी तबीयत ज्यादा बिगड़ गई. करीब सात बजे सुबह वह ज्यादा गंभीर हो गया और सही तरीके से प्रतिक्रिया देना भी बंद कर दिया. हम काफी घबरा गए थे. मैंने तत्काल इसकी जानकारी ट्रेन में मौजूद टीटीई को दी. उन्होंने तत्काल हमें अगले स्टेशन पर मेडिकल सुविधाएं उपलब्‍ध करा दीं.”

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मैंने टीटीई को खबर देते ही पाया की ट्रेन की गति बढ़ गई. यहां तक कि ट्रेन अहमदनगर रेलवे स्टेशन पर अपने निर्धारित समय से 20 मिनट पहले पहुंच गई. यह एक बड़ी बात थी, क्योंकि मैंने पहले भी इस ट्रेन से यात्रा की है. यह आमतौर पर देरी से ही यहां पहुंचती थी. लेकिन मेरे बच्चे की तबीयत बिगड़ने की जानकारी पर यह ट्रेन 20 मिनट पहले पहुंच गई. इतना ही नहीं ट्रेन जैसे रेलवे स्टेशन पर रुकी, मैंने देखा कि मेरी बोगी के आसपास कई सारे रेलवेकर्मी मौजूद हैं. उन्होंने तत्काल हमें वहां पहले से तैनात एंबुलेंस में बिठाया और पास के अस्पताल में ले गए. वहां पहुंचते ही मेरे बेटे का इलाज शुरू हो गया. मैं कह सकता हूं रेलवे स्टेशन पर उतरने और मेरे बेटे के इलाज शुरू होने में मुश्किल से 10 मिनट लगे थे. शाम होते-होते मेरा बच्चा ठीक लगने लगा और हम अहमदनगर से शिरडी के लिए निकल गए.- मीनाकेतन पति अपनी फेसबुक पोस्ट में लिखते हैं

आधी रात को ट्रेन में महिला ने दिया बच्चे को जन्म

मुंबई-शिरडी पैसेंजर के अलावा एक अन्य ट्रेन की घटना भी इन दिनों सोशल मीडिया में जमकर वायरल है. इसमें दिल्ली डिविजन के एक टीटीई को ट्रेन में महिला की डिलिवरी में मदद करते देखा जा रहा है. इस घटना के बारे में इंडियन रेलवे ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट भी किया है. इस मामले में टीटीई ने काफी मेहनत कर के ट्रेन के दूसरे यात्रियों को उस महिला की मदद के लिए तैयार किया और खुद मुस्तैदी से लगे रहे. नतीजनत ट्रेन में आधी रात को मां ने अपने स्वस्‍थ बच्चे को जन्म दिया जबकि वहां कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था.

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इन दोनों घटनाओं के सोशल मीडिया में वायरल होने के बाद इंडियन रेलवे की चारों ओर वाहवाही हो रही है.