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Teacher’s Day स्पेशल: खास है ओडिशा का यह स्कूल, यहां का हर एक बच्चा है ‘साइंटिस्ट’

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ओडिशा (Odisha) के कटक जिले में कटक (Cuttack) से लगभग 50 किलोमीटर की दूरी पर स्थित गांव में एक ऐसा स्कूल (school) है जिसमें बच्चों को साधारण शिक्षा के साथ इनोवेशन (innovation) और टेक्नॉलजी (technology) की बात पढ़ाई जाती है. शहर से दूर, गरीब माहौल में पल रहे बच्चों के भीतर विज्ञान (science) और टेक्नॉलजी का ज्ञान बांटने के लिए अनिल प्रधान ने यह मुहिम चलाई है.

इस खास स्कूल में बच्चों को क्लास रूम में टेबलेट (tablet) के माध्यम से पढ़ाया जाता है. यहां छोटे-छोटे बच्चे इनोवेशन और टेक्नॉलजी के आधार पर अपने हाथों से रोबोट (Robot) तक बना लेते हैं और उसके ऊपर रिसर्च (reserach) करते हैं. गांव के बच्चों में वैज्ञानिक (scientist) बनने की ख्वाइश पैदा करने और उन्हें खींच ले जाने वाला शख्स कोई और नहीं बल्कि अनिल प्रधान ही है. अनिल प्रधान ने अपने जमा पैसों को खर्च कर इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल फॉर रूरल इनोवेशन बनाया है.

स्कूल में घुसते ही आपको कूड़ा-कबाड़ा कह कर फेंक देने वाले सामान से बनी तमाम साइंटिफिक चीजें दिख जाएंगी. उदारहरण के लिए बच्चों ने यहां पुराने ट्रक टायर की मदद से इनफिनिट वेल बना रखी है. इस स्कूल के लैब का नाम भी अनोखे ढ़ंग में दिया गया है. जैसे जोर का झटका, तोड़-फोड़-जोड़, कबाड़ से जुगाड़. इन सभी लैब में बच्चों को टूल्स, मशीनरी और रिसाइक्लिंग की शिक्षा भी मिलती है. इस स्कूल में कुल 124 बच्चे इस अनोखी शिक्षा प्रणाली का लाभ उठा रहे हैं.

आज इन बच्चों का सपना भी है कि ये कभी नासा (NASA) में जाएंगे. कोई प्लम्बर का बेटा है, कोई मजदूर का बच्चा है और कोई किसान का बेटा लेकिन उनके सपने (dream) बहुत दूर के हैं और उनके सपने को पंख दे रहे हैं अनिल प्रधान. आपको बता दें कि अनिल ओडिशा के संभलपुर में स्थित बुर्ला इंजीनियरिंग कॉलेज से अच्छी रैंक में अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद और कई सारे ऑफर होते हुए भी उन्होंने अपने ही गांव को अपनी कर्मभूमि के तौर पर चुना और बिना किसी की मदद के यह स्कूल शुरू किया. जहां बच्चे एक अनोखा ज्ञान प्राप्त कर आसमान छूने के सपने देख रहे हैं. अनिल अपने स्कूल के बच्चों को जूनियर साइंटिस्ट बुलाते हैं. आज ये बच्चे बिना मिट्टी से भी खेती करने की इनोवेशन पर काम कर रहे हैं. अनिल और उनका परिवार इस सफलता और नए सफर को लेकर बहुत खुश हैं.