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Teachers’ Day 2019 : ऐसे थे राधाकृष्णन, जानिए वो कहानी जब राष्ट्रपति बनने के बाद उनसे मिलने उनके शिष्य पहुंचे

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हर साल 5 सितंबर को स्कूल-कॉलेज में शिक्षक दिवस मनाया जाता है। यह हमारे पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्मदिवस है, जो कि एक अनुकरणीय और आदर्श शिक्षक थे। उन्होंने जीवन के 40 वर्ष एक शिक्षक के रूप में व्यतीत किए। डॉ राधाकृष्णन अपनी बुद्धिमतापू्र्ण व्याख्याओं, आनंददायी अभिव्यक्ति और हंसाने-गुदगुदाने वाली कहानियों से अपने छात्रों को मंत्रमुग्ध कर दिया करते थे।

दर्शन जैसे गंभीर विषय को भी वे अपनी शैली की नवीनता से सरल और रोच बना देते थे। साल 1962 में जब वे भारत के दूसरे राष्ट्रपति बने तो उनके कुछ शिष्य और प्रशंसक उनके पास गये। उन्होंने उनसे निवेदन किया कि वे उनके जन्मदिन को एक समारोह के रूप में मनाना चाहते हैं। यह सुनकर राधाकृष्णन ने कहा, ‘सिर्फ मेरा जन्मदिन मनाने के बजाय अगर तुम इस दिन को शिक्षक दिवस के रूप में मनाओगे तो मुझे ज्यादा खुशी होगी।’ इसके बाद से ही 5 सितंबर को सारे देश में शिक्षक दिवस मनाया जाता है।

उनकी यह इच्छा अध्यापन के प्रति उनके प्रेम को दर्शाती है। वे जीवन भर अपने आप को शिक्षक मानते रहे। 1952 से 1962 तक देश के उप-राष्ट्रपति रहने के बाद सन 1962 में वे भारत के राष्ट्रपति चुने गये। उन दिनों राष्ट्रपति का वेतन 10 हजार रुपये मासिक था लेकिन डॉ राधाकृष्णन मात्र ढाई हजार रुपये ही लेते थे और शेष राशि प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोश में जमा करा देते थे। देश के सर्वोच्च पद पर पहुंचकर भी वे सदगीभरा जीवन बिताते रहे।