Home समाचार आखिर कमलेश तिवारी के हत्यारे खुद के पहचाने जाने और सारे सुराग...

आखिर कमलेश तिवारी के हत्यारे खुद के पहचाने जाने और सारे सुराग देने को इतने उतावले क्यों थे?

IMG-20251011-WA0045
IMG-20250614-WA0035
IMG-20250614-WA0034
IMG-20250614-WA0033
IMG-20250614-WA0032
IMG-20250614-WA0030
IMG-20250614-WA0031
IMG-20250614-WA0029
IMG-20250614-WA0028

IMG-20240704-WA0019
IMG-20220701-WA0004
WhatsApp-Image-2022-08-01-at-12.15.40-PM
1658178730682
WhatsApp-Image-2024-08-18-at-1.51.50-PM

कमलेश तिवारी हत्याकांड में जिस तत्परता से देश के कई राज्यों की पुलिस मुस्तैदी से एकश्न में नजर आईं, वह हैरत में डालने वाला है। 18 अक्टूबर को हिंदू नेता की हत्या के बाद यूपी से लेकर गुजरात तक और महाराष्ट्र से लेकर न जाने कहां तक पुलिस की मुस्तैदी हैरतअंगेज़ रही।

लेकिन इस सबके बावजूद कमलेश तिवारी की मां संतुष्ट नजर नहीं आतीं। इस 70 वर्षीय मां का गम और गुस्सा और उनके आरोप (कमलेश की मां ने बीजेपी नेताओं और एक माफिया पर हत्या का आरोप लगाया, कमलेश तिवारी ने खुद बीजेपी पर उनकी हत्या की साजिश रचे जाने का एक वीडियो में आरोप लगाया था) दरकिनार भी कर दें तो भी कमलेश तिवारी हत्याकांड से जुड़े कई ऐसे सवाल हैं, जो असमंजस में डालते हैं।

कमलेश की हत्या के अगले ही दिन यूपी पुलिस, गुजरात की एटीएस और सूरत की क्राइम ब्रांच फुल एक्शन में दिखी और तीन आरोपियों को धर दबोचा। इनमें एक 21 वर्षीय राशिद अहमद पठान है जो बीते 2 साल से दुबई में काम कर रहा था और पिछले महीने ही अपने भाई की 3 नवंबर को होने वाली शादी में शामिल होने के लिए वापस आया था। दूसरा 21 वर्षीय फैजान शेख छोटे-मोटे काम करता है और तीसरा 24 साल का मौलाना मोहसिन शेख सूरत के एक मदरसे में पढ़ाता है।

इनकी गिरफ्तारी के फौरन बाद ही गुजरात एटीएस के डिप्टी एसपी के के पटेल ने ऐलान किया किया इन तीनों ने अपना गुनाह कबूल लिया है। इस बीच महाराष्ट्र एटीएस प्रमुख देवेन भारती ने मुंबई में ऐलान किया कि उन्होंने इस हत्याकांड के एक साजिशकर्ता को नागपुर में गिरफ्तार किया है और उससे पूछताछ हो रह है।

लेकिन इस सबमें अपने बेटे की शादी की तैयारियों में जुटे पठान के पिता खुर्शीद अपने छोटे बेटे की गिरफ्तारी से बेहद सदमे में हैं। उनका कहना है कि, “मेरे बच्चे बेकसूर हैं। हम तो इस कमलेश तिवारी को जानते तक नहीं कि वह क्या करता है और उसे किसने मारा।”

इस सबमें चौंकाने वाली बात यह भी है कि कथित हत्यारोपियों ने आखिर अपनी पहचान छिपाने की कोशिश क्यों नहीं की? जिस तरह कमलेश तिवारी ने दोनों की अपने दफ्तर में खातिरदारी की, उन्हें चाय पानी कराया, दही-वड़ा खिलाया, उससे लगता है कि दोनों की कमलेश तिवारी से अच्छी जान-पहचान थी। पहचान इतनी अच्छी थी कि उनके कहने पर कमलेश तिवारी का ऑफिस बॉय उनके लिए पान मसाला और सिगरेट लेने बाहर चला गया और उन्होंने इसी दौरान कथित तौर पर तिवारी का गला रेत दिया।

विशेषज्ञों का मानना है कि आमतौर पर हत्यारे अपनी पहचान छिपाने की कोशिश करते हैं। वे हमेशा ध्यान रखते हैं कि वे सीसीटीवी में न कैद हो जाएं, और जब अपराध करके भागें तो कोई उन्हें देख न ले। लेकिन कमलेश तिवारी हत्याकांड में ऐसा नहीं हुआ। हत्यारे उस मिठाई के डिब्बे को वहीं छोड़ गए जिसमें वे कथित तौर पर पिस्टल लेकर आए थे, साथ ही वहां मिठाई का बिल भी छोड़ गए, ताकि पता चल जाए कि मिठाई कहां से खरीदी गई थी।

आनन-फानन पता चल गया कि जिस मिठाई के डिब्बे में पिस्टल और चाकू लाया गया था, वह सूरत के उधना एरिया की एक मिठाई की दुकान का था। पुलिस ने फौरन इस मिठाई की दुकान के सीसीटीव में फैजान समेत तीन लोगों को देखा और उन्हें गिरफ्तार कर लिया। फैजान ने मिठाई की दुकान पर सीसीटीवी से बचने की कोई कोशिश भी नहीं की।

वह चाहता तो आसानी से अपनी चेहरा छिपा सकता था, या फिर डिब्बा ही चाहिए था तो कहीं से भी ले सकता था। आखिर क्यों?

इन सबसे भी ज्यादा हैरानी की बात कि हत्यारे, कथित हत्या करने के बाद वापस उसी होटल में गए जहां वे रुके थे। वहां उन्होंने दूसरे पहने, खून से सने कपड़े वहीं छोड़ दिए। फिर रिसेप्शन पर आकर कमरे की चाबी भी दी और एक घंटे में आने का कहकर चले गए।

आखिर इन दोनों ने यह जोखिम क्यों लिया, वे तो सीधे भाग सकते थे, लेकिन उन्हें कोई ऐसी जल्दी नहीं थी।

इन सारे तथ्यों को देखें, तो आभास होता है कि ये दोनों खुद ही चाहते थे कि पुलिस उनकी पहचान करे और उन तक पहुंच जाए। लेकिन रोचक है कि इतना सब होने के बावजूद किसी भी राज्य की पुलिस इन दोनों तक अभी नहीं पहुंच सकी है।

कमलेश तिवारी की मां पुलिस की इस पूरी कहानी को खारिज कर चुकी हैं और उन्होंने सीएम योगी आदित्यनाथ और उनकी सरकार पर धोखा देने का आरोप लगाते हुए कहा है कि अगर योगी सरकार ने कमलेश की वह सुरक्षा नहीं हटाई होती तो जो उन्हें अखिलेश सरकार में मिली हुई थी, तो शायद ऐसा नहीं होता।

कमलेश की मां ने एक टीवी चैनल से बातचीत में यहां तक कहा कि, “पुलिस कुछ बेकसूरों को पकड़ के सामने पेश कर देगी, और माफिया को बचा लेगी। आखिर जब प्रशासन ही ने धोखा दिया हो तो उनसे क्या उम्मीद करें।”

उन्होंने यह भी कहा, “पिछली सरकार के दौर में मेरे बेटे को करीब 17 पुलिस वालों की सुरक्षा मिली हुई थी। योगी सरकार के आते ही, पहले उनकी संख्या घटाकर 8-9 कर दी गई, और फिर इसे भी घटाकर 4 कर दिया गया। इनमें से दो हर वक्त मेरे बेटे के साथ होते थे, जब भी वह कहीं जाता था, लेकिन जिस दिन हत्या हुई, उस दिन एक भी सुरक्षा कर्मी साथ में नही था।”

इसी बात को तिवारी की पार्टी के नेता और कमलेश तिवारी के नंबर दो स्वराष्ट्र दीप सिंह भी कहते हैं। जब ये कथित हत्यारे कमलेश तिवारी से मिलने आए थे, तो सिंह उस समय वहां थे। उन्होंने बताया है कि तिवारी को दोपहर से पहले एक फोन आया था, जिसके बाद उन्होंने अपनी पत्नी को उनके घर के फर्स्ट फ्लोर पर बने दफ्तर को साफ करने को कहा था। साथ ही मेहमानों के लिए कुछ चाय-नाश्ता तैयार करने को भी कहा था।

सिंह ने बताया कि एक घंटे बाद दोनों आए थे और सीधे फर्स्ट फ्लोर पर चले गए थे, मानो वे यहां से वाकिफ थे। वे तिवारी के साथ करीब आधे घंटे बैठकर बातचीत करते रहे थे। इस दौरान दीप सिंह के सामने ही उन्होंने चाय-नाश्ता किया था। इसके बाद इनमें से एक ने दीप सिंह को सिगरेट लेने भेज दिया था, और वह तिवारी को इन कथित हत्यारों के साथ छोड़कर बाहर चले गए थे।

जब दीप सिंह वापस आए तो तिवारी फर्श पर खून में लथपथ पड़े थे, उनका गला रेता गया था, जहां से खून बह रहा था। उन्होंने शोर मचाया और तिवारी की पत्नी किरन दौड़ कर ऊपर आईं। उन्होंने एंबुलेंस बुलाई, लेकिन अस्पताल पहुंचते पहुंचते कमलेश दम तोड़ चुके थे।

लखनऊ के एसएसपी कलानिधि नैथवानी की पहली प्रतिक्रिया थी, “पहली नजर में लगता है कि दोनों ने किसी निजी दुश्मनी के चलते तिवारी पर हमला किया। ऐसा लगता है कि तिवारी हमलावरों को जानते थे।”

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक शुरु में डॉक्टरों ने कहा था कि ऐसा लगता है कि हत्या गला रेतने से हुई है, लेकिन जैसी ही पुलिस को पिस्टल मिला, तो एएसपी विकास त्रिपाठी ने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पता चला है कि पहले गोली मारी गई और उसके बाद चाकू से हमला किया गया।

यह सारी थ्योरी गले नहीं उतरती। अगर हमलावरों ने गोली चलाई तो किसी ने गोली चलने की आवाज क्यों नहीं सुनी? और आखिर एक ऐसे मिठाई के डिब्बे में चाकू और पिस्टल रखकर क्यों लाए जिसका बिल भी उसमें मौजूद था और दुकान का पता भी था।