Home धर्म - ज्योतिष Gopashtami 2019: गोपाष्टमी की सटीक व्रत कथा, इसके बिना अधूरी है पूजा!

Gopashtami 2019: गोपाष्टमी की सटीक व्रत कथा, इसके बिना अधूरी है पूजा!

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आज गोकुल, मथुरा, ब्रज और वृंदावन में गोपाष्टमी मनाई जा रही है. यह त्यौहार ज़्यादातर इसी क्षेत्र में मनाया जाता है. पंचांग के मुताबिक, हर साल कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है. आज के दिन गौ माता, बछड़ों और दूध वाले ग्वालों की पूजा की जाती है. माना जाता है कि गोपाष्टमी के दिन पूरे मन से भक्ति के साथ पूजा पाठ करने से भक्तों को इच्छित फल की प्राप्ति होती है. पूजा पाठ के बाद शाम को व्रत कथा पढ़ी जाती है. व्रत कथा के बिना कोई भी व्रत अधूरा माना जाता है और पूजा का फल भी नहीं मिलता. आइए जानते हैं गोपाष्टमी की व्रत कथा

गोपाष्टमी व्रत कथा (Gopashtami Vrat Katha):

प्राचीन काल में एक बार बाल गोपाल (भगवान कृष्ण) जब 6 साल के थे तो मां यशोदा से कहने लगे कि मां अब मैं बड़ा हो गया हूं और अब मैं बछड़े चराने नहीं जाऊंगा. मैं गौ माता के साथ जाऊंगा. इसपर यशोदा ने बात नन्द बाबा पर टालते हुए कथा कि अच्छा ठीक है लेकिन एक बार बाबा से पूछ तो लो. इसपर भगवान कृष्ण जाकर नंद बाबा से कहने लगे कि अब मैं बछड़े नहीं बल्कि गाय चराने जाया करूंगा. नंद बाबा ने उन्हें समझाने की कोशिश की लेकिन बाल गोपाल के हठ के आगे उनकी एक न चली. फिर नंद बाबा ने कृष्ण से कहा कि ठीक है तो पहले जाकर पंडित जी को बुला लाओ ताकि उनसे गौ चारण के लिए शुभ मुहूर्त का पता लगाया जा सके.

ये सुनकर बाल गोपाल दौड़ते हुए पंडित जी के पास पहुंचे और एक सांस में उनसे कह डाला कि- पंडित जी, आपको नंद बाबा ने गौ चारण का मुहूर्त देखने के लिए बुलाया है. आप आज ही शुभ मुहूर्त बताना तो मैं आपको खूब ढेर सारा मक्खन दूंगा.
पंडित जी नंद बाबा के पास पहुंचे और पंचांग देखकर उसी दिन को गौ चारण के लिए शुभ मुहूर्त बता दिया और साथ ही यह भी कह दिया कि आज के बाद से एक साल तक गौ चारण के लिए कोई भी मुहूर्त शुभ नहीं है.

नंद बाबा ने पंडित जी की बात पर विचार करते हुए बाल गोपाल को गौ चारण की आज्ञा दे दी. भगवान दिन उसी दिन से गाय चराने जाने लगे. जिस दिन से बाल गोपाल ने गौ चारण आरंभ किया था उस दिन कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी थी. भागवान द्वारा उस दिन गाय चराना आरंभ करने की वजह से इसे गोपाष्टमी कहा गया.