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छत्तीसगढ़ : इंद्रावती में बैराज का प्रस्ताव फाइल अपने साथ लेकर गए चीफ इंजीनियर

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इंद्रावती नदी में गर्मियों में जलप्रवाह बनाए रखने दो स्थानों पर बैराज प्रस्तावित किए जा रहे हैं। पहला बैराज जगदलपुर से चित्रकोट जलप्रपात के बीच और दूसरा चित्रकोट जलप्रपात से नीचे बनाने का प्रस्ताव है। आमागुड़ा एनीकट टूटने के मामले की जांच तथा संभाग की सबसे बड़ी मध्यम सिंचाई परियोजना के निरीक्षण के लिए राजधानी से दो दिन के दौरे पर पहुंचे मुख्य अभियंता महानदी परियोजना केएस ध्रुव ने मंगलवार को संभागीय विभागीय समीक्षा बैठक में इस बात की जानकारी दी। इंजीनियरों का कहना है कि बैराज बनने से जगदलपुर शहर के लिए पेयजल की किल्लत नहीं रहेगी। हर सीजन में पर्याप्त पानी मौजूद रहेगा। 2020-21 के प्रदेश के बजट में इन दो बैराजों के साथ ही संभाग भर से सवा दो सौ से अधिक सिंचाई योजनाएं भी शामिल करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इंद्रावती परियोजना मंडल के दफ्तर में सुबह दस बजे से दोपहर 12 बजे तक दो घंटे चली बैठक में अधीक्षण यंत्री शेख शाकिर और सभी सातों जिलों के कार्यपालन यंत्री मौजूद थे। संभाग से 500 से अधिक योजनाएं प्रस्तावित की गई थीं लेकिन समीक्षा के बाद लगभग सवा दो सौ योजनाओं को नवीन बजट में शामिल करने पर सहमति बनने की बात सामने आई है। बताया गया कि बैराज के निर्माण से कोई क्षेत्र डुबान से प्रभावित नहीं होगा। जहां बैराज का निर्माण प्रस्तावित किया जाएगा वहां नदी की चौड़ाई थोड़ी बढ़ाई जाएगी ताकि अधिक से अधिक मात्रा में पानी का भंडारण हो सके। बताया जाता है कि बैराज निर्माण की फाइल लेकर मुख्य अभियंता रायपुर लौट गए हैं। बाकी योजनाओं का विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर उन्होंने अफसरों से रायपुर भेजने को कहा है।

दो दशक पुराना है इंद्रावती का एनीकट

शहर की पेयजल जरूरत को पूरा करने दो दशक पहले छत्तीसगढ़ राज्य गठन के समय इंद्रावती नदी पर यहां पुराने पुल के समीप करीब डेढ़ करोड़ रूपये की लागत से एनीकट का निर्माण किया गया था। यह एनीकट संभाग का पहला है। वर्तमान में संभाग में 121 एनीकट नदी-नालों में निर्मित हैं। पुराना पुल स्थित एनीकट की ऊंचाई काफी कम होने से यह दीर्घकाल तक के लिए शहर के लिए पानी का भंडारण करने में सक्षम नहीं है। जगदलपुर शहर के विस्तार को देखते हुए 30 साल आगे की जरूरत को ध्यान में रखकर बैराज निर्माण की जरूरत महसूस की जा रही है।

कलेक्टर नाव में खुद निकले थे साइट देखने

इंद्रावती नदी जलसंकट की स्थिति को देखते हुए प्रस्तावित बैराज निर्माण के लिए उपयुक्त स्थल की तलाश में पिछले दिनों जल संसाधन विभाग के इंजीनियरों के साथ कलेक्टर डॉ अ्रयाज तंबोली नाव में जगदलपुर से चित्रकोट तक गए थे। बताया जाता है कि उसी दौरान एक दो स्थलों को बैराज के लिए चिन्हित कर लिया गया था। अंतिम निर्णय विस्तृत सर्वेक्षण के बाद लेने की बात अधिकारी कह रहे हैं। विभागीय सूत्रों की मानें तो बैराज निर्माण पर करीब 87 करोड़ रूपये का खर्च आने की संभावना है।

‘चीफ इंजीनियर के साथ बैठक में नवीन मद में शामिल की जा सकने वाली सिंचाई योजनाओं पर चर्चा हुई है। बैराज भी इसमें शामिल है। ज्यादातर योजनाएं डायवर्सन स्कीम और सिंचाई तालाबों से जुड़ी हैं।’

-शेख शाकिर, अधीक्षण यंत्री, इंद्रावती परियोजना मंडल जगदलपुर