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बच्चों के दिमागी विकास में होती है पिता की सबसे अहम भूमिका ओर वो अहम भूमिका यह है…

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बच्चों की जब भी बात आती है तो हर माँ बाप अपने बच्चों को ले कर काफी सजग हो जाते हैं । उनको क्या पहनना है क्या खाना है , कैसे रहना , काया पढ्न है , क्या क्या करना है क्या नही करना यह सभी उनके अंदर चलता है और वह बच्चों पर यह बातें लागू भी करते हैं । पर जब बात बच्चों की परफ़ोर्मेंस की आती है तो सारी बात सिर्फ माँ पर ही डाल दी जाती है ।जब बच्चा पढ़ाई में कमजोर होता है अपने जीवन को ले कर सही से फैसले नही ले पाता है कई चीजों में कमजोर होता है तो उसको बहुत कुछ भला बुरा सुनने को मिलता हाइकहा जात अहै की वह दिमाग से कमजोर हैं और भी बहुत कुछ सुनने को मिलता है । ईतना ही नही इसके साथ ही साथ यही सब सहन करना पड़ता है माँ को भी । पर जबकि सारी गलती होती पिता की ही है ।

जी हाँ हल ही में हुई स्टडी के अनुसार जब बच्चा छोटा होता है तब यदि माँ और बाप दोनों ही मिल कर बच्चे की परवरिश और देखभाल करें तो बच्चा ज्यादा दिमाग दार बंता है । और उनसे दिमाग का विकास भी अच्छे से होता है । यह स्टडी शेर के बच्चों पर की गई जिसमें इस बात को भी पाया गया की अकेली माँ बच्चों का ध्यान रखने में कम समर्थ थी और इसी कारण उनके बच्चे कम समय तक जीवित रह पाये ।

पहले माना जाता था कि बच्चे की देखभाल करने में मां की मदद कौन करता है और कौन नहीं करता है, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है। लेकिन अब इस मदद में पिता की भूमिका होने का महत्व सामने आया है। वैसे तो बच्चे की देखभाल में मां की मदद कोई भी कर सकता है, जैसे बड़े बच्चे। लेकिन इसमें पिता मदद करे यह बेहद जरूरी है। ये बातें एक स्टडी से पता चली हैं। यह स्टडी ‘जर्नल ऑफ बिहेवियोरल ऐंड सोशियोबायॉलजी’ में छपी है।