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नागरिकता विधेयक के बीच संयुक्त राष्ट्र ने खोली पाकिस्तान की पोल, मोदी-शाह ने ली राहत की सांस…

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कश्मीर में अल्पसंख्यक राग अलापने वाले पाकिस्तान में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति बद से बदतर होती जा रही है। कट्टरपंथी विचारधारा के कारण हिंदू समेत अन्य अल्पसंख्यक वर्ग के लोग सुरक्षित नहीं हैं। संयुक्त राष्ट्र की ताजा रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है। बड़ी बात यह है कि इमरान खान के सत्ता में आने के बाद अल्पसंख्यकों को प्रताडि़त करने के मामला पहले से ज्यादा बढ़ गए हैं। सीएसडब्ल्यू ने पाकिस्तान : धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला शीर्षक से एक रिपोर्ट जारी की है। 47 पन्नों की इस रिपोर्ट में साफ बताया गया है कि किस तरह से सरकार अल्पसंख्यकों पर हमले के लिए कट्टरपंथी विचारों को बढ़ावा दे रही है।

हर साल एक हजार से अधिक लड़कियों को जबरन धर्म परिवर्तन कराया जा रहा है। 20 से 25 घटनाएं रोजाना इस तरह से होती है। इसमें 16 साल की लड़कियां शिकार होती हैं। सीएसडब्ल्यू ने बच्चों का साक्षात्कार लिया। बच्चों ने स्वीकार किया कि उन्हें शिक्षकों व सहपाठियों द्वारा अपमानित किया जाता है। इमरान सरकार आने के बाद अल्पसंख्यक खासकर हिंदू और ईसाई समुदाय सबसे ज्यादा खतरे में हैं। हर साल इन दोनों समुदायों की सैकड़ों महिलाओं और बेटियों को अगवा कर धर्म परिवर्तन कराया जाता है। उन्हें मुस्लिम पुरुषों से शादी करने के लिए मजबूर किया जाता है। मुस्लिमों से शादी होने के बाद पीडि़ताओं के परिवार के पास लौटने की कोई उम्मीद नहीं होती है। हिंदू लड़कियों को व्यवस्थित रूप से निशाना बनाया जाता है, क्योंकि वे कम आर्थिक पृष्ठभूमि से आती हैं और अशिक्षित हैं।

संयुक्त राष्ट्र की ओर से जारी इस रिपोर्ट में पाकिस्तान की पुलिस और न्याय व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं। इसमें कहा गया कि पीडि़त अल्पसंख्यकों के प्रति पाकिस्तान पुलिस और देश की न्यायपालिका भी भेदभावपूर्ण रवैया अपनाते हैं। अगवा की गई अल्पसंख्यक महिलाओं के मामले में पुलिस भी कोई कार्रवाई नहीं करती है। पुलिस और न्यायपालिका अल्पसंख्यकों को दोयम दर्जे का नागरिक मानती है। सीएडब्ल्यू ने पाकिस्तान में ईशनिंदा और अहमदिया विरोधी कानून के बढ़ते राजनीतिकरण पर चिंता जताई है। रिपोर्ट में कहा गया कि पाकिस्तान में ईशनिंदा कानून का लोग अल्पसंख्यकों के उत्पीडऩ के लिए इस्तेमाल किया जाता है। ईशनिंदा कानून और उसके ऊपर बढ़ते कट्टरवाद की वजह से देश में सामाजिक सौहार्द को भारी नुकसान पहुंचा है। ईशनिंदा के संवेदनशील मामलों की वजह से धार्मिक उन्माद भडक़ता है और इससे पाक में भीड़ हिंसा की घटनाएं बढ़ी हैं।