Home छत्तीसगढ़ 900 बिस्तर बेकार फिर भी सड़क पर मर रहे मरीज:राज्य में सबसे...

900 बिस्तर बेकार फिर भी सड़क पर मर रहे मरीज:राज्य में सबसे ज्यादा 400 बिस्तर वाले 50 कोच दुर्ग में 11 महीने से बंद, विभाग बोला- हमारे पास पैरामेडिकल स्टाफ और डाॅक्टर नहीं

IMG-20251011-WA0045
IMG-20250614-WA0035
IMG-20250614-WA0034
IMG-20250614-WA0033
IMG-20250614-WA0032
IMG-20250614-WA0030
IMG-20250614-WA0031
IMG-20250614-WA0029
IMG-20250614-WA0028

IMG-20240704-WA0019
IMG-20220701-WA0004
WhatsApp-Image-2022-08-01-at-12.15.40-PM
1658178730682
WhatsApp-Image-2024-08-18-at-1.51.50-PM


भिलाई– छत्तीसगढ़ में कोरोना का कहर जारी है। हालात यह है कि अस्पतालों में मरीज दाखिल करने के लिए बेड नहीं हैं। कोरोना मरीज बिस्तरों के इंतजार में अस्पतालों के सामने सड़क पर, वाहनों में लेटे हुए हैं। बेड नहीं मिलने से कहीं-कहीं मरीज सड़क पर ही दम तोड़ रहे हैं। ऐसे में आपको यह जानकार आश्चर्य होगा कि प्रदेश में कोरोना मरीजों के लिए बनाए गए करीब 900 बेड खाली पड़े हुए हैं। इनमें से 400 बेड दुर्ग जिले में हैं। इनमें आज तक एक मरीज भी भर्ती नहीं किया गया। रेलवे विभाग का कहना है कि इनको संचालित करने के लिए पैरामेडिकल स्टाफ और डाॅक्टरों की जरूरत होगी। वो न तो हमारे पास और न ही जिला प्रशासन के पास हैं।

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के मरोदा रेलवे यार्ड में पिछले करीब 11 महीनों से आइसोलेशन ट्रेन के डिब्बे खड़े-खड़े कबाड़ हो रहे हैं। रायपुर और बिलासपुर डिवीजन के अंतर्गत 105 डिब्बों को आइसोलेशन वार्ड में बदला गया था, जिसमें मरोदा यार्ड में 50 डिब्बों में 400 बेड बनाए गये थे। इनको बनाने में तकरीबन दो लाख रुपए प्रति कोच खर्च किए गए थे, लेकिन अब तक इनमें एक भी कोरोना मरीज एडमिट नहीं किया गया है। दरअसल 400 बिस्तर तो हैं, लेकिन न तो डाक्टर हैं न पैरामेडिकल स्टाफ। ऐसे और कोच बिलासपुर में भी खड़े हैं। इसके अलावा 56 कोच बिलासपुर, उमरिया व कलमीटार में खड़े हैं। रेलवे राज्य सरकार के दिशा-निर्देशों का इंतजार कर रही है पर सरकार ने इसका उपयोग करने आदेश ही जारी नहीं किया है।

कोरोना काल में पिछले साल संक्रमण की लहर के चलते रेलवे प्रशासन ने ट्रेन के डिब्बों को आइसोलेशन वार्ड बनाया था। इसके बाद से इन डिब्बों को कभी खोला नहीं गया। डिब्बों की खिड़कियों में लगे प्लास्टिक फटने लगे हैं। महीनों से खड़े इन डिब्बों को देखने से यही लगता है कि आइसोलेशन डिब्बे तैयार करके रेलवे प्रशासन उन्हें भूल गया हैं।

आइसोलेशन डिब्बों के हालत खराब हो गई है। इनकी देखरेख नहीं हो रही है।

आइसोलेशन डिब्बों के हालत खराब हो गई है। इनकी देखरेख नहीं हो रही है।

ऐसे हैं आइसोलेशन वार्ड
रेलवे ने ऐसे हर कोच में आठ बेड की व्यवस्था की थी, जो जरूरत पड़ने पर 16 बेडों में बदले जा सकते हैं। ये दरअसल द्वितीय श्रेणी के कोच हैं, जिनमें सेंट्रली काम करने वाले एयर कंडिशन (एसी) नहीं लगे होते हैं। इनकी खिड़कियां खोली जा सकती हैं। पर्दे लगाकर बेड का क्यूबिकल बनाया गया है। ताकि किसी मरीज के कारण दूसरे को और दूसरों के कारण उस मरीज में संक्रमण न फैले।

ट्रेन के डिब्बों में आइसोलेशन वार्ड तैयार किए गए, लेकिन इनका इस्तेमाल नहीं किया गया।

ट्रेन के डिब्बों में आइसोलेशन वार्ड तैयार किए गए, लेकिन इनका इस्तेमाल नहीं किया गया।

डिब्बों का हो सकता कोरोना मरीजों के लिए इस्तेमाल

छत्तीसगढ़ में कोरोनावयरस की दूसरी लहर ने कोहराम मचा कर रखा है। कोरोना मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है और लोगों को अस्पतालों में बेड नहीं मिल पा रहे हैं। कई अस्पतालों में मरीजों को स्ट्रेचर नहीं मिल रहा तो कहीं उनका जमीन पर ही उनका इलाज किया जा रहा है। इस समय रेलवे के आइसोलेशन डिब्बों का इस्तेमाल राज्य सरकार कर सकती है। रायपुर के बाद सबसे ज्यादा कोरोना को लेकर हालात दुर्ग जिले में खराब है। इन डिब्बों को कोरोना मरीजों के इलाज करने के काम में लाया जा सकता है।

रेलवे और जिला प्रशासन का क्या है कहना

आइसोलेशन डिब्बों को लेकर रायपुर रेलवे मंडल के PRO शिव प्रसाद ने बताया कि हमारे सारे डिब्बे दुर्ग के मरोदा यार्ड में खड़े हैं, जिसमें सारी सुविधाएं हैं, जो कोरोना मरीज को दी जा सकती है। लेकिन इनको संचालित करने के लिए पैरामेडिकल स्टाफ और डाॅक्टरों की जरूरत होगी। वो न तो हमारे पास और न ही जिला प्रशासन के पास हैं। इस कारण फिलहाल सभी डिब्बे यार्ड में खड़े किए गए हैं।

दुर्ग कलेक्टर ने कहा

दुर्ग कलेक्टर डॉक्टर सर्वेश्वर नरेन्द्र भूरे ने बताया कि यह रेलवे की प्रॉपर्टी है। हमने अपनी तरफ से स्वास्थ्य सचिव को जानकारी दे दी है। रेलवे के पास आइसोलेशन के डिब्बे खाली हैं। अभी तक हमें कुछ भी निर्देश शासन की तरफ से नहीं मिले हैं। फिलहाल हमारे पास अस्पतालों में पर्याप्त बेड हैं और अभी 60 ऑक्सीजन बेड खाली हैं। 300 और बेड तैयार किए जा रहे हैं। हमारे यहां ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं हैं। लेकिन ICU बेड की जरूरत है। उसकी भी व्यवस्था की जा रही है।

जिले में बेड की संख्या

जिले में 6 सरकारी अस्पतालों में 1147 बेड हैं। निजी अस्पतालों में 802 बेड़ और सामाजिक संस्थाओं के द्धारा तैयार किए गये 171 बेड हैं जिसमें ICU के 327 बेड हैं। वहीं वेंटिलेटर बेड की संख्या 106 है।