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नदी में बह रहे लोगों को ग्रामीणों ने बचाया जिले के अंतिम छोर के कई गांव के लिए कोरेनर नदी बरसात के मौसम में समस्या बड़ी बन जाता है।

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जिले के अंतिम छोर के कई गांव के लिए कोरेनर नदी बरसात के मौसम में समस्या बड़ी बन जाता है। क्षेत्र के दर्जनों गांवों के लोगों की पूरी दिनचर्या इस नदी के कारण अस्त-व्यस्त हो जाती है।

पखांजूर। कांकेर जिले के अंतिम छोर के कई गांव के लिए कोरेनर नदी बरसात के मौसम में समस्या बड़ी बन जाता है। क्षेत्र के दर्जनों गांवों के लोगों की पूरी दिनचर्या इस नदी के कारण अस्त-व्यस्त हो जाती है। नदी में पहले भी लोगों की डूबने की घटना घट चुकी है। मंगलवार को ऐसी एक घटना में छह लोग बाल-बाल बचे। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि नदी को पार करने के लिए तीन लोग नाव से होकर इस ओर आ रहे थे। तभी सड़क से बह रहे रपटे से तीन लोग मोटर साइकिल निकालने का प्रयास कर रहे थे। तभी बाइक और नाव आमने-सामने आ गई।

दोनों की टक्कर से नाव और बाइक सवार सभी छहः लोग नदी में बहने लगे। ग्रामीणों की सहायता से इन्हें बचाया गया। पिछले 10 दिनों से परलकोट क्षेत्र में अतिवृष्टि हो रहा है जिससे कि क्षेत्र की नदियां उफान पर हैं। ऐसे में जिस नदी में पुलिया बन गया है, वहां कोई परेशानी नहीं है, लेकिन जिस नदी में पुलिया नहीं है, वह बरसात में समस्या बन जाती है। ऐसी ही एक नदी है कोरेनर नदी। कोरेनर नदी में पुलिया नहीं बना है। वहां केवल रपटा है। हल्की सी वर्षा से रपटा के ऊपर से पानी बहना शुरू हो जाता है।

कोरेनर नदी के उस पार कई गांव बसे हैं। बरसात में यह नदी उन ग्रामीणों के लिए समस्या से कम नहीं है। ब्लाक के अंतिम छोर में बसे लोग जान जोखिम में डालकर नदी पार कर रहे है। वर्षा के कारण कोरेनर नदी उफान पर है। दिन में कई ग्रामीण रोजमर्रा के कार्य के लिए नदी पार करते नजर आ रहे है। यह स्थिति खतरनाक सिद्घ हो सकती है। उफनती नदी पर जिस तरह ग्रामीण अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं, उससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है

इस घटना का वीडियो सुबह से ही सोशल मीडिया में खूब वायरल हो रहा है। बरसात में हर वर्ष नदी में इस प्रकार का घटना होता है। यहां प्रशासन ने सुरक्षा का कोई प्रबंध नहीं किया है। नदी के दूसरे छोर पर लगभग 20 से 30 गांव बसे हैं। यहां के ग्रामीण हर साल वर्षा में इसी तरह अपनी जान जोखिम में डालकर नदी पार करते है। नदी पर पुल की आधारशिला कई बार रखी जा चुकी है और इस वर्ष निर्माण कार्य शुरू भी हो चुका है। प्रशासन के सुस्त रवैये का नतीजा है कि रोजाना ग्रामीण अपनी जान जोखिम में डालकर नदी पार करने को मजबूर है।

नदी पार करने की विवशता

बरसात में ग्रामीणों को आवश्यक सामान या किसी अन्य काम के लिए नदी पार कर दूसरे छोर बांदे जाना पड़ता है। बारिश के दिनों में जैसे ही कोरेनर नदी का जल स्तर बढ़ता है, ग्रामीणों की जान पर संकट मंडराने लगता है।