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गणपति विसर्जन झांकी: आस्था की लहरों पर सवार होकर निकले गणपति, हजारो की संख्या में उमड़े भक्त

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झांकियों में इस बार थीम भी काफी बेहतर नजर आए। बप्पा की विदाई में कहीं प्रभु श्रीराम पूरे दरबार के साथ नजर आए, तो कहीं मां काली रक्तबीज का वध कर उसका खून पीते हुए नजर आईं।

रायपुर. बड़ी गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन करने शहर में सोमवार रात विसर्जन झांकी निकाली गई। इसमें 70 के करीब झांकियां शामिल थीं। 2 साल बाद निकली इन भव्य झांकियों को देखने के लिए शहर के अलग-अलग इलाकों से तो लोग जुटे ही थे।

आसपास के शहर और गांवों से भी बड़ी संख्या में लोग राजधानी पहुंचे थे। झांकियों में इस बार थीम भी काफी बेहतर नजर आए। बप्पा की विदाई में कहीं प्रभु श्रीराम पूरे दरबार के साथ नजर आए, तो कहीं मां काली रक्तबीज का वध कर उसका खून पीते हुए नजर आईं। बता दें कि रात 8 बजे शहर के अलग-अलग इलाकों से विसर्जन झांकियां शारदा चौक पहुंचने लगी थीं। यहां नगर निगम द्वारा प्रत्येक झांकी को नंबर दिया गया।

फिर संख्या के आधार पर ही झांकियां जयस्तंभ चौक, मालवीय रोड, कोतवाली चौक से सदरबाजार होते हुए कंकालीपारा से लाखेनगर चौक होकर महादेवघाट की ओर आगे बढ़ीं। 2 साल बाद यह पहला मौका था जब शहर में इतने धूमधाम से गणेश विसर्जन झांकी निकली थी। इसे लेकर लोगों का उत्साह भी देखते बनता था। यात्रा मार्ग पर पूरी रात झांकी दर्शन के लिए भक्तों की भीड़ नजर आई।

रामायण से लेकर महाभारत तक के किरदार आए नजर
तकरीबन 70 झांकियों वाली विसर्जन यात्रा में इस बार काफी कुछ नया था। आमतौर पर इस यात्रा में कुछ ही थीम नजर आते थे, लेकिन इस बार इसमें काफी वैरायटी दिखी। धर्मग्रंथों और शास्त्रों में बताई गई विभिन्न घटनाओं को झांकियों में दिखाने का प्रयास किया गया था। जैसे अपने वाहन को लेकर कैसे श्री विष्णु और महादेव आपस में भिड़ गए थे या श्रीहरि ने कैसे वामन अवतार लिया था। महाभारत युद्ध को दर्शाती एक झांकी भी इसमें शामिल थीे जो पूरी यात्रा में भक्तों के आकर्षण का केंद्र रही।

मूवमेंट वाली झांकियों ने कभी लोगों को रिझाया, चौंकाया भी
अमूमन झांकियों में विभिन्न देवी-देवताओं की प्रतिमाओं को सजाकर पेश कर दिया जाता है। इस बार ज्यादातर झांकियां मूवमेंट वाली थीं। यानी इसमें अलग-अलग किरदार हिलते-डुलते नजर आ रहे थे। आंखों की पुतलियां को देखकर भी लगा मानो वे कभी इधर देख रहीं हों, कभी दूसरी ओर। कुल मिलाकर स्वचलित झांकियों ने पूरे परिदृश्य को जीवंत कर दिया था। इस नवाचार ने लोगों को रिझाया भी और चौंकाया भी। मिली जानकारी के मुताबिक ज्यादातर झांकियां दुर्ग और राजनांदगांव से आई थीं।

महापौर पहुंचे झांकियों का स्वागत करने के लिए
विसर्जन झांकियों का स्वागत करने के लिए सोमवार रात महापौर एजाज ढेबर भी जयस्तंभ चौक में पोस्ट ऑफिस के पास बने स्टेज में पहुंचे। यहां से गुजरने वाली विभिन्न झांकियों पर पुष्पवर्षा कर उन्होंने गणेशोत्सव समितियों का स्वागत किया। समितियों और भक्तों की सुविधा को ध्यान में रखते अफसरों को जरूरी व्यवस्था बनाने के दिशा-निर्देश भी दिए।

प्राइज मनी से नाराज ये शहर की शान के खिलाफ
इधर, गणेशोत्सव समितियों ने एक बार फिर प्रशासन को आड़े हाथों लेते हुए बड़ा सवाल उठाया है। समितियों का कहना है कि दुर्ग, राजनांदगांव समेत शहर के दूसरे बड़े शहर जहां विसर्जन झांकी निकालने का रिवाज है, वहां झांकियों को 51 हजार से 1 लाख रुपए तक की प्राइज मनी दी जाती है। वहीं, रायपुर में अधिकतम प्राइज मनी 25 से 30 हजार के बीच है। जबकि, रायपुर में एक-एक झांकियों पर 15 से 20 लाख रुपए तक खर्च किए जाते हैं। समितियों ने इसे राजधानी की शान के खिलाफ बताते हुए प्राइज मनी बढ़ाने की मांग की है।

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